विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अब तक करीब सवा लाख मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के पास पहुंची हैं, जबकि 51 लाख से अधिक लोगों ने अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल को और गर्म कर दिया है।
नाम जोड़ने और हटाने के आंकड़े क्या कहते हैं:
निर्वाचन आयोग के अनुसार अब तक कुल 51 लाख 43 हजार 362 लोगों ने फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का अनुरोध किया है। इनमें से राजनीतिक दलों द्वारा जमा किए गए फॉर्म-6 की संख्या मात्र 40,284 है। इनमें भी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने मिलकर 36,950 आवेदन जमा किए हैं।
वहीं, एक लाख 18 हजार 688 मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इनमें राजनीतिक दलों की ओर से केवल 1,790 आपत्तियां दर्ज की गईं। इनमें भारतीय जनता पार्टी की ओर से 1,729 और समाजवादी पार्टी की ओर से 47 आपत्तियां शामिल हैं।
समय सीमा बढ़ने के बाद बढ़ी रफ्तार:
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि पहले 6 फरवरी निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 6 मार्च कर दिया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा (Navdeep Rinwa) ने बताया था कि 6 जनवरी से 4 फरवरी के बीच लगभग 37 लाख 80 हजार लोगों ने फॉर्म-6 भरा, जबकि 82 हजार से अधिक लोगों ने फॉर्म-7 के माध्यम से नाम हटाने के लिए आवेदन किया।
उस अवधि में प्रतिदिन औसतन 1 लाख 26 हजार फॉर्म-6 और लगभग 2,756 फॉर्म-7 जमा हो रहे थे। समय सीमा बढ़ने के बाद आवेदन की संख्या में और तेजी देखी गई है। आयोग के अनुसार 27 मार्च तक सभी दावे और आपत्तियों की सुनवाई पूरी की जाएगी, जबकि 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
सपा के आरोप और राजनीतिक विवाद:
समाजवादी पार्टी लगातार यह आरोप लगा रही है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा है कि कथित रूप से फर्जी तरीके से फॉर्म-7 भरवाए जा रहे हैं और कई मामलों में हस्ताक्षर भी संदिग्ध हैं। उनका दावा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों के परिवारों के नाम भी हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने मांग की है कि अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भरे गए फॉर्म-7 की जांच कराई जाए और जिन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं, उनकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के विधायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे और आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा।
आयोग का पक्ष और प्रक्रिया:
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। उनके अनुसार फॉर्म-7 किसी मतदाता के नाम को हटाने या उस पर आपत्ति दर्ज करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया है। इसमें आवेदनकर्ता को अपना नाम, मतदाता पहचान पत्र संख्या, संबंधित मतदाता का विवरण और आपत्ति का कारण स्पष्ट करना होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 को बड़े पैमाने पर स्वीकार नहीं किया जाता। किसी भी राजनीतिक दल का बूथ लेवल एजेंट एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही जमा कर सकता है और इसके लिए अंडरटेकिंग देनी होती है। आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) दोनों पक्षों को नोटिस भेजता है। इसके बाद सुनवाई होती है, साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं और नियमानुसार निर्णय लिया जाता है।
आगे की प्रक्रिया और निगाहें:
वर्तमान में दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है। 6 मार्च तक आवेदन लिए जाएंगे, 27 मार्च तक सुनवाई पूरी की जाएगी और 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। इस बीच राजनीतिक दलों के आरोप और आयोग की सफाई के कारण मामला चर्चा में बना हुआ है।
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