वाराणसी (Varanasi) के गोलघर कचहरी स्थित नगर निगम मार्केट (Municipal Market) में सौंदर्यीकरण के नाम पर बनाया गया पाथवे अब स्थानीय दुकानदारों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। मार्केट में स्थित 33 दुकानदारों ने इस मुद्दे को लेकर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार (Satyendra Kumar) को ऑनलाइन शिकायत भेजी है। दुकानदारों का कहना है कि विकास कार्य के नाम पर जो निर्माण कराया जा रहा है, वह उनके रोज़गार और व्यवसाय पर सीधा असर डाल रहा है।
पाथवे से बढ़ी दुकानों की परेशानी:
दुकानदारों के अनुसार नगर निगम (Municipal Corporation) ने गोलघर कचहरी मार्केट के सामने पाथवे का निर्माण कराया है, लेकिन यह पाथवे दुकानों की मौजूदा सतह से लगभग 15-15 इंच ऊंचा बना दिया गया है। इसके कारण दुकानें नीचे गड्ढे जैसी स्थिति में चली गई हैं। इससे न केवल दुकानों का स्वरूप बिगड़ा है, बल्कि ग्राहकों के आवागमन में भी भारी दिक्कत हो रही है।
सालभर चला काम, नहीं बन पाई सड़क:
मार्केट में फोटो स्टेट का काम करने वाले नागेश मौर्या ने बताया कि पिछले करीब 12 महीनों से विकास के नाम पर लगातार तोड़फोड़ होती रही। कभी सीवर पाइपलाइन डाली गई, तो कभी सड़क खोदी गई। अब जब पाथवे का निर्माण हुआ, तो उसे इतना ऊंचा बना दिया गया कि दुकानें नीचे धंस गईं। उनका कहना है कि इससे पहले सड़क भी सालभर में ठीक से नहीं बन पाई, जिससे पहले ही कारोबार प्रभावित था।
बारिश में नुकसान का डर:
दुकानदारों की सबसे बड़ी चिंता आने वाला बारिश का मौसम है। नागेश मौर्या के मुताबिक बारिश के दौरान सड़क का पानी सीधे दुकानों में घुसेगा। इससे फोटो स्टेट मशीन, कागज और अन्य जरूरी सामान खराब हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दुकानें पानी से खराब होती हैं, तो इसकी भरपाई कौन करेगा। 30 साल पहले कराई गई रजिस्ट्री के बाद अब दोबारा मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने का खर्च दुकानदार कैसे उठाएंगे।
ग्राहकों का आना-जाना होगा मुश्किल:
इसी मार्केट में चाट की दुकान चलाने वाले सोनू गुप्ता ने कहा कि विकास कार्य होना अच्छी बात है, लेकिन इस तरह का निर्माण दुकानों को उजाड़ने जैसा है। पाथवे और चबूतरा ऊंचा होने से दुकानें नीची हो गई हैं। भविष्य में ग्राहक दुकान तक आने से हिचकेंगे। उन्होंने कहा कि अगर पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे और पाथवे ऊंचा रहेगा, तो ग्राहक रुकने के बजाय आगे निकल जाएंगे, जिससे बिक्री पर असर पड़ेगा।
फर्नीचर और सामान खराब होने की आशंका:
पवार ऑप्टिक्स के नाम से दुकान चलाने वाले इरफान अहमद ने बताया कि पाथवे बनने से सड़क ऊंची हो गई है। इससे ग्राहकों को दुकान तक पहुंचने में परेशानी होगी। बारिश में पानी अंदर घुसने से फर्नीचर और चश्मों का सामान खराब हो सकता है। पानी की बदबू कई दिनों तक बनी रहती है, जिससे ग्राहक दुकान में बैठना पसंद नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को पत्र दिए गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सौंदर्यीकरण या बर्बादीकरण:
दुकानदार बृजेश गुप्ता का कहना है कि नगर निगम ने ही उन्हें यहां दुकानें आवंटित की थीं। अब वही नगर निगम सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा निर्माण करा रहा है, जो दुकानों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। बारिश में पानी घुसने की आशंका के चलते कई दुकानदारों को अपनी दुकानों के शटर और फर्श ऊंचे कराने पड़ रहे हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। दुकानदारों का कहना है कि वे बार-बार अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
जिलाधिकारी को भेजा गया शिकायती पत्र:
नगर निगम मार्केट गोलघर कचहरी के दुकानदारों ने पाथवे की ऊंचाई और घटिया निर्माण को लेकर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार (Satyendra Kumar) को ऑनलाइन पत्र भेजा है। पत्र में लिखा गया है कि इस निर्माण से दुकानदारों के आवागमन और व्यवसाय दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है। निर्माण कार्य अजय बिल्डर्स इंजीनियर्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ (Ajay Builders Engineers Construction Private Limited, Lucknow) द्वारा कराया जा रहा है।
गुणवत्ता और मानकों पर सवाल:
दुकानदारों ने आरोप लगाया कि टेंडर स्वीकृत होने के बावजूद तय समयसीमा में काम पूरा नहीं किया गया। समयसीमा खत्म होने के बाद भी मानकविहीन और घटिया गुणवत्ता का कार्य कराया जा रहा है। इंटरलॉकिंग से पहले केवल सफेद बालू का इस्तेमाल किया गया है, उसमें सीमेंट का उपयोग नहीं हुआ। इसके कारण इंटरलॉकिंग की ईंटें काम पूरा होने से पहले ही उखड़ने लगी हैं।
व्यवसाय पर पड़ रहा नकारात्मक असर:
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने और खराब गुणवत्ता के कारण न सिर्फ दुकानदारों का रोज़गार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मार्केट में आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदारों ने मांग की है कि पाथवे की ऊंचाई को दुकानों के स्तर के अनुरूप किया जाए और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए।
प्रशासन से समाधान की उम्मीद:
दुकानदारों का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास जो रोज़गार छीन ले, वह स्वीकार्य नहीं है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और क्या दुकानदारों की समस्याओं का समाधान निकल पाता है।
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