अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट में सैन्य कार्रवाई को लेकर लाया गया एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव महज एक वोट से गिर गया। गुरुवार को हुई मतदान प्रक्रिया में प्रस्ताव के पक्ष में 49 और विरोध में 50 वोट पड़े। Donald Trump (डोनाल्ड ट्रम्प) की पार्टी के सांसद Dave McCormick (डेव मैककॉर्मिक) मतदान में शामिल नहीं हुए। यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले संसद की मंजूरी लेना अनिवार्य होता।
प्रस्ताव गिरने के बाद क्या रहेगा असर:
प्रस्ताव के खारिज होने के बाद राष्ट्रपति के अधिकारों में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान पर अंतिम निर्णय संसद की मंजूरी के बाद ही होना चाहिए। अब इस प्रस्ताव को दोबारा सीनेट में लाने के लिए नई प्रक्रिया अपनानी होगी। फिलहाल सैन्य कार्रवाई को सीमित करने से संबंधित विधेयक US Senate Foreign Relations Committee (अमेरिकी सीनेट की विदेश मामलों की समिति) के पास विचाराधीन है।
ईरान संघर्ष से जुड़े पांच बड़े घटनाक्रम:
पिछले 24 घंटों के दौरान ईरान से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। पहली बार संघर्ष के दौरान Egypt (मिस्र) के एक बंदरगाह पर ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई, जिसमें दो जहाजों में आग लग गई। इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार माना जा रहा है।
दूसरे घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के 10 शहरों पर हवाई हमले किए। Bandar Abbas (बंदर अब्बास), Kish Island (किश द्वीप) और Qeshm Island (क़ेश्म द्वीप) सहित कई स्थानों पर विस्फोट होने की जानकारी सामने आई।
तीसरे घटनाक्रम में Iran Revolutionary Force (ईरान रिवोल्यूशनरी फोर्स) ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में Kuwait (कुवैत) और Jordan (जॉर्डन) में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
चौथे घटनाक्रम के अनुसार Kuwait (कुवैत) में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हमला हुआ, जिसमें एक कर्मचारी की मौत होने की जानकारी सामने आई।
वहीं पांचवें घटनाक्रम में Saudi Arabia (सऊदी अरब) ने Red Sea (रेड सी/लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया गया है कि अब तक 14 देशों ने इस पहल से जुड़ने में रुचि दिखाई है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट:
ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, Al Jazeera (अल जजीरा) की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई महीने के दौरान कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान जताया गया है।
बाजार के आंकड़ों के अनुसार Brent Crude (ब्रेंट क्रूड) की कीमत 1.2 प्रतिशत गिरकर 88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं WTI Crude (डब्ल्यूटीआई क्रूड) की कीमत 1.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82.09 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय हालात पर बनी हुई नजर:
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर लगातार क्षेत्रीय घटनाक्रम पर बनी हुई है। सैन्य गतिविधियों, कूटनीतिक प्रयासों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण स्थिति पर विभिन्न देशों की निगरानी जारी है। वहीं अमेरिकी सीनेट में प्रस्ताव गिरने के बाद भी इस विषय पर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
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