अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की 7 छोटी नौकाओं को डुबो दिया, जो व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रही थीं। हालांकि यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार 6 नौकाओं को नष्ट किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और तेज हो गया है।
ट्रम्प का सख्त रुख और चेतावनी:
डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने बयान देते हुए कहा कि ईरान के सामने दो ही विकल्प हैं—या तो ईमानदारी से समझौता करे या फिर आगे भी सैन्य कार्रवाई का सामना करे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
प्रोजेक्ट फ्रीडम और समुद्री सुरक्षा अभियान:
अमेरिका (United States) ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के आसपास ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम से एक ऑपरेशन शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करना है। इसी ऑपरेशन के दौरान दोनों देशों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आईं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
ईरान का दावा और क्षेत्रीय नियंत्रण:
ईरान (Iran) ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण है और उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज वहां से नहीं गुजर सकता। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पिछले 24 घंटे के प्रमुख घटनाक्रम:
हालिया घटनाओं में कई अहम अपडेट सामने आए हैं। ईरान ने यूएई (UAE) के फुजैराह (Fujairah) स्थित पेट्रोलियम प्लांट पर ड्रोन हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट में दक्षिण कोरिया (South Korea) के एक जहाज पर भी हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।
अमेरिका (United States) ने एक जब्त ईरानी जहाज टूस्का (Tooska) को पाकिस्तान (Pakistan) को सौंप दिया, जिसे बाद में क्रू के साथ ईरान भेजा गया। वहीं ईरान में मोसाद (Mossad) से जुड़े होने के आरोप में तीन लोगों को फांसी दिए जाने की खबर भी सामने आई है।
भारत की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक रुख:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने यूएई (UAE) में हुए हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों और महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाना उचित नहीं है। भारत (India) ने यूएई के साथ एकजुटता जताते हुए सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की निर्बाध आवाजाही को वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया।
ऑपरेशन की सफलता और चुनौतियां:
अमेरिका (United States) का दावा है कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ का पहला दिन सफल रहा, जिसमें दो व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता प्रदान किया गया। इस ऑपरेशन में युद्धपोत, हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों को भी निष्क्रिय किया गया और कई नौकाओं को नष्ट किया गया।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। जहां पहले रोज करीब 120 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या काफी कम है। उनका कहना है कि हालात ईरान के रुख पर निर्भर करेंगे।
ईरान की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक बयान:
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने अमेरिका के इस अभियान को ‘प्रोजेक्ट डेडलॉक’ बताते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई से किसी भी राजनीतिक समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश जारी है और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने से बचना चाहिए।
परमाणु कार्यक्रम पर नई रिपोर्ट:
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार ईरान को परमाणु हथियार बनाने में अभी भी लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक ईरान के पास पर्याप्त समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिससे कई परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं, हालांकि इसके लिए आगे प्रोसेसिंग की आवश्यकता होगी।
कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकती है।
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