5 जून 1972, देवभूमि में एक ऐसे शख्स का जन्म हुआ, जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में इतिहास रच दिया। जिसका तेवर अपराधियों के लिए पौढ़ी गढ़वाल के अग्रिमियों सा गर्म और शोषित वंचितों के लिए बसंत बन जाता है। 1972 में उत्तर प्रदेश का देवभूमि, जिसे वर्तमान में उत्तराखंड कहा जाता है, यहीं है पौढ़ी गढ़वाल। जहाँ गर्मियों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है और सर्दियों में बर्फ गिरने लगती है। यहाँ करीब 96% हिन्दू रहते हैं। यह मंदिरों का क्षेत्र है और यहीं आनंद सिंह बिष्ट नाम के एक शख्स के घर पांचवीं बार बच्चे की किलकारी गूंजी। घरवालों ने इस बच्चे का नाम अजय सिंह बिष्ट रखा। 10वीं पास होते ही उनका दाखिला भरत मंदिर इंटर कॉलेज में कराया गया। इसके बाद उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बैचलर्स की डिग्री हासिल की। अजय के पिता चाहते थे कि बैचलर्स करने के बाद वो उनके ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में मदद करें, लेकिन बिजनेस में उनकी जरा भी दिलचस्पी नहीं थी।
फिर क्या था 21 साल का एक लड़का घरवालों से यह कहकर निकलता कि उसे नौकरी करने बाहर जाना है। वह सीधा UP के गोरखपुर में गोरक्षपीठ पहुंच जाता है। इस लड़के की प्रतिभा को देख गोरक्षपीठ के महंत अवैद्यनाथ उससे काफी प्रभावित हो जाते हैं। फिर 1 साल बाद 1994 में यह लड़का महंत अवैद्यनाथ से गुरु दीक्षा प्राप्त करता है। इसी वक्त इस लड़के का नाम अजय सिंह बिष्ट से बदलकर योगी आदित्यनाथ रख दिया जाता है।
1998 में एक रोज महंत अवैद्यनाथ उन्हें मठ और राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित कर देते हैं। योगी आदित्यनाथ 1998 में ही गोरखपुर से लोकसभा चुनाव लड़ते और जीतते हैं। इस चुनाव को जीतकर महज 26 साल की उम्र में योगी आदित्यनाथ सबसे युवा सांसद बनकर दिल्ली आते हैं। तब से 2014 तक पांच बार सांसद बने।
2017 में BJP ने उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया और फिर 2022 में दूसरी बार सीएम बने। यूपी के सबसे लंबे समय तक सीएम बनने का रिकॉर्ड वह बना चुके हैं। उनकी योजनाएं केंद्र से लेकर दूसरे राज्य अपने यहां काॅपी कर रहे हैं। मोदी के बाद, जिनकी सबसे ज्यादा चर्चा होती है। आज उनका 53वां जन्म दिन है।
योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर जगह जगह तरह तरह के कार्यक्रम चल रहे थे, प्रदेशभर में इस मौके पर सेवा कार्य, भंडारे, रक्तदान शिविर और हवन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए और वह अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल पर प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान से पहले राम दरबार के समक्ष पूजा-अर्चना कर रहे थे। वह श्री राम जन्मभूमि मंदिर में राम दरबार के प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में शामिल हुए। उन्होंने सरयू घाट पर आरती भी की। धर्म के प्रति समर्पण और अपराध के प्रति सख्त तेवर ने उनके व्यक्तित्व को ऐसा निखारा की कि उन्होंने करोड़ों के ह्रदय में अपना स्थान बना लिया। योगी आदित्यनाथ के 53वें जन्मदिन पर सबसे खुबसूरत तस्वीर गाज़ीपुर से आई। जनपद के गोराबाजार स्थित सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में गुरुवार को पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह के पुत्र अनिकेत सिंह ने दर्जनों समर्थकों संग रक्तदान कर सीएम योगी का जन्मदिन मनाया। इस दौरान रक्तदान शिविर में लगभग 69 लोगों ने रक्तदान किया। यह रक्तदान शिविर सुबह नौ बजे से 12 बजे तक चला। शायद यह पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ लोगों ने रक्तदान किया हो, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस पर पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह की टीम ने इतिहास रच दिया। अनिकेत सिंह मेघबरन सिंह स्टेडियम के संचालक हैं, इस स्टेडियम को सीएम योगी का खूब सहयोग मिला, इस स्टेडियम के खिलाड़ियों ने भारत को ओलंपिक में कई पदक दिलवाए हैं।
17 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाज़ीपुर में स्थित करमपुर स्टेडियम पहुंचे थे। जहां उन्होंने ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ ही स्टेडियम के फाउंडर स्व. तेज़ बहादुर सिंह और पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह की खूब तारीफ़ की थी। राधे मोहन सिंह सपा के सांसद थे और 33 साल बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ दिया, फिलहाल वह किसी पार्टी के सदस्य नहीं है लेकिन सीएम योगी के करीबी माने जाते हैं। पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह ने सपा का साथ छोड़ने का कारण समाजवादी पार्टी की नीति और गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी को बताया था।

