ग़ाज़ीपुर: ख्यातिलब्ध इतिहासकार लेखक उबैदुररहमान सिद्दकी का उर्दू काव्य संग्रह ” शहर का सुकरात ” प्रकाशित होने पर हंटर गाज़ीपुर के निवास स्थान टाउन हाल,स्थित एक साहित्यिक गोष्ठी आयोजित की गई।इसमें शहर के उर्दू हिंदी के नामचीन शायर एवम साहित्यकार इकेत्रित थे।
अपने स्वागत गीत की प्रस्तुति के बाद हंटर गाज़ीपुर ने कहा कि उबैद साहब इतिहास के एक मशहूर शोधकर्ता तथा लेखक के रूप में विख्यात है लेकिन उनका यह काव्य संग्रह जो 241 पृष्ठों पर आधारित है जिसमे उनके कोमल मन के एहसास को जिस तरह से काव्य धारा में बांधा है, स्वागत योग्य है। खामोश गाज़ीपुर और डाक्टर राही मासूम रजा के बाद शायरी के मैदान में बड़े ही सम्मान के साथ उबैद साहब का नाम लिया जाता है। किसी एक बेहतरीन शायर की शायरी में जो विशेषताएं होनी चाहिए उनके इस काव्य संग्रह में देखने को मिलती है। बेशक उनकी यह पुस्तक एक कीर्तमान साबित करेगी।
गुरु हसन फैजी ने कहा कि ऊबैदुर रहमान साहब की 13 पुस्तकों जो गद्य में है उसके बाद उनका यह उर्दू काव्य संग्रह शहर का सुकरात वास्तव में एक उम्दा कृति है। इसमें मन के एहसास को जिस प्रकार शब्दों में ढाला है , दिल को छूता है। आगे हसन साहब ने कहा कि डाक्टर राही के बाद उबैद साहब का भी काव्य संग्रह आदर की निगाह से देखा जाएगा।
उसके बाद अपने उद्बोधन में नसीम जमानवी साहब ने कहा कि उबैद साहब आज़ाद नज़्मों के शायर के रूप में अपना एक स्थान साहित्यिक मंच पर बनाया है , सराहनीय योग्य है। जिस तरह गुलज़ार,अमृता प्रीतम,मुनीर नियाज़ी और अहमद नदीम क़ासमी की छोटी छोटी कविताओं के माध्यम से कोमल मन पर दस्तक देते है ,उसी तरह उबैद साहब की भी कुछ कविताएं हमे बांधे रखती है और बड़े देर तक अपने वश में किए रहती है।
इस गोष्ठी में अशरफ अहमद,शकील अहमद,गुलाम मुस्तफा जूही आदि ने भी उबैद साहब के नए काव्य संग्रह पर अपने बात रखी तथा उन्हें आशीर्वाद दिया कि ऐसे ही जनपद का नाम रोशन करते रहे।

