शहीद ए आजम भगत सिंह के 113वे जन्मदिन पर शिक्षा रोजगार अधिकार का किया गया आयोजन
संवाददाता शैलेंद्र शर्मा
आजमगढ़। शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के 113वें जन्मदिन(28 सितंबर 2020)को देशव्यापी “शिक्षा रोजगार अधिकार दिवस” का आयोजन किया गया।
उसी कड़ी में आज़मगढ़ में भी, जनवादी लोकमंच,किसान संग्राम समिति,अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र मंच,आज़मगढ़ की तरफ से डी ए वी कॉलेज गेट से जुलूस निकलकर,रैदोपुर स्थित भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण कार्यक्रम और फिर कलेक्ट्रेट भवन होते हुए कॉलेज गेट पर पुनः “भगत सिंह तू जिंदा है” संदीप के गीत के साथ समाप्त हुआ।
जुलूस में निजीकरण,बेरोजगारी,महंगाई, गरीबी,भुखमरी,किसान-मजदूर-छात्र विरोधी नीतियों,नई शिक्षा नीति की साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए छात्रों नौजवानों ने भगत सिंह के सपने को पूरा करने की प्रतिज्ञा करते हुए कार्यक्रम का शानदार समापन किया
बतादे कि आज ही के दिन 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा नामक गांव में जन्म लेने वाले क्रांतिकारी शहीद ए आजम भगत सिंह ने मात्र 23 वर्ष की उम्र में साम्राज्यवादी औपनिवेशिक ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति के उद्देश्य से हंसते-हंसते फांसी के तख्ते को चूम लिया। 23 वर्ष की उम्र में कोई नौजवान मरना नहीं चाहता है लेकिन जब उसे अपनी जिंदगी जीने और देश के लाखों करोड़ों लोगों का जिंदगी को बेहतर बनाने के मकसद में से किसी एक को चुनना हो तो मौत को गले लगाता है।
ऐसे ही क्रांतिकारी शहीदों में से अग्रणी युवाओं के प्रेरणा स्रोत शहीद ए आजम भगत सिंह का मकसद आजादी के 73 वर्ष बाद भी पूरा न होना, उनके चाहने वाले देशभक्तों और शोषण के विरुद्ध लड़ने वालों के सामने एक चुनौती है।इस देश को ब्रिटिश शासन की गुलामी से मुक्ति तो मिली लेकिन यहाँ का शासकवर्ग आज तक देश के वीर सपूतों को शहीद का दर्जा नहीं दे सका। क्योंकि भगत सिंह और उनके साथियों का विचार था एवं उद्देश्य केवल सरकार बदलना नहीं था बल्कि एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना था।जिसमें देश की आम जनता गरीबों,मजदूरों ,किसानों और छात्र नौजवानों का शोषण उत्पीड़न खत्म हो सके दुख की बात यह है कि आजादी के 73 वर्ष बाद भी देश में गरीबी अमीरी का अंतर बढ़ता जा रहा है और पूंजीपति वर्ग व बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तिजोरी भरती जा रही है।ऐसी शासन व्यवस्था के खिलाफ निर्णायक संघर्ष ही शहीद ए आजम भगत सिंह को याद करने का सबसे अच्छा सबक है।
दिल से न निकलेगी मरकर भी वतन की ये उल्फत!
मेरी मिट्टी से भी खुशबु-ए-वतन आएगी!
जुलूस में डॉक्टर रवींद्र नाथराय अवधेश,प्रशांत, दान बहादुर, तेज बहादुर,हरिकेश,दुखहरण, राहुल आकाश,विजय,संदीप,अजय राकेश, श्रेय,उत्तम रामाश्रय अजीत सुजीत अंकित सर्वजीत विजय मुकेश सूबेदार आशीष अनिरुद्ध सुनील संजय आदि लोगों ने निजीकरण, बेरोजगारी के खिलाफ नारा लगाते हुए सहभागिता की।