उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने एक बार फिर कुशीनगर (Kushinagar) जिले के फाजिलनगर (Fazilnagar) कस्बे का नाम बदलकर पावागढ़ (Pawagarh) किए जाने की घोषणा की है। तमकुही (Tamkuhi) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि फाजिलनगर के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव किया जा चुका है और भविष्य में यह क्षेत्र पावागढ़ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस स्थान का संबंध भगवान महावीर से जुड़ा हुआ है और इसी आधार पर इसके नामकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने फाजिलनगर (Fazilnagar) का नाम पावागढ़ (Pawagarh) करने की बात सार्वजनिक रूप से कही है। इससे पहले भी उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान इसी प्रकार की घोषणा की थी।
तमकुही के कार्यक्रम में दोहराया नाम परिवर्तन का प्रस्ताव:
तमकुही (Tamkuhi) में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा कि फाजिलनगर (Fazilnagar) का नाम बदलकर पावागढ़ (Pawagarh) किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए नामकरण का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाया जा चुका है और इसे मान्यता देने की प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद एक बार फिर फाजिलनगर (Fazilnagar) का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व चर्चा में आ गया है। यह क्षेत्र लंबे समय से बौद्ध और जैन धर्म से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के कारण पहचान रखता है।
गौतम बुद्ध से जुड़ा है फाजिलनगर का इतिहास:
कुशीनगर (Kushinagar) जिले का फाजिलनगर (Fazilnagar) बौद्ध धर्म की मान्यताओं में विशेष स्थान रखता है। बौद्ध परंपराओं के अनुसार भगवान बुद्ध (Gautam Buddha) बिहार (Bihar) से कुशीनगर (Kushinagar) की यात्रा के दौरान फाजिलनगर से सटे चेतीग्राम, जिसे वर्तमान में सठियांव (Sathiaon) कहा जाता है, में रुके थे।
मान्यता है कि यहां उन्होंने अपने एक शिष्य के यहां अंतिम भोजन ग्रहण किया था। इसके बाद वे कुशीनगर (Kushinagar) पहुंचे, जहां उन्हें महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ। इस कारण फाजिलनगर और उसके आसपास का क्षेत्र बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्राचीन अवशेषों से जुड़ी है ऐतिहासिक पहचान:
फाजिलनगर (Fazilnagar) और उसके आसपास के क्षेत्रों में कई प्राचीन टीले मौजूद हैं। इनमें से कुछ स्थलों की खुदाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) द्वारा कराई जा चुकी है। खुदाई के दौरान प्राप्त कई प्राचीन वस्तुओं को बौद्ध काल से जुड़ा माना जाता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
जैन धर्म में भी विशेष महत्व रखता है पावा:
फाजिलनगर (Fazilnagar) का संबंध जैन धर्म से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी (Mahavir Swami) ने पावा, जिसे वर्तमान में फाजिलनगर कहा जाता है, में अपने अंतिम उपदेश दिए थे। इसी धार्मिक परंपरा के कारण इस क्षेत्र का नाम पावागढ़ (Pawagarh) किए जाने की चर्चा लंबे समय से होती रही है।
हालांकि भगवान महावीर के महापरिनिर्वाण को लेकर विभिन्न मान्यताएं मौजूद हैं, लेकिन जैन धर्म से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों के कारण यह स्थान विशेष महत्व रखता है। इसी जुड़ाव के चलते यहां स्थित पावानगर महावीर इंटर कॉलेज (Pawanagar Mahavir Inter College) का नाम भी व्यापक रूप से जाना जाता है।
ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है क्षेत्र:
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार पावा मल्ल राजाओं की दूसरी राजधानी मानी जाती थी, जबकि उनकी पहली राजधानी कुशीनारा, वर्तमान कुशीनगर (Kushinagar), थी। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण भी फाजिलनगर (Fazilnagar) का महत्व लंबे समय से बना हुआ है।
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