कार्तिक पूर्णिमा पर बलिया में कुछ खास…

बलिया (Ballia) में कार्तिक पूर्णिमा स्नान का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस पावन अवसर पर जिले के प्रसिद्ध घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज़ से आए हजारों लोग इस पवित्र दिन पर गंगा में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। दर्दर मुनि और भृगु मुनि की तपोस्थली माने जाने वाले बलिया के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। समाजसेवी और होटल ‘एल जी इन’ (LG Inn) के संचालक प्रकाश सिंह (Prakash Singh) ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां स्नान करने से अनेक तीर्थों का पुण्य फल प्राप्त होता है।

आस्था और पौराणिक महत्व:
प्रकाश सिंह (Prakash Singh) ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बलिया (Ballia) की यह धरती धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन यहां गंगा स्नान करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। दर्दर मुनि और भृगु मुनि की नगरी में होने वाला यह स्नान सदियों से परंपरा का हिस्सा रहा है। आस्था से भरे इस आयोजन में श्रद्धालु गंगा तट पर दीपदान और पूजा-अर्चना भी करते हैं।

लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी:
इस बार भी कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु बलिया के घाटों पर पहुंचे। लोगों ने गंगा में स्नान कर अपने परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की। घाटों पर सुबह से ही “हर हर गंगे” के जयकारे गूंजते रहे। इस मौके पर जिले के सभी प्रमुख घाटों—जैसे कि दर्दर, भृगु और बकुलहा घाट—पर भक्तों की भीड़ देखने को मिली। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधा की विशेष व्यवस्था की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

स्नान के बाद किया गया जलाभिषेक:
स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने आसपास स्थित मंदिरों में जाकर भगवान का जलाभिषेक किया और परंपरा के अनुसार सतुआ, मूली तथा गुड़ की जलेबी (Gurhi Jalebi) का प्रसाद ग्रहण किया। यह प्रसाद कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालुओं ने इसके बाद लगने वाले मेले का भी आनंद लिया, जहां धार्मिक वस्तुएं, खिलौने, मिठाइयां और ग्रामीण उत्पाद बिकते नजर आए। पूरे इलाके में पर्व का उल्लास वातावरण को दिव्यता से भर गया।

राष्ट्रीय पहचान की मांग:
समाजसेवी प्रकाश सिंह (Prakash Singh) का कहना है कि बलिया (Ballia) का कार्तिक पूर्णिमा मेला ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण है कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मेला भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा की झलक प्रस्तुत करता है, इसलिए सरकार को इसे राष्ट्रीय दर्जा देने पर विचार करना चाहिए।

श्रद्धालुओं के लिए की विशेष व्यवस्था:
प्रकाश सिंह (Prakash Singh), जो होटल ‘एल जी इन’ (LG Inn) के मालिक हैं, ने बताया कि उन्होंने अपने होटल में नहान (स्नान) के लिए आए श्रद्धालुओं के ठहरने की विशेष व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि बलिया आने वाले लोगों की सुविधा और सेवा ही इस पर्व का असली धर्म है। उनके इस सामाजिक प्रयास की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की।

समापन:
कार्तिक पूर्णिमा का यह पवित्र पर्व बलिया (Ballia) की धार्मिक पहचान को और मजबूत करता है। आस्था, परंपरा और संस्कृति से भरा यह आयोजन न केवल श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत को भी उजागर करता है। आने वाले समय में इस मेले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले, यही स्थानीय लोगों की अपेक्षा है।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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