प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) को सख्त निर्देश दिए हैं कि खाली पड़े चालकों और परिचालकों के पदों पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि रोडवेज में वर्षों से नियमों के अनुसार अस्थायी नियुक्तियां होती रही हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि पारदर्शी तरीके से भर्ती कर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
हाईकोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें याची ने तर्क दिया था कि उसके पिता की मृत्यु के बाद उसे अनुकंपा पर नौकरी दी जानी चाहिए थी। याची ने बताया कि उसके पिता की मौत 2006 में सेवा के दौरान हुई थी, लेकिन उसे नौकरी नहीं दी गई। इस पर अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्तियों के मामले अपनी जगह हैं, लेकिन लंबी अवधि के लिए रोडवेज को नियमित भर्ती प्रक्रिया अपनानी होगी।
1165 पद खाली, भर्ती की जरूरत
अदालत के सामने पेश आंकड़ों के अनुसार, निगम में इस समय लगभग 1165 पद खाली हैं। कोर्ट ने कहा कि इन पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी कर भर्ती शुरू की जाए ताकि यात्री सेवाएं प्रभावित न हों और योग्य उम्मीदवारों को रोजगार का अवसर मिल सके।
क्लीनचिट का मतलब आपराधिक मुकदमे से बरी नहीं
इसी बीच हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में यह भी स्पष्ट किया कि किसी विभागीय जांच में क्लीनचिट मिलना, आरोपी को आपराधिक मुकदमे से बरी कराने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं और विभागीय जांच में बेदाग पाए जाने का मतलब यह नहीं कि अदालत स्वतः अभियोजन को समाप्त कर दे।
UP Roadways: चालक-परिचालक की भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…