लखनऊ में चाइनीज मांझे से होने वाली घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रतिबंध के बावजूद शहर में यह जानलेवा मांझा लगातार लोगों को घायल कर रहा है। ताजा मामला गोमती नगर विस्तार का है, जहां ड्यूटी पर जा रहे एक संविदा बिजली कर्मी की गर्दन और चेहरा चाइनीज मांझे से कट गया। गनीमत रही कि समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया गया और उपचार के बाद उनकी जान बच सकी।
घायल युवक की पहचान संविदा बिजली कर्मी सुधीर कुमार के रूप में हुई है। यह घटना 5 फरवरी की शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही है। इससे कुछ घंटे पहले इसी इलाके में शहीद पथ पर स्कूटी सवार एक रिटायर्ड फौजी भी चाइनीज मांझे का शिकार हो चुके थे। वहीं, 4 फरवरी को पुराने लखनऊ में दो मासूम बेटियों के पिता की इस मांझे से मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ड्यूटी जाते समय हुआ हादसा:
जानकारी के अनुसार, संविदा बिजली कर्मी सुधीर कुमार 5 फरवरी की शाम बाइक से अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे। जैसे ही वह गोमती नगर विस्तार इलाके से गुजरे, अचानक सड़क पर फैले चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए। मांझा इतनी तेजी से उनकी गर्दन और चेहरे से टकराया कि वहां गहरा कट लग गया। दर्द और घबराहट के बावजूद उन्होंने किसी तरह बाइक रोकी और सड़क किनारे खड़े हो गए।
राहगीरों ने बचाई जान:
हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद राहगीरों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मदद की। उन्होंने सावधानी से मांझा हटाया और घायल सुधीर कुमार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (Dr. Ram Manohar Lohia Hospital) पहुंचाया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि यदि मांझा थोड़ा और नीचे गर्दन में लग जाता, तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी।
कुछ घंटों पहले रिटायर्ड फौजी भी हुआ था घायल:
इसी दिन गोमती नगर विस्तार क्षेत्र में शहीद पथ पर स्कूटी सवार एक रिटायर्ड फौजी भी चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए थे। मांझा उनके गाल और होंठ में लगा, जिससे करीब 10 इंच लंबा गहरा घाव हो गया। उन्हें करीब 30 टांके लगाने पड़े। गर्दन में मांझा न लगने के कारण उनकी जान बच गई। यह घटना 24 घंटे के भीतर मांझे से हुई दूसरी बड़ी दुर्घटना थी।
प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक्री:
स्थानीय लोगों का कहना है कि चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के बावजूद इसकी बिक्री शहर में धड़ल्ले से हो रही है। पतंगबाजी के नाम पर यह जानलेवा धागा बाजारों और गलियों में आसानी से मिल जाता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा बाइक सवारों और पैदल चलने वाले राहगीरों को होता है। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक सख्ती केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
पुलिस अभियान पर उठे सवाल:
लखनऊ में चाइनीज मांझे से लगातार हो रही घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और डीजीपी राजीव कृष्ण (Rajeev Krishna) के निर्देश पर पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद गोमती नगर विस्तार जैसी पॉश कॉलोनी में इस तरह की घटनाएं होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नियमित चेकिंग और सख्त कार्रवाई होती, तो शायद ये हादसे टाले जा सकते थे।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश:
5 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चाइनीज मांझे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि अगर इस मांझे से किसी की जान जाती है, तो इसे हत्या माना जाएगा। ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज कर जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई के आदेश:
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि चाइनीज मांझे के अवैध नेटवर्क की पहचान की जाए। पूरे प्रदेश में सघन अभियान चलाकर इसकी जब्ती की जाए और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। बावजूद इसके, लगातार हो रही घटनाएं यह दिखाती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी सख्ती की कमी है।
लोगों में बढ़ता डर और गुस्सा:
लगातार हो रहे हादसों से शहर के लोगों में डर और गुस्सा दोनों बढ़ता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। लोगों ने मांग की है कि चाइनीज मांझे की बिक्री करने वालों और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कार्रवाई की जाए।
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