उत्तर प्रदेश में साचीज (SACHIJ) पोर्टल के माध्यम से आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। अब यह खुलासा हुआ है कि न केवल 300 फर्जी कार्ड बनाए गए, बल्कि मरीजों को फर्जी तरीके से भर्ती दिखाकर उनके नाम पर बिल भुगतान कराने की भी कोशिश की गई। यह मामला स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचाने वाला साबित हुआ है।
फर्जी मरीजों का बिल बनाने की कोशिश:
जांच में सामने आया है कि प्रदेश में करीब 70 मरीजों का अग्रिम संस्तुति पत्र साचीज पोर्टल पर भेजा गया था। इन मरीजों के नाम पर अस्पतालों ने उपचार से जुड़ा खर्च दिखाते हुए भुगतान प्राप्त करने का प्रयास किया। यह पूरा खेल पोर्टल में तकनीकी छेड़छाड़ कर किया गया ताकि फर्जी उपचार के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हो सके।
अस्पतालों पर लगी रोक, जांच टीम गठित:
आयुष्मान कार्ड घोटाले का मामला सामने आने के बाद अब बिल से जुड़े इस नए फर्जीवाड़े की भी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। सभी संबंधित अस्पतालों को चिन्हित कर लिया गया है और उनके भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। विभाग ने अस्पतालों की जांच के लिए एक अलग टीम गठित की है, जो यह पता लगाएगी कि किस स्तर पर और किन कर्मचारियों की मिलीभगत से यह गड़बड़ी की गई।
आईपी एड्रेस के जरिए चल रही पड़ताल:
इस घोटाले की गुत्थी सुलझाने के लिए हजरतगंज पुलिस (Hazratganj Police) ने जांच की दिशा तकनीकी साक्ष्यों की ओर मोड़ी है। पुलिस अब पोर्टल में लॉगिन करने वालों के आईपी एड्रेस (IP Address) की मदद से उन व्यक्तियों की पहचान कर रही है जिन्होंने सिस्टम में छेड़छाड़ की। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह काम किसी साइबर नेटवर्क या अंदरूनी मिलीभगत से किया गया था।
पुलिस अधिकारी ने दी जानकारी:
कमिश्नरेट हजरतगंज (Hazratganj Commissionerate) के पुलिस अधिकारी विकास जायसवाल (Vikas Jaiswal) ने बताया कि जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इस मामले में शिकायत करने वाले डॉक्टर सचिन वैश्य (Dr. Sachin Vaishya) के बयान जल्द दर्ज किए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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