New Delhi। देश को आज (9 सितंबर) नया उपराष्ट्रपति मिलने जा रहा है। इस अहम पद के लिए आज मतदान होगा। सत्तारूढ़ एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी मैदान में हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार वोटिंग सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी और उसी दिन मतगणना पूरी कर परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।
क्यों खाली हुआ पद?
गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बाद से ही यह पद रिक्त है। चुनाव आयोग ने 7 अगस्त को उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी थी और आज तय हो जाएगा कि इस संवैधानिक जिम्मेदारी का नया चेहरा कौन होगा।
कौन डालता है वोट?
इस चुनाव में आम जनता भागीदार नहीं होती। केवल सांसद ही मतदान करते हैं। इनमें राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सांसद शामिल होते हैं। यानी कुल 788 सांसद इस चुनाव के मतदाता बनते हैं। हालांकि, इसमें केवल वही सांसद गिने जाते हैं जो चुनाव की घोषणा के समय सदन के सदस्य होते हैं।
मतदान की प्रक्रिया कैसी है?
संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत उपराष्ट्रपति चुनाव ‘सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम’ और ‘अनुपातिक प्रतिनिधित्व’ पद्धति से होता है। इसमें सांसद बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों को वरीयता के क्रम में नंबर देते हैं— जैसे पहली पसंद को 1, दूसरी पसंद को 2 और इसी तरह आगे। गुप्त मतदान में मतदाता को चुनाव आयोग द्वारा दिए गए विशेष पेन का ही इस्तेमाल करना होता है।
गिनती के दौरान यदि किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटा मिल जाता है तो वह विजयी घोषित कर दिया जाता है। अगर कोई उम्मीदवार पहली गिनती में नहीं जीत पाता तो सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशी को बाहर कर उसकी प्राथमिकता वाली गिनती दूसरे उम्मीदवारों के खाते में जोड़ दी जाती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक किसी एक उम्मीदवार को जीत के लिए आवश्यक संख्या न मिल जाए।
राष्ट्रपति चुनाव से कैसे अलग है यह प्रक्रिया?
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में अंतर यह है कि राष्ट्रपति के चुनाव में सांसदों के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के विधायक भी वोट डालते हैं, जबकि उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल सांसद ही मतदान करते हैं। साथ ही, राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सदस्य वोट नहीं डाल सकते, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में उनकी भी भागीदारी होती है।
क्यों नहीं होता ईवीएम का इस्तेमाल?
आम चुनावों में जहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का उपयोग होता है, वहीं उपराष्ट्रपति पद के लिए बैलेट पेपर से मतदान कराया जाता है। इसकी वजह यह है कि यह चुनाव वरीयता आधारित प्रणाली पर आधारित है, जिसमें वोटों का ट्रांसफर करना पड़ता है। ईवीएम की मौजूदा तकनीक इस प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। चुनाव आयोग का कहना है कि ऐसे चुनावों के लिए अलग तरह की ईवीएम की जरूरत होगी, इसलिए अभी पारंपरिक बैलेट पेपर से ही मतदान कराया जाता है।