Varanasi: दो काल सेंटर पर छापा मारकर पुलिस ने साइबर ठगी के अंतर राज्यीय गिरोह का राजफाश किया। काल सेंटर संचालक समेत 29 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। इसमें एक महिला भी शामिल है। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर और अन्य दस्तावेज बरामद हुए। ठगों के गिरोह में शामिल एक महिला भी गिरफ्तार की गई है।
काल सेंटर के जरिए दक्षिण व पश्चिम भारत के लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस गिरोह के सरगना की तलाश कर रही है। पकड़े गए साइबर ठगों के बारे में डीसीपी क्राइम सरवणन टी ने बताया कि वाराणसी में संचालित होने वाले दो काल सेंटर से साइबर ठगी के 27 मामलों की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज किए गए हैं। इनकी जांच वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट को दी गई थी।
जांच के दौरान पुलिस के रडार पर लक्सा थाना क्षेत्र के जद्दू मंडी की रहने वाली ऋतिका यादव आई। उसके मोबाइल काल डिटेल, व्हाट्सएप चैट की जांच जानकारी मिली कि वह साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए काम करती है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ कि तो चेतगंज थाना क्षेत्र के मलदहिया में व सिगरा चौराहे के पास एंजल नाम से संचालित होने वाले सेंटरों की जानकारी मिली। पुलिस ने सिगरा काल सेंटर में छापा मारकर साइबर ठगी गिरोह के 26 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
इसे छ्त्तीसगढ़ के कोरिया जिला के भरतपुर का रहने वाला कृष्ण कुमार, गाजीपुर के खानपुर का धनंजय चौहान, वाराणसी के शिवपुर का दिव्यांशु उपाध्याय, बिहार के भभुआ के भरखर का चंदन पांडेय, चंदौली के दूबेपुर का रहने वाला प्रखर द्विवेदी संचालित कर रहे थे। वहीं मलदहिया काल सेंटर को जौनपुर के त्रिलोचन महादेव का धीरज दुबे व चंदौली का शिवम यादव संचालित कर रहे थे।
निवेश व शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के बहाने करते थे ठगी
साइबर ठग काल सेंटर को निवेश व शेयर मार्केट में ट्रेडिंग में सुझाव देने वाली एजेंसी बताते थे। इसके लिए इंटरनेट मीडिया पर शेयर मार्केट निवेश से जुड़ा भ्रामक विज्ञापन डालते थे। इसके जरिए संपर्क करने वालों की पूरी जानकारी जुटाते थे। निवेश करने वालों का डिमैट अकाउंट खुलवारकर उनके खातों का एक्सेस अपने कब्जे में ले लेते थे। निवेश करने वालों को निवेश और शेयर मार्केट में ट्रेडिंग का आफर देकर अधिक से अधिक निवेश कराते थे। उसके बाद मार्केट में नुकसान दिखाकर ठगी करते थे।
निशाने पर थे दक्षिण व पश्चिम भारत के लोग
साइबर ठगों के निशाने पर दक्षिण व पश्चिम भारत के लोग थे। दक्षिण के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के साथ पश्चिम भारत के महाराष्ट्र, गुजरात के लोगों को जाल में फंसाया जाता था। साइबर ठग इन क्षेत्र के लोगों की रुपये कमाने की रुचि और संपन्नता को देखते हुए उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। इन क्षेत्रों की स्थानीय भाषा में विज्ञापन किया जाता था। इस विज्ञापन के जरिए जो लोग संपर्क करते थे काल सेंटर में काम करने वाले साइबर ठग गिरोह के सदस्य उनकी भाषा में बात करते हुए, चैट करते हुए निवेश के सुझाव देते थे। इसके लिए काल सेंटरों में भाषा के जानकारों को नियुक्त किया जाता था। काल सेंटर पिछले तीन साल से संचालित हो रहे थे।
सभी के थे अलग-अलग नाम
काल सेंटर में काम करने वालों को सबसे पहले एक छद्म नाम दिया जाता था। इस नाम का ही इस्तेमाल करके गिरोह का सदस्य लोगों के बातचीत करता था। इसके साथ ही सभी को टारगेट दिया जाता था। काल करने या ठगी से हासिल रुपये मंगाने के लिए फर्जी तरीके से हासिल मोबाइल सिम व बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।
साइबर ठगों के पास यह हुआ बरामद
पकड़े गए साइबर ठगों के पास से 12 लैपटाप, एक टैब, 54 मोबाइल फोन, छह आधार कार्ड, 15 डेबिट, क्रेडिट कार्ड, 15 चेकबुक, 13 पासबुक, चार लेटर पैड बरामद हुए।
51 पुलिसकर्मियों की टीम लगातार करती रही काम
साइबर ठगों की गिरफ्तारी के लिए डीसीपी क्राइम सवरणन टी के निर्देश में एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना व एसीपी चेतगंज डा. ईशान सोनी के नेतृत्व में 51 पुलिसकर्मियों की टीम एक सप्ताह से अधिक समय से लगातार काम कर रही थी। बीते बुधवार की दोपहर में दोनों काल सेंटर में छापेमारी करके हुए पुलिस ने 29 साइबर ठगों को गिरफ्तरा किया। देर रात तक उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाती रही। साइबर ठगो के गिरोह को गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र के लिए अधिकारी अनुमोदन करेंगे।
ठगी के 27 मामले आए सामने
वाराणसी में पकड़े गए साइबर ठगों के खिलाफ 27 मामले नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 31.33 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस इनके द्वारा ठगी के और मामलों की जानकारी जुटा रही है। ठगी के मामले और रकम काफी ज्यादा होने की आशंका है।