रिपोर्टर: अनुज कुमार
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के परिषदीय विद्यालयों (Council Schools) में पढ़ रहे करीब 10 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म (Uniform), जूते (Shoes), मोजे (Socks) और स्वेटर (Sweater) की रकम का इंतजार करना पड़ रहा है। लंबे समय से इस कवायद के बावजूद बच्चों के अभिभावकों तक सहायता राशि नहीं पहुंच पा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसमें सबसे बड़ी समस्या कई बच्चों के अभिभावकों के आधार कार्ड (Aadhaar Card) न बनने या बैंक खातों से लिंक न होने की है, जिससे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) में अड़चन आ रही है।
परिषदीय विद्यालयों में कवायद जारी:
राज्य सरकार (State Government) के निर्देशों के बाद भी परिषदीय विद्यालयों (Council Schools) में लंबे समय से यह कवायद चल रही है कि सभी लाभार्थी बच्चों तक यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री के लिए आर्थिक सहायता पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि लगभग 10 लाख बच्चों की मदद इस प्रक्रिया के अधर में पड़ी हुई है।
बचत राशि के वितरण में बाधाएं:
अधिकारियों ने बताया कि कई अभिभावकों के आधार कार्ड (Aadhaar Card) न बनने या बैंक खातों से लिंक न होने की वजह से DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से राशि नहीं भेजी जा सकी है। इसका असर सीधे बच्चों पर पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें शीतकाल और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए आवश्यक वस्त्र और जूते उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
अधिकारियों की आश्वासन:
शिक्षा विभाग (Education Department) के अधिकारियों का कहना है कि समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के अभिभावक के आधार या बैंक खाते में दिक्कत है, उनके लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं ताकि राशि जल्द से जल्द मिल सके।
सरकारी प्रयास और भविष्य की रणनीति:
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि किसी भी छात्र को शैक्षणिक सत्र में असुविधा न हो। इसके लिए आधार और बैंक लिंकिंग में तेजी लाने, अभिभावकों को जागरूक करने और लंबित राशि वितरण की प्रक्रिया को सघन बनाने की योजना बनाई जा रही है।
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