उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा में बजट सत्र का सातवां दिन हंगामे, व्यंग्य और तीखी बहसों के बीच गुजरा। सत्र के दौरान शिक्षा, बिजली, विश्वविद्यालयों की व्यवस्था, जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव और वक्फ बोर्ड जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल तक कई विषयों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।
प्राथमिक स्कूलों की स्थिति पर सवाल:
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के विधायक संदीप सिंह पटेल (Sandeep Singh Patel) ने प्राथमिक विद्यालयों की हालत को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन प्राइमरी स्कूलों से पढ़कर छात्र आईएएस और पीसीएस बनते थे, उनकी स्थिति अब चिंताजनक हो गई है। उनका आरोप था कि शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है, कभी एसआईआर जैसे काम तो कभी कुत्तों की गिनती में। इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
विज्ञान संकाय पर व्यंग्य और शायरी:
सपा विधायक रागिनी सोनकर (Ragini Sonkar) ने इंटर कॉलेजों में विज्ञान संकाय की स्थिति पर व्यंग्य के माध्यम से अपनी बात रखी। इस पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी (Gulab Devi) ने शायरी के अंदाज में जवाब दिया। सदन में कुछ देर के लिए माहौल हल्का भी हुआ, लेकिन शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल चर्चा का विषय बने रहे।
विश्वविद्यालयों में अवकाश नियमों पर बहस:
विधानसभा में पल्लवी पटेल (Pallavi Patel) ने विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्रोफेसरों को चिकित्सा अवकाश नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय (Yogendra Upadhyay) ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सेवानिवृत्ति की आयु अलग-अलग है, इसलिए अवकाश की अवधि और नियम भी भिन्न हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित नियमों के अनुसार ही व्यवस्था लागू है।
विधान परिषद में सीमित प्रश्नकाल:
विधान परिषद में एक घंटे का प्रश्नकाल महज 11 मिनट में समाप्त हो गया। विपक्ष की ओर से केवल तीन प्रश्न पूछे गए। सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा (Ashutosh Sinha) ने दो प्रश्न उठाए, जबकि निर्दलीय गुट के राजबहादुर चंदेल (Rajbahadur Chandel) ने एक प्रश्न पूछा। भाजपा एमएलसी हरि सिंह ढिल्लों (Hari Singh Dhillon) ने टिप्पणी की कि विपक्ष भी सरकार के कार्यों से संतुष्ट प्रतीत होता है।
सीएम योगी का संबोधन और घोषणाएं:
छठे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रखा। उन्होंने शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों, आंगनवाड़ी वर्कर्स और आशा बहुओं के मानदेय में वृद्धि की बात कही। साथ ही निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन बढ़ाने का भी उल्लेख किया।
प्रश्नकाल के दौरान जब रागिनी सोनकर के सवालों का जवाब मंत्री बेबी रानी मौर्य (Baby Rani Maurya) नहीं दे सकीं, तब संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) ने हस्तक्षेप कर जवाब दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव पर चर्चा:
सपा विधायक अतुल प्रधान (Atul Pradhan) ने जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में धनबल और बाहुबल का प्रभाव देखने को मिलता है। इस पर मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने कहा कि इस संबंध में दो बार पत्र लिखा जा चुका है और केंद्रीय मंत्री से भी मुलाकात हुई है, लेकिन कानून में संशोधन के बाद ही प्रत्यक्ष चुनाव संभव होगा।
बिजली और प्रीपेड मीटर पर आरोप-प्रत्यारोप:
बिजली मंत्री एके शर्मा (AK Sharma) ने कहा कि बिजली की अधिकतम मांग 31 हजार मेगावाट तक पहुंची है और उपभोक्ताओं की संख्या 2017 के 1.90 करोड़ से बढ़कर 3.72 करोड़ हो गई है। उन्होंने विपक्ष पर धार्मिक मुद्दों को लेकर टिप्पणी भी की।
वहीं आशुतोष सिन्हा ने कहा कि बिजली जीवन की बुनियादी जरूरत है और प्रीपेड मीटर व्यवस्था में गड़बड़ी की शिकायतें आ रही हैं। उनका आरोप था कि रिचार्ज के बावजूद बैलेंस शून्य दिख रहा है।
वक्फ बोर्ड पर सदन में हल्की नोकझोंक:
सपा विधायक कमाल अख्तर (Kamal Akhtar) और नफीस अहमद (Nafees Ahmed) ने वक्फ बोर्ड से जुड़े सवाल उठाए। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने जवाब दिया। जवाब से असंतुष्ट होकर कुछ विधायक खड़े हो गए। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना (Satish Mahana) की टिप्पणी पर सदन में हंसी का माहौल बन गया।
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