बिहार (Bihar) के हाजीपुर (Hajipur) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यह संदेश दिया है कि किसी भी आपराधिक मामले में कानूनी प्रक्रिया भले लंबी हो जाए, लेकिन जवाबदेही समाप्त नहीं होती। वैशाली (Vaishali) जिले के एक 34 वर्ष पुराने जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने आरोपी दीप राय उर्फ जिसा राय (Deep Rai alias Jisa Rai) को दोषी ठहराया है। मामले में अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत दोषसिद्धि दर्ज की है।
यह मामला वर्ष 1992 में दर्ज हुआ था और अब कई दशक बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। मामले की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि दोषी ठहराए गए व्यक्ति की उम्र अब काफी अधिक हो चुकी है। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह फैसला सामने आया है।
1992 में दर्ज हुआ था मामला:
जानकारी के अनुसार वैशाली (Vaishali) जिले के राघोपुर (Raghopur) प्रखंड स्थित जुड़ावनपुर (Jurawanpur) गांव में वर्ष 1992 में एक आपसी विवाद के दौरान एक दंपति पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगा था। पीड़ित अदालत राय (Adalat Rai) ने 10 मई 1992 को शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में कहा गया था कि वह अपनी पत्नी के साथ घर के बाहर बैठे थे, तभी आरोपियों ने कथित रूप से हथियारों के साथ पहुंचकर हमला किया। इस घटना के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और जांच प्रक्रिया शुरू हुई।
एक ही परिवार के पांच लोगों पर दर्ज हुआ था केस:
मामले में एक ही परिवार के पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि उन्होंने मिलकर जानलेवा हमला किया। इसके बाद पुलिस ने जांच पूरी कर वर्ष 1993 में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मामला अदालत में विचाराधीन रहा और सुनवाई की प्रक्रिया लगातार चलती रही।
हालांकि, मुकदमे की लंबी अवधि के दौरान नामजद पांच आरोपियों में से चार की मृत्यु हो गई। इसके बाद केवल दीप राय उर्फ जिसा राय (Deep Rai alias Jisa Rai) के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही।
अदालत ने सुनाया दोषसिद्धि का फैसला:
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी (Manoj Kumar Tiwari) की अदालत ने आरोपी दीप राय उर्फ जिसा राय (Deep Rai alias Jisa Rai) को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148 और 307 के साथ आर्म्स एक्ट की संबंधित धारा के तहत दोषी पाया।
अदालत के इस निर्णय के बाद मामले ने एक बार फिर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह मामला कई दशकों तक चली न्यायिक प्रक्रिया का उदाहरण बनकर सामने आया है।
लंबे समय बाद आया फैसला बना चर्चा का विषय:
34 वर्ष पुराने मामले में दोषसिद्धि का फैसला आने के बाद यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है, लेकिन मामलों का निस्तारण कानून के अनुसार किया जाता है।
मामले में सजा के निर्धारण को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। इसी कारण यह प्रकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामले ने खींचा लोगों का ध्यान:
वैशाली (Vaishali) जिले के इस मामले ने लोगों का ध्यान इसलिए भी आकर्षित किया है क्योंकि घटना और फैसले के बीच लगभग तीन दशक से अधिक का अंतर रहा। यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया और लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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