डॉन बदन सिंह बद्दो – लाखों का इनाम और पता गुमनाम !

अभिनेन्द्र की कलम से…

वो 90 का दौर था जब भारत के हिन्दी पट्टी में अपराध का वायरस घुल चूका था, समंदर पार के आतंकवाद ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री को बम से उड़ा दिया तो बदलती राजनीति के बीच इधर उत्तर प्रदेश और बिहार में अपराध की नई फसल तैयार हो रही थी.

उत्तर प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा जितना खेती-किसानी के लिए प्रख्यात है, उतना ही गैंगस्टर और अपराधियों के लिए कुख्यात रहा . भाटी गैंग, बदन सिंह बद्दो, मुकीम काला गैंग और संजीव जीवा गैंग सक्रीय थे.

90 के दशक में संजीव माहेश्वरी ने अपना खौफ पैदा शुरू किया, फिर धीरे-धीरे वो पुलिस व आम जनता के लिए सिर दर्द बनता चला गया. संजीव जीवा मुजफ्फरनगर का रहने वाला था. अपराध की दुनिया में आने से पहले वो एक मेडिकल स्टोर में कंपाउंडर की नौकरी करता था. इसी नौकरी के दौरान जीवा ने मेडिकल स्टोर के मालिक को ही अगवा कर लिया था. इस घटना के बाद उसने 90 के दशक में कोलकाता के एक कारोबारी के बेटे का भी अपहरण किया. फिरौती दो करोड़ की मांगी थी. इसके बाद जीवा हरिद्वार की नाजिम गैंग में घुसा और फिर सतेंद्र बरनाला के साथ जुड़ा. लेकिन उसके अंदर अपनी गैंग बनाने की तड़प थी.

10 फरवरी 1997 को हुए ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड के चलते संजीव जीवा का नाम संगीन अपराधी के रूप में जाना जाने लगा. ब्रह्मदत्त द्विवेदी भाजपा के कद्दावर नेता थे. उनकी हत्या के मामले में संजीव जीवा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. थोड़े दिनों बाद जीवा मुन्ना बजरंगी गैंग (Munna Bajrangi Gang) में घुस गया. इसी कड़ी में उसका संपर्क मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) से हुआ.आगे चलकर दोनों का नाम कृष्णानंद राय हत्याकांड में आया. हालांकि इस मामले में 2005 में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया था.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा (Sanjeev Maheshwari urf Jeeva) पर 22 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए. इनमें से 17 मामलों में संजीव बरी हो चुका था. वो काफी समय से जेल में था. उस पर वहीं रहते हुए गैंग चलाने के आरोप लगते रहे. कुछ समय पहले उसकी संपत्ति भी प्रशासन द्वारा कुर्क की गई थी.

लेकिन लखनऊ की एक अदालत में गैंगस्टर संजीव जीवा की हत्या कर दी गई है. बुधवार, 7 जून 2023 को संजीव जीवा सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचा था. उसी दौरान वकील के भेस में आए हमलावर ने उसे गोली मार दी. गोली लगते ही जीवा अदालत परिसर में गिर गया और वहीं दम तोड़ दिया. कहा जाता है कि संजीव जीवा की हत्या अतीक अहमद की हत्या जैसे ही थी. उधर अतीक अहमद (Atique Ahmed) के हत्यारे पत्रकार की भेष में आये थे तो इधर जीवा का हत्यारा वकील की भेष में आया था.

7 जून 2023 को लखनऊ जेल में बंद गैंगस्टर जीवा एससी-एसटी कोर्ट में पेशी पर आया था। इसी दौरान कोर्ट के भीतर शूटर ने रिवाल्वर की छह की छह गोलियां उस पर दाग दी थीं। जीवा की मौके पर ही मौत हो गई थी।

कोर्ट में मौजूद मां-बेटी और दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे। मौके से जौनपुर निवासी शूटर विजय यादव को गिरफ्तार किया गया था। विवेचना में सामने आया था कि हत्याकांड की साजिश मोस्ट वांटेड डॉन बदन सिंह बद्दो (Don Badan Singh Baddo) ने नेपाल में रची थी। उसी ने विजय को संजीव की सुपारी दी थी। साक्ष्यों के आधार पर वजीरगंज पुलिस ने बद्दो को आरोपी बनाया था।

अब मोस्ट वांटेड डॉन बदन सिंह बद्दो के बारे में भी जान लीजिये – 1970 के दशक में बदन सिंह बद्दो के पिता चरण सिंह जालंधर छोड़कर यूपी के मेरठ में रहने आ गए थे. परिवार का जीवनयापन के लिए उन्होंने ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम शुरू करना शुरू किया. धीरे-धीरे वो खुद एक ट्रांसपोर्टर बन गए. 7 भाइयों में सबसे छोटे बदन सिंह बद्दो ने भी ट्रांसपोर्ट के कारोबार में कदम रखा. इसी दौरान उसके संबंध इलाके के बदमाशों से हो गए थे. वो अपराधियों के साथ उठने बैठने लगा था. ट्रांसपोर्ट नगर थाना क्षेत्र में उसने आलीशान घर बनाया. इसी दौरान उसने शराब के कारोबार में हाथ आजमाया. माना जाता है कि 1988 में उसने जरायम की दुनिया में आमद दर्ज कराई थी. इसके बाद उसने पलटकर पीछे नहीं देखा. कारोबार और जुर्म दोनों ही जगह उसने अपनी पहचान बना ली थी.

