उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) के डालीबाग इलाके में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) की पत्नी फरहत अंसारी के नाम दर्ज कुर्क कोठी को अदालत के आदेश के बाद 2 सितंबर 2026 को सील मुक्त कर परिवार को सौंप दिया गया। करीब चार साल बाद परिवार के सदस्य जब कोठी के भीतर पहुंचे तो वहां के हालात देखकर हैरान रह गए। सांसद की बेटी नूरिया अंसारी (Nooria Ansari) ने मकान की बदहाली और कथित तौर पर सामान गायब होने को लेकर नाराजगी जताई और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
चार साल बाद घर पहुंचा परिवार, बदहाली देख हैरान:
नूरिया अंसारी के अनुसार, परिवार ने जब कोठी को दोबारा देखा तो पूरा मकान पहले की स्थिति से बिल्कुल अलग नजर आया। उन्होंने कहा कि जिस हालत में परिवार घर छोड़कर गया था और जिस स्थिति में अब वापस मिला है, उसमें काफी अंतर है। उनके मुताबिक, घर की मौजूदा स्थिति परिवार के लिए मानसिक आघात जैसी है।
नूरिया ने घर में बड़े स्तर पर सामान गायब होने और तोड़फोड़ का आरोप लगाया। उनका कहना है कि मामला केवल सामान्य चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि घर की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वहां व्यापक रूप से सामान निकाल लिया गया हो।
जेवरात से लेकर घर के सामान तक गायब होने का दावा:
नूरिया अंसारी ने आरोप लगाया कि कोठी से जेवरात और नकदी के साथ-साथ टीवी, वीसीआर और कैमरों का सेटअप भी गायब मिला। उन्होंने यह भी दावा किया कि घर के बाथरूम में लगी टोटियां तक उखाड़कर ले जाई गई हैं। उनके बयान के मुताबिक, मकान के भीतर कई स्थानों पर तोड़फोड़ के निशान भी दिखाई दिए।
उन्होंने इस स्थिति को परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक बताया और कहा कि घर की मौजूदा हालत ने उन्हें गहरा झटका दिया है। हालांकि, घर से वास्तव में कितना सामान गायब है और नुकसान कितना हुआ है, इसका आकलन जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सरकारी सील के दौरान सुरक्षा पर उठे सवाल:
नूरिया अंसारी ने वर्ष 2022 में मकान को कुर्क और सील किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उस समय परिवार को अपना कीमती सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया था।
उनके अनुसार, जब संपत्ति सरकारी सील के अधीन थी, तब उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की थी। इसी आधार पर उन्होंने घर से सामान गायब होने की स्थिति को लेकर प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है।
2023 में भी घुसपैठ की शिकायत का दावा:
नूरिया ने यह भी बताया कि वर्ष 2023 में पड़ोसियों की ओर से घर में लाइट जलने और आहट होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद डालीबाग स्थित मकान में अनधिकृत प्रवेश की आशंका को लेकर डीएम गाजीपुर (Ghazipur) को शिकायत दी गई थी।
नूरिया के मुताबिक, उस समय भी मकान का ताला टूटा हुआ मिला था और उसके स्थान पर दूसरा ताला लगाया गया था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
शिकायत के बाद जांच में जुटी पुलिस:
मकान में कथित चोरी और तोड़फोड़ के मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। नूरिया अंसारी के अनुसार, पुलिस की फॉरेंसिक और जांच टीम मौके पर पहुंची और वहां मौजूद स्थिति का निरीक्षण किया।
जांच टीम की ओर से कथित तौर पर गायब सामान और मकान में हुए नुकसान से जुड़े तथ्यों का जायजा लिया जा रहा है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत हुई थी कुर्की:
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, गाजीपुर प्रशासन ने अक्टूबर 2022 में गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत डालीबाग में करीब 6,700 वर्ग फीट क्षेत्र में बनी इस कोठी को कुर्क किया था। इसके बाद संपत्ति को लखनऊ नगर आयुक्त की निगरानी में सौंपा गया था।
इस संपत्ति को लेकर परिवार की ओर से लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने संपत्ति को किसी आपराधिक गतिविधि से अर्जित संपत्ति नहीं मानते हुए इसे तत्काल अवमुक्त करने का आदेश दिया। इसी आदेश के अनुपालन में 2 सितंबर 2026 को कोठी को सील मुक्त कर परिवार को कब्जा सौंपा गया।
अब कोठी से सामान गायब होने और कथित तोड़फोड़ के आरोपों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मकान में क्या-क्या नुकसान हुआ और सामान गायब होने की वास्तविक स्थिति क्या है।
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