मेघबरन सिंह स्टेडियम के संचालक अनिकेत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक सशक्त, अनुशासित और निर्णायक नेतृत्व के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, निवेश को आकर्षित करने, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। गोरखपुर से पांच बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 2022 में पुनः भारी बहुमत से सत्ता में लौटे। वह पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश में पूर्ण कार्यकाल के बाद दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
रक्तदान करने वालों में कल्लू अली, रामलाल प्रजापति, अंगद प्रजापति, नागेन्द्र यादव, इमरान खान, अजय यादव, सुमित सिंह, सूर्य प्रताप सिंह, कृष्णा पांडेय, आनन्द सिंह, रामनरेश सिंह, संजय सिंह, अरविन्द सिंह, रोहित, आदर्श पाण्डेय, रमेश सिंह यादव, सुजीत तिवारी, पुष्कर सिंह, शिवम कुमार, सिकन्दर सोनकर, सुनील यादव, इंद्रदेव राजभर, सर्वेश सिंह यादव, रामप्रताप सिंह, अमित सिंह, मनोज सिंह, अनिकेत सिंह, शुभम सिंह, आकाश, शिवम यादव, दीपक सिंह, अजीत, राजकुमार सिंह, ललित्व तिवारी, शेखर सिंह, अर्जुन विश्वकर्मा, कमलकांत सिंह, अवधेश यादव, शिवप्रताप सिंह, गणेश सिंह, सोनू सिंह, प्रवीण यादव, प्रदूम गोंड, सुमित सिंह, पवन त्रिपाठी, विनय राजभर, शिवा सोनकर, राजा राजभर, बबलू यादव, अरुण सिंह, संतोष यादव, वीरेन्द्र सिंह, अमन यादव, अनुराग सिंह, राजू सिंह, ध्रुव सिंह, दीपक सिंह और सत्यम यादव सहित दर्जनों समर्थक शामिल रहे।
योगी का राजनितिक संघर्ष
गढ़वाल यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान ही अजय सिंह बिष्ट अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा के लोगों के संपर्क में आ गए थे। उनके एक जीजा जय प्रकाश लेफ्ट छात्र संगठन SFI के एक्टिव सदस्य थे। वह चाहते थे कि अजय उनके वामपंथी छात्र संगठन में शामिल हो जाएं। इसी समय अजय की मुलाकात उनके एक सीनियर और ABVP कार्यकर्ता प्रमोद रावत से हुई। उन्होंने अजय को ABVP से जुड़ने के लिए मना लिया। यह 1990 का वह दौर था जब देश में राम मंदिर आंदोलन चल रहा था। लालकृष्ण आडवाणी देशभर में रथ यात्रा कर रहे थे। इस आंदोलन से अजय सिंह बिष्ट भी जुड़ गए। राम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लेने के दौरान अजय एक कार्यक्रम में महंत अवैद्यनाथ से मिले थे। आंदोलन के बाद से ही उनका मन घर में नहीं लग रहा था। अजय पहली मुलाकात में ही अपने गुरु अवैद्यनाथ से काफी प्रभावित हुए थे। 1993 में एक दिन अजय घर छोड़कर गोरखपुर पहुंच गए थे। घर से निकलते समय उन्होंने नौकरी के लिए बाहर जाने की बात कही थी, लेकिन वह महंत अवैद्यनाथ के पास गोरखपुर आश्रम पहुंच गए। एक साल तक उनके घरवालों को उनकी कोई खबर नहीं थी। कई बार आदित्यनाथ ने पिता को पत्र लिखा, लेकिन एक बार भी घर नहीं भेजा। 15 फरवरी 1994 को महंत अवैद्यनाथ ने अजय सिंह बिष्ट को दीक्षा दी थी। तभी उनका नाम बदलकर योगी आदित्यनाथ रखा गया। योगी आदित्यनाथ ने 1992 के राम मंदिर आंदोलन में भाग लेकर हिंदू नेता के रूप में पहचान बना ली थी। योगी आदित्यनाथ ने 1992 के राम मंदिर आंदोलन में भाग लेकर हिंदू नेता के रूप में पहचान बना ली थी। अप्रैल 2002 में योगी आदित्यनाथ ने सामाजिक और राजनीतिक हैसियत बढ़ाने के लिए ‘हिंदू युवा वाहिनी’ के नाम से एक संगठन बनाया। गोरखपुर से शुरू होने वाला यह संगठन धीरे-धीरे पूर्वांचल के सभी जिलों में फैलने लगा। बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ने लगे। योगी आदित्यनाथ ने ‘हिंदू युवा वाहिनी’ को बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदू विरोधी, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण करना बताया। अप्रैल 2002 में योगी आदित्यनाथ ने सामाजिक और राजनीतिक हैसियत बढ़ाने के लिए ‘हिंदू युवा वाहिनी’ के नाम से एक संगठन बनाया। गोरखपुर से शुरू होने वाला यह संगठन धीरे-धीरे पूर्वांचल के सभी जिलों में फैलने लगा। बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ने लगे। योगी आदित्यनाथ ने ‘हिंदू युवा वाहिनी’ को बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदू विरोधी, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण करना बताया। हिंदू युवा वाहिनी की सभा में ‘एक विकेट के बदले दस विकेट गिराने’ और ‘हिंदुओं से घरों पर केसरिया झंडा लगाने’ की बात कही गई तो योगी की आलोचना हुई। ऐसी कई घटनाओं के बाद योगी गोरखपुर के हीरो हो गए। समर्थक नारे लगाने लगे ‘गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना होगा।’
UP में 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले BJP के पहले मुख्यमंत्री बने। UP में 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले BJP के पहले मुख्यमंत्री बने। लगातार सीएम रहने के मामले में दूसरा नाम संपूर्णानंद का है, वो 5 साल 345 दिन सीएम रहे थे।
इस लेख में इतना ही… योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक संघर्ष की अनसुनी कहानियां अगले अध्याय में…