उसने साल 1996 में एक वकील की हत्या को अंजाम दिया. साल 2011 में उसने मेरठ जिला पंचायत के सदस्य संजय गुर्जर का मर्डर किया. ये तो बस शुरुआत थी. इसके बाद साल 2012 में उसने एक केबल नेटवर्क के संचालक पवित्र मैत्रे को मौत के घाट उतार दिया था. उसके खिलाफ यूपी के बाहर भी लूट और डकैती के मामले दर्ज होने लगे. बदन सिंह यूपी पुलिस के लिए सिरदर्द बनने लगा था. लेकिन पुलिस उस तक पहुंच नहीं पा रही थी. लिहाजा, यूपी पुलिस ने उस पर 1 लाख का इनाम रखा. दिल्ली पुलिस ने भी उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार के इनाम का ऐलान किया. अब बदन सिंह के खिलाफ हत्या जैसे संगीन 34 मामले दर्ज हैं. इसके अलावा लूट और डकैती के कई मामलों में वो नामजद है.

साल 1996 में जब बदन सिंह ने एक वकील का मर्डर किया था तो मामला खूब गरमा गया था. इस मामले में उसे अदालत ने आजीवन कैद की सज़ा सुनाई थी. जब बदन सिंह पकड़ा गया तो उसे जेल में डाल दिया गया. इस दौरान उसने अदालत से कई बार पेरोल के लिए गुहार लगाई. लेकिन अदालत ने उसके अपराधों को संगीन बताते हुए परोल देने से इनकार कर दिया. तब बदन ने जेल से भागने की योजना बनाई. जिसे उसने साल 2019 में अमली जामा पहनाया.

दरअसल वो फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार में सजा काट रहा था. उसे एक मामले में गाज़ियाबाद की अदालत में पेश किया जाना था. पुलिस अभिरक्षा में उसे गाजियाबाद लाया गया. 28 मार्च 2019 को पेशी के बाद उसने अपनी अभिरक्षा में आए पुलिसवालों को मेरठ होकर जाने के लिए राजी कर लिया. पुलिस टीम उसे लेकर मेरठ के मुकुट महल होटल पहुंची. इस होटल में बदन सिंह का भी शेयर था. वहां सभी पुलिसवालों की जमकर खातिरदारी हुई. उन्हें खाने के साथ-साथ शराब परोसी गई.

टीम में शामिल आधा दर्जन पुलिसकर्मियों ने इतनी शराब पी ली कि वो नशे में धुत हो गए. इसी दौरान वहां पहले से लाई गई एक काली लग्जरी कार में बदन सिंह भाग निकला. तब से उसका कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लग पाया. बद्दो के भाग जाने के बाद पुलिस ने इस मामले में मुकेश गुप्ता समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इन सभी लोगों पर बद्दो को भागने में मदद करने का आरोप था.

इस मामले में फतेहगढ़ के दरोगा देशराज त्यागी, संतोष कुमार, सुनील कुमार, राजकुमार, ओमवीर व भूपेंद्र सिंह के अलावा बद्दो के साथियों समेत 17 लोगों को नामजद किया गया था। इनमें मुकुट महल होटल का मालिक मुकेश गुप्ता और बद्दो का बेटा सिकंदर भी नामजद था। मुकेश गुप्ता को हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। जबकि सिकंदर को पुलिस तलाश नहीं कर पाई। पुलिसकर्मियों को छोड़कर हाईकोर्ट से सभी आरोपियों की जमानत हो चुकी है। 

2019 में फरार हो जाने के बाद से ही पुलिस बदन सिंह बद्दो की लोकेशन पता लगाने में नाकाम रही. बताया जाता है कि कभी-कभी सोशल मीडिया पर उसकी कुछ पोस्ट दिखाई देती हैं. हालांकि ये कहना मुश्किल है कि उसके अकाउंट वो खुद चलाता है या कोई और. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ये कयास लगाए जाते रहे हैं कि फरार हो जाने के बाद बदन सिंह बद्दो नेपाल के रास्ते विदेश भाग गया था. यही वजह है कि उसका कोई सुराग पुलिस को नहीं मिल पाता.

28 अप्रैल 2022 को योगी सरकार ने गैंगस्टर बदन सिंह बद्दो के गुर्गे अजय सहगल की संपत्ति पर बुलडोजर चलाया था. अजय सहगल को गैंगस्टर बदन सिंह बद्दो का राइट हैंड माना जाता है. उस वक्त उसकी सात अवैध दुकानों को तोड़ा गया था. इससे पहले मेरठ पुलिस ने 15 मार्च 2022 को अवैध तरीके से जमीन कब्ज़ा कर बनाई गई उसकी मार्केट और फैक्ट्री को तोड़कर जमीन कब्जा मुक्त कराई थी. बदन सिंह बद्दो की करोड़ों रुपये की कोठी को भी इससे पहले ध्वस्त कर दिया गया था.

बदन सिंह बद्दो पर 5 लाख का इनाम है और अब यूपी पुलिस ने 15 हजार रुपये का इनाम और बढ़ा दिया है. गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा हत्याकांड के मामले में फरार कुख्यात मेरठ के बेरीपुरा निवासी माफिया बदन सिंह बद्दो पर लखनऊ पुलिस ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है. बदन सिंह जीवा हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता है.

दन सिंह बद्दो के साथ ही सिकंदर पर 25 हजार का इनाम है। पुलिस ने विदेश भागने से रोकने के लिये दोनों का रेड कार्नर नोटिस भी जारी किया है। पुलिस बद्दो और उसके बेटे सिकंदर का सुराग नहीं लगा पाई। इधर एसटीएफ भी बद्दो की तलाश में लगी है।

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