भाजपा साथ नहीं देगी तो संसद में शून्य होगी बसपा:राज्यसभा की 10 सीटों पर अक्टूबर में चुनाव; भाजपा को 8, सपा को 2 सीटें मिलनी तय

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से राज्यसभा (Rajya Sabha) की 31 सीटों में से 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होना है। इन सीटों पर अक्टूबर में चुनाव की प्रक्रिया होने की चर्चा है। दी गई जानकारी के अनुसार, चुनाव 20 से 30 अक्टूबर के बीच हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव की आधिकारिक तारीख निर्वाचन आयोग की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। राज्यसभा सदस्यों का चुनाव विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है।

विधानसभा में मौजूदा संख्या के आधार पर भारतीय जनता पार्टी को आठ और समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिलने का गणित बताया जा रहा है। राज्यसभा में अभी समाजवादी पार्टी का एक सदस्य है, इसलिए इस चुनाव में पार्टी को एक सीट का लाभ होने की संभावना बताई गई है। वहीं बहुजन समाज पार्टी के सामने राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखने की चुनौती है।

बसपा के सामने राज्यसभा में खाता बचाने की चुनौती:

बहुजन समाज पार्टी के लोकसभा में इस समय कोई सांसद नहीं है। राज्यसभा में पार्टी के एकमात्र सदस्य रामजीलाल गौतम हैं और उनका कार्यकाल भी 25 नवंबर 2026 को समाप्त होना है। दी गई जानकारी के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव में नामांकन के लिए प्रस्तावक और समर्थक के तौर पर कम से कम 10 विधायकों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है।

बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद पार्टी के पास विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। ऐसे में पार्टी के सामने नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी चुनौती बताई जा रही है।

रामजीलाल गौतम वर्ष 2020 में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सीटें खाली हुई थीं। भाजपा के पास अपने आठ उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी अतिरिक्त मत मौजूद थे। इसके बावजूद भाजपा ने आठ ही उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिससे रामजीलाल गौतम के निर्वाचित होने का रास्ता बना।

भाजपा के सामने एक सीट का समीकरण:

दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 256 विधायक हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कुल विधायकों की संख्या 292 बताई गई है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायक भी भाजपा को राज्यसभा चुनाव में समर्थन देते रहे हैं। इस आधार पर भाजपा समर्थित संख्या 294 तक पहुंचती है।

राज्यसभा की आठ सीटें जीतने के लिए भाजपा के पास पर्याप्त विधायक बताए जा रहे हैं। ऐसे में यदि पार्टी बसपा के उम्मीदवार को समर्थन देती है, तो उसके अपने खाते में एक सीट कम हो सकती है और भाजपा के सात उम्मीदवार ही निर्वाचित हो सकेंगे। हालांकि, बसपा को समर्थन देने का अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व की ओर से लिया जाना है।

राज्यसभा चुनाव का गणित कैसे समझें:

राज्यसभा चुनाव में सीटों का निर्धारण विधानसभा में दलों और गठबंधनों की सदस्य संख्या के आधार पर होता है। दी गई जानकारी में उत्तर प्रदेश में 397 विधायकों और 10 रिक्त राज्यसभा सीटों के आधार पर एक सीट के लिए आवश्यक मतों का गणित बताया गया है।

बताए गए सूत्र के अनुसार कुल विधायकों की संख्या को खाली सीटों में एक जोड़कर भाग दिया जाता है और फिर उसमें एक जोड़ा जाता है। इस आधार पर 397 विधायकों और 10 सीटों के लिए आंकड़ा 37.09 बताया गया है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार राज्यसभा के सदस्य राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से चुने जाते हैं।

भाजपा के मौजूदा सदस्यों में किसे मिल सकता है मौका:

दी गई जानकारी में भाजपा के उन राज्यसभा सदस्यों के नाम भी सामने रखे गए हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इनमें डॉ. दिनेश शर्मा का नाम प्रमुख है। 5 सितंबर 2026 को उन्हें अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था और 15 सितंबर को उन्होंने पद की शपथ ली। ऐसे में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की संबंधित सीट पर नया चेहरा आने की संभावना बताई गई है।

हरदीप सिंह पुरी के संबंध में बताया गया है कि यदि उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री पद पर बनाए रखा जाता है, तो वह लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा जा सकते हैं। वहीं, यदि उन्हें मंत्री पद से हटाया जाता है तो किसी नए चेहरे को अवसर मिलने की बात कही जा रही है।

अरुण सिंह के बारे में दी गई जानकारी में कहा गया है कि उन्हें वर्ष 2020 में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहते राज्यसभा भेजा गया था। वहीं बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई गई है। ब्रजलाल के स्थान पर नए दलित चेहरे को मौका दिए जाने की चर्चा है।

गीता शाक्य के नाम को भी दोबारा मौका मिलने की संभावनाओं से जोड़ा गया है। सीमा द्विवेदी को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय होने की बात कही गई है। वहीं नीरज शेखर के मामले में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा किए जाने की बात सामने रखी गई है।

सपा को एक सीट बढ़ने का गणित:

समाजवादी पार्टी की राज्यसभा में एक सीट खाली हो रही है, जबकि विधानसभा में उसकी सदस्य संख्या के आधार पर उसे दो सीटें मिलने का गणित बताया गया है। इस तरह पार्टी को एक अतिरिक्त सीट मिलने की संभावना है।

रामगोपाल यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले नेताओं में शामिल हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्हें राज्यसभा का टिकट मिलने की संभावना बताई गई है।

रामजीलाल गौतम की वापसी भाजपा के समर्थन पर निर्भर:

बसपा के रामजीलाल गौतम का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। दी गई जानकारी में उन्हें बसपा प्रमुख मायावती के करीबी नेताओं में बताया गया है। ऐसे में यदि भाजपा और बसपा के बीच राज्यसभा चुनाव में समर्थन का समीकरण बनता है, तो रामजीलाल गौतम को दोबारा राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

वहीं, यदि भाजपा की ओर से ऐसा समर्थन नहीं मिलता है तो बसपा के राज्यसभा में भी प्रतिनिधित्व समाप्त होने की स्थिति बन सकती है। इस तरह उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव भाजपा, सपा और बसपा के लिए अलग-अलग राजनीतिक और संख्