देश के कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर बंद होने का संकट

देश में गैस सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ (Essential Commodity Act 1955) को पूरे देश में लागू कर दिया है। बताया जा रहा है कि हॉर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) के रास्ते आने वाली गैस सप्लाई प्रभावित होने के बाद यह फैसला लिया गया है। इस निर्णय का असर कई राज्यों में देखने को मिल रहा है, जहां कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर अस्थायी रोक जैसी स्थिति बन गई है। इससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे भोजनालय संचालकों के सामने कामकाज चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सप्लाई प्रभावित:
गैस संकट की आशंका को देखते हुए दिल्ली (Delhi), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), महाराष्ट्र (Maharashtra), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), राजस्थान (Rajasthan) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) समेत कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई सीमित कर दी गई है। इस स्थिति के कारण होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छोटे होटल और भोजनालय चलाने वाले लोगों ने सरकार से मांग की है कि गैस सप्लाई को जल्द सामान्य किया जाए, क्योंकि उनके व्यवसाय का पूरा संचालन इसी पर निर्भर करता है।

चार कैटेगरी में बांटी गई गैस सप्लाई:
‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ (Essential Commodity Act 1955) लागू होने के बाद गैस वितरण को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जा सके।
पहली श्रेणी में घरेलू रसोई गैस यानी पीएनजी (PNG) और वाहनों में उपयोग होने वाली सीएनजी (CNG) को शामिल किया गया है। इन उपभोक्ताओं को पहले की तरह पूरी गैस सप्लाई जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
दूसरी श्रेणी में खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को रखा गया है, जिन्हें लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्हें यह प्रमाण देना होगा कि गैस का उपयोग खाद उत्पादन में ही किया गया है।
तीसरी श्रेणी में बड़े उद्योग शामिल हैं, जिन्हें नेशनल ग्रिड से जुड़े होने के कारण उनकी आवश्यकता के लगभग 80 प्रतिशत गैस देने की व्यवस्था की गई है।
चौथी श्रेणी में छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट शामिल हैं। इन्हें उनकी पुरानी खपत के आधार पर लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।

क्या है एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955:
‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ (Essential Commodity Act 1955) एक ऐसा कानून है जो सरकार को आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित करने की शक्ति देता है। इस कानून के तहत अनाज, दालें, खाद्य तेल, दवाइयां और ईंधन जैसी जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।
जब किसी जरूरी वस्तु की कमी या कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी की स्थिति बनती है, तब सरकार इस कानून को लागू कर जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने का प्रयास करती है। इसके अंतर्गत व्यापारियों के लिए स्टॉक की सीमा भी तय की जा सकती है।

उत्तर प्रदेश में कॉमर्शियल सिलेंडर पर असर:
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर अघोषित रोक जैसी स्थिति बनने से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कंपनियों ने एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे फिलहाल घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता दें।
इसके बावजूद कई शहरों में आम उपभोक्ताओं के बीच भी चिंता का माहौल है। लखनऊ (Lucknow), कानपुर (Kanpur) और वाराणसी (Varanasi) जैसे शहरों में उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की डिलीवरी में 4 से 5 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है।

अन्य राज्यों में भी बढ़ी परेशानी:
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में होटल संचालकों का कहना है कि बढ़ी हुई कीमतों पर भी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे शादी और समारोह के मौसम में परेशानी बढ़ गई है।
राजस्थान (Rajasthan) में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने कहा है कि गैस का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं होने के कारण उद्योग और मैरिज गार्डन संचालकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में डीलर्स का कहना है कि उन्हें शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को छोड़कर अन्य स्थानों पर कॉमर्शियल सिलेंडर देने से मना किया गया है।
महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुंबई (Mumbai), पुणे (Pune) और नागपुर (Nagpur) में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई में भारी कटौती की गई है। होटल एसोसिएशन ‘आहार’ (AHAR) ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो बड़ी संख्या में होटल बंद हो सकते हैं।
पंजाब (Punjab), आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) और तेलंगाना (Telangana) में भी कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर असर देखने को मिल रहा है, जिससे छोटे व्यवसायों पर दबाव बढ़ गया है।

संकट से निपटने के लिए सरकार के कदम:
स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है, जो गैस सप्लाई की समीक्षा कर रही है। इसके साथ ही घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कर पाएंगे।
इसके अलावा गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी के दौरान ओटीपी और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। सरकार ने तेल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं।

सप्लाई संकट की प्रमुख वजहें:
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार गैस सप्लाई प्रभावित होने के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण हॉर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) पर बढ़ा तनाव है, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर (Arabian Sea) से जोड़ता है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
दूसरा कारण कतर (Qatar) के एलएनजी प्लांट में उत्पादन रुकने की खबरें बताई जा रही हैं। भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा एलएनजी के रूप में आयात करता है और कतर प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

गैस की कीमतों में भी हुआ इजाफा:
हाल ही में सरकार ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की है। दिल्ली (Delhi) में 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर अब 913 रुपये में उपलब्ध है, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी।
वहीं 19 किलोग्राम के कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। नई दरें 7 मार्च से लागू की गई हैं।

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