गाजीपुर (Ghazipur) में सरकारी टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। सरकारी निविदाओं में फर्जी फर्मों और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के दौरान विवेचना में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर कोतवाली (Kotwali) थाने में तैनात दो उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) वाराणसी परिक्षेत्र (Varanasi Range) के निर्देश पर की गई। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नए विवेचक की भी नियुक्ति की गई है।
पूरा मामला क्या है:
पुलिस के अनुसार, नगर क्षेत्र में सरकारी टेंडरों की प्रक्रिया के दौरान सात फर्जी फर्मों के माध्यम से कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की निविदाएं हासिल किए जाने का मामला सामने आया था। इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया और विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान यह पाया गया कि विवेचना में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की समुचित जांच नहीं की गई, जिससे पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े हुए।
दो उपनिरीक्षक निलंबित:
प्रारंभिक जांच में विवेचना अधिकारी रोहित कुमार (Rohit Kumar) और जितेंद्र कुमार उपाध्याय (Jitendra Kumar Upadhyay) द्वारा जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप सामने आए। इसके बाद दोनों उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभागीय कार्रवाई के साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच सुनिश्चित करने के लिए नए विवेचक की नियुक्ति की गई है।
जांच में क्या मिलीं कमियां:
पुलिस जांच के अनुसार, कई फर्मों के नाम पर प्रस्तुत किए गए बैंक खातों, जीएसटी (GST), कार्यालयों और अन्य दस्तावेजों का आवश्यक सत्यापन ठीक प्रकार से नहीं किया गया। इसके अलावा जिन फर्मों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए, उनके संबंध में भी पर्याप्त जांच किए बिना विवेचना पूरी करने का प्रयास किया गया। इन कमियों को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
सख्त कार्रवाई का दिया गया संदेश:
पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में यदि किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दौरान संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि सरकारी निविदाओं से जुड़े मामलों की जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी और भविष्य में ऐसे मामलों की गहन जांच सुनिश्चित की जाएगी।
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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी