ताजनगरी से उजागर हुआ नकली दवाओं का नेटवर्क



Agra: आगरा में औषधि विभाग और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के बाद यह खुलासा हुआ है कि नकली दवाओं का कारोबार केवल ताजनगरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल पूरे उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। बीते 22 से 31 अगस्त तक चली इस विशेष अभियान में विभाग ने पांच बड़ी फर्मों पर छापेमारी की, जिनमें हे मां मेडिको, बंसल मेडिकल एजेंसी, ताज मेडिको, एमएसवी मेडि प्वाइंट और श्री राधे मेडिकल एजेंसी शामिल हैं। इन फर्मों से भारी मात्रा में नकली दवाएं बरामद हुईं। कार्रवाई के बाद आगरा औषधि विभाग ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों को अलर्ट जारी किया है और संबंधित जिलों से खरीद-फरोख्त का पूरा ब्योरा मांगा गया है।

भ्रष्टाचार और गिरफ्तारी की कड़ी

छानबीन में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। हे मां मेडिको के संचालक हिमांशु अग्रवाल को एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने के आरोप में जेल भेजा गया है। वहीं, बंसल मेडिकल एजेंसी के मालिक संजय बंसल, उनके पुत्र और भाई को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में मिले बिलों से स्पष्ट हुआ कि इन फर्मों से दवाओं की सप्लाई बरेली, लखनऊ समेत कई जिलों में की गई थी। यही नहीं, अन्य जिलों में भी बिक्री की जानकारी सामने आई है। इसी आधार पर औषधि विभाग ने सभी मंडलों के सहायक आयुक्तों से बाजार में इन दवाओं की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

चेन्नई और पुडुचेरी से गहरा कनेक्शन

कार्रवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि नकली दवाओं का बड़ा हिस्सा दक्षिण भारत से बनकर आता था। मीनाक्षी फार्मा (पुडुचेरी) और अमान फार्मा (चेन्नई) जैसी कंपनियों से दवाइयां तैयार कराई जाती थीं और उन्हें लखनऊ के कुछ कारोबारी बंधुओं की फर्मों के नाम पर भेजा जाता था। बिल इन्हीं के नाम से काटे जाते थे, जबकि माल उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचता था। चेन्नई में भी छापेमारी की गई, मगर अब तक मुख्य सौदागर पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। यह नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।

विभाग की सतर्कता और आगे की रणनीति

आगरा मंडल के सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि नकली दवाओं की फर्मों की पूरी जानकारी अन्य मंडलों के औषधि अधिकारियों को भेज दी गई है। उनसे कहा गया है कि वे बाजार में इन फर्मों से भेजी गई दवाओं की जांच करें और रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। यह जानकारी लखनऊ मुख्यालय को भी भेजी गई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि मंडल स्तर पर गहन जांच और आपसी समन्वय को बढ़ाया जाए तो इस गोरखधंधे को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से यह कार्रवाई प्रदेश के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

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