गाजीपुर: जिला अधिवक्ता कल्याण समिति की पहल से गरीब को मिला न्याय

गाजीपुर (Ghazipur) में जिला अधिवक्ता कल्याण समिति (District Advocate Welfare Committee) की पहल पर एक गरीब पीड़ित को निःशुल्क न्यायिक सहायता दिलाकर दोषमुक्त करवाने का मामला चर्चा में है। समिति के सदस्य अधिवक्ता धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) ने पूरी न्यायिक प्रक्रिया में पैरवी करते हुए अभियुक्त नरेश को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समिति ने इस पूरे मामले को गरीब और असहाय लोगों तक न्याय पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया है।

जिला अधिवक्ता कल्याण समिति लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर और पीड़ित लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का कार्य करती रही है। इसी क्रम में जनपद कासगंज (Kasganj) निवासी नरेश पुत्र स्वर्गीय रमेश का मामला समिति के सामने लाया गया। अधिवक्ता ऋषिकेश तिवारी उर्फ मनीष (Rishikesh Tiwari Manish) ने इस मामले की जानकारी समिति के सदस्य अधिवक्ता धनंजय सिंह को दी, जिसके बाद पूरे प्रकरण पर गंभीरता से विचार किया गया।

समिति के सामने रखी अपनी बात:
समिति के समक्ष प्रस्तुत होने पर नरेश ने खुद को निर्दोष बताया। उसने बताया कि उसने केवल एक लड़की की मदद करते हुए उसे फोन करवाकर घर पहुंचाने का प्रयास किया था। समिति ने उसकी बातों को गंभीरता से सुना और मामले की परिस्थितियों का अध्ययन किया। जांच के दौरान समिति को यह भी पता चला कि अभियुक्त अत्यंत गरीब है और न्यायिक प्रक्रिया का खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ है।

गरीबी को देखते हुए लिया गया फैसला:
समिति ने विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया कि नरेश को निःशुल्क न्यायिक सहायता प्रदान की जाएगी। जिला अधिवक्ता कल्याण समिति के सौजन्य से मां भवानी लीगल एसोसिएट (Maa Bhawani Legal Associate) के माध्यम से पूरी न्यायिक प्रक्रिया निशुल्क संचालित करने की सहमति बनी। समिति ने अपने सदस्य अधिवक्ता धनंजय सिंह को इस मामले की पैरवी की जिम्मेदारी सौंपी।

रिकॉर्ड तलाशने में किया कठिन परिश्रम:
समिति के अनुसार नरेश अनपढ़ होने के कारण मुकदमे से संबंधित तथ्यों को सही तरीके से नहीं बता पा रहा था। इसके बाद समिति की टीम ने अधिवक्ता धनंजय सिंह के नेतृत्व में विभिन्न न्यायालयों में रिकॉर्ड की तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बाद मुकदमे की पत्रावली प्राप्त की गई। पता चला कि वर्ष 2017 से पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मुकदमा विचाराधीन था।

पॉक्सो एक्ट के तहत चल रहा था मुकदमा:
मामला विशेष सत्र परीक्षण संख्या 03/2017 के तहत धारा 363, 366 भारतीय दंड संहिता और 7/8 पॉक्सो एक्ट में विचाराधीन था। जानकारी के अनुसार लगभग चार वर्षों तक अनुपस्थित रहने के कारण अभियुक्त के खिलाफ कुर्की आदेश भी पारित हो चुका था। ऐसे में समिति ने आत्मसमर्पण से लेकर न्यायालय में पैरवी तक की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क तरीके से पूरी कराई।

न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर किया दोषमुक्त:
समिति के सदस्य अधिवक्ता धनंजय सिंह ने न्यायालय के समक्ष मामले की पैरवी करते हुए सभी पक्षों और साक्ष्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया। न्यायालय ने पीड़ित पक्ष, बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। इसके बाद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, गाजीपुर की अदालत ने दिनांक 08 मई 2026 को अभियुक्त नरेश को दोषमुक्त घोषित कर दिया।

समिति ने घर लौटने तक की दी सहायता:
निर्णय आने के बाद जिला अधिवक्ता कल्याण समिति ने नरेश को घर लौटने तक के खर्च की भी सहायता प्रदान की। नरेश ने समिति और अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक तंगी के कारण वह न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थ था, लेकिन समिति ने उसे न्याय दिलाने में सहयोग किया।

सदस्यों ने जाहिर की खुशी:
मामले में दोषमुक्ति मिलने के बाद समिति के सदस्यों ने अधिवक्ता धनंजय सिंह और नरेश का मुंह मीठा कराकर खुशी जाहिर की। इस दौरान समिति के सदस्य सुरेश सिंह, सतेंद्र श्रीवास्तव, चंद्र मोहन सिंह, राकेश कुमार, राहुल मिश्रा, मोहम्मद आकिब, अमित कुमार सिंह, अंकित श्रीवास्तव, आर एन सिद्दकी, राहुल शर्मा, अजय कुमार, मो इमरान, विमल कुशवाहा और मनोज कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे।

गरीबों तक न्याय पहुंचाने का प्रयास जारी:
जिला अधिवक्ता कल्याण समिति ने कहा कि वह भविष्य में भी गरीब और निर्धन लोगों तक न्याय पहुंचाने के लिए लगातार कार्य करती रहेगी। समिति का उद्देश्य ऐसे लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है जो आर्थिक अभाव के कारण न्याय पाने में कठिनाई महसूस करते हैं।

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