बांग्लादेश ने भारत से छीनकर चीन को क्यों दिया मोंगला पोर्ट; सिर्फ 80 किमी दूर बैठेगा चीन, ये कितनी बड़ी चिंता

22 से 26 जून 2026 तक बांग्लादेश (Bangladesh) के प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tarique Rahman) चीन (China) के दौरे पर रहे। इसी दौरान बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट (Mongla Port) से जुड़े आर्थिक क्षेत्र के प्रोजेक्ट को भारत (India) की जगह चीन को सौंप दिया। इसके साथ ही तीस्ता नदी (Teesta River) के प्रबंधन में भी चीन की भूमिका तय होने की बात सामने आई है। यह घटनाक्रम भारत की समुद्री और सीमाई सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मोंगला पोर्ट भारत के तटीय क्षेत्र और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के अपेक्षाकृत करीब स्थित है।

मोंगला प्रोजेक्ट चीन को कैसे मिला?:
साल 2015 में बांग्लादेश (Bangladesh) और भारत (India) के बीच दो आर्थिक क्षेत्रों के विकास को लेकर समझौता हुआ था। इनमें मोंगला पोर्ट (Mongla Port) और चटगांव (Chattogram) क्षेत्र शामिल थे। शुरुआती चरण में भारत की सहायता से मोंगला पोर्ट से खुलना (Khulna) तक नई रेलवे लाइन बनाई गई। वर्ष 2018 में भारत सरकार ने इस परियोजना का ठेका हीरानंदानी ग्रुप (Hiranandani Group) को दिया। मार्च 2022 में बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन अथॉरिटी (BEZA) और एविटा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड (Evita Constructions Pvt. Ltd.) के बीच समझौता भी हुआ, लेकिन अगस्त 2024 में शेख हसीना (Sheikh Hasina) सरकार के तख्तापलट के बाद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

सरकार बदलने के बाद बदला फैसला:
शेख हसीना (Sheikh Hasina) के भारत आने और अंतरिम प्रशासन के दौरान परियोजना पर कोई विशेष प्रगति नहीं हुई। इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सत्ता में आने और फरवरी 2026 में तारिक रहमान (Tarique Rahman) के प्रधानमंत्री बनने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन अथॉरिटी (BEZA) के अनुसार भारतीय कंपनी निर्धारित समय में काम शुरू नहीं कर सकी। इसी बीच चीन (China) ने मोंगला पोर्ट के पास आर्थिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव दिया और अक्टूबर 2025 में भारत से जुड़ा प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया। 25 जून 2026 को बीईजेडए (BEZA) और चाइना सिविल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (CCECC) के बीच 110 एकड़ क्षेत्र में आर्थिक जोन विकसित करने का समझौता हुआ।

मोंगला पोर्ट पर क्या करेगा चीन?:
समझौते के अनुसार चीन (China) मोंगला पोर्ट (Mongla Port) के विकास का कार्य करेगा। इसके तहत दो नए कंटेनर जेटी बनाए जाएंगे, कंटेनर यार्ड तैयार होंगे और चार आधुनिक क्रेन लगाए जाएंगे। साथ ही बांग्लादेश (Bangladesh) का पहला स्वचालित कंटेनर संचालन प्रणाली भी स्थापित करने की योजना है। इन कार्यों के पूरा होने के बाद बंदरगाह की वार्षिक क्षमता लगभग ढाई गुना बढ़कर करीब 3.94 लाख टीईयू (TEU) तक पहुंचने का अनुमान है।

आर्थिक जोन में स्थापित होंगी फैक्ट्रियां:
मोंगला पोर्ट (Mongla Port) के निकट बागेरहाट (Bagerhat) जिले में 110 एकड़ भूमि पर टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से जुड़ी फैक्ट्रियां स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा वेयरहाउस और भंडारण सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन अथॉरिटी (BEZA) के सदस्य मोहम्मद नजरुल इस्लाम (Mohammad Nazrul Islam) के अनुसार भूमि बांग्लादेश उपलब्ध कराएगा, जबकि निवेश और विकास का कार्य चीनी कंपनी करेगी। परियोजना में हिस्सेदारी को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

चटगांव और तीस्ता परियोजना पर भी सहमति:
26 जून को जारी बांग्लादेश-चीन संयुक्त बयान में चटगांव (Chattogram) में आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने तथा तीस्ता नदी (Teesta River) के प्रबंधन में चीन (China) के सहयोग का भी उल्लेख किया गया। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और आधारभूत संरचना सहयोग को और विस्तार मिलने की संभावना जताई गई है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है घटनाक्रम?:
भारत (India) की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी (Veena Sikri) के अनुसार मोंगला पोर्ट (Mongla Port) और तीस्ता परियोजना पहले भारत को सौंपी गई थीं, लेकिन बाद में इन फैसलों में बदलाव हुआ। उनके अनुसार यह घटनाक्रम भारत और बांग्लादेश (Bangladesh) के संबंधों तथा क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बंगाल की खाड़ी में बढ़ सकती हैं चुनौतियां:
विशेषज्ञों का मानना है कि मोंगला पोर्ट (Mongla Port) के विकास में चीन (China) की भागीदारी से बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) क्षेत्र में उसकी मौजूदगी बढ़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि चीन पहले ही बांग्लादेश (Bangladesh) के कॉक्स बाजार (Cox’s Bazar) में पनडुब्बी बेस के विकास से जुड़ा रहा है। वहीं श्रीलंका (Sri Lanka) के हंबनटोटा बंदरगाह (Hambantota Port) का उदाहरण भी दिया जाता है, जहां चीनी निवेश के बाद दीर्घकालिक लीज व्यवस्था लागू हुई थी।

तीस्ता परियोजना और सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर नजर:
तीस्ता नदी (Teesta River) सिक्किम (Sikkim) से निकलकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) के सिलीगुड़ी (Siliguri) क्षेत्र से गुजरते हुए बांग्लादेश (Bangladesh) में प्रवेश करती है। प्रस्तावित परियोजना का क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट स्थित बताया गया है। रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी (Brahma Chellaney) का कहना है कि यदि लालमनिरहाट (Lalmonirhat) क्षेत्र में हवाई अड्डे का विकास होता है तो इससे क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता बढ़ सकती है। वहीं वीना सिकरी (Veena Sikri) ने भी कहा कि भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखेगी।

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