लखनऊ: डायोसिस की संपत्तियों में गड़बड़ी का आरोप, जांच की मांग
लखनऊ (Lucknow) स्थित यूपी प्रेस क्लब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व जिला उपाध्यक्ष, आगरा और अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष Ashok Kushwaha (अशोक कुशवाहा) ने आगरा डायोसिस और उससे संबद्ध संस्थाओं से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, ट्रस्टों और अन्य निकायों से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं, दस्तावेजों में कथित हेराफेरी, संस्थागत संपत्तियों पर अनुचित नियंत्रण तथा धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
अशोक कुशवाहा ने कहा कि पूरे प्रकरण में कथित तौर पर लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से शैक्षणिक संस्थाओं और उनसे जुड़े ट्रस्ट एवं सोसाइटी की प्रशासनिक तथा वित्तीय व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की।
शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े मामलों की जांच की मांग:
अशोक कुशवाहा ने आगरा डायोसिस और उससे संबद्ध संस्थाओं के अंतर्गत संचालित शैक्षणिक संस्थानों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन संस्थानों से जुड़े ट्रस्ट, सोसाइटी और अन्य निकायों की प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्थाओं की स्वतंत्र तरीके से जांच की आवश्यकता है।
उन्होंने कथित वित्तीय अनियमितताओं और दस्तावेजों में हेराफेरी से संबंधित शिकायतों की भी जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और उच्चस्तरीय स्तर पर कराई जानी चाहिए, ताकि संबंधित मामलों के वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जा सके।
संस्थागत संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर सवाल:
अशोक कुशवाहा ने संस्थागत संपत्तियों पर कथित रूप से अनुचित नियंत्रण स्थापित किए जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं और उनसे जुड़े ट्रस्ट एवं सोसाइटी की संपत्तियों तथा प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि संस्थागत संपत्तियों और उनसे संबंधित व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।
दस्तावेजों में कथित हेराफेरी का आरोप:
अशोक कुशवाहा ने आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थाओं और उनसे जुड़े निकायों की व्यवस्था में दस्तावेजों में कथित बदलाव किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने इन शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की हेराफेरी या वित्तीय व्यवस्था में अनियमितता से संबंधित शिकायतें हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। उनके मुताबिक, जांच के बाद ही पूरे मामले के तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने लाया जा सकता है।
धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों की भी जांच की मांग:
अशोक कुशवाहा ने धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों की भी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच के बाद वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच एक साथ किए जाने की आवश्यकता है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और संस्थागत संपत्तियों से संबंधित शिकायतें शामिल हैं।
केंद्र और राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग:
अशोक कुशवाहा ने केंद्र एवं राज्य सरकार से पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि जांच के माध्यम से कथित वित्तीय अनियमितताओं, दस्तावेजों में हेराफेरी, संस्थागत संपत्तियों से जुड़े आरोपों और धर्मांतरण से संबंधित शिकायतों के वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए।
फिलहाल उनके द्वारा लगाए गए आरोप और की गई जांच की मांग उनके बयान पर आधारित है। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस सूचना में उपलब्ध नहीं है। किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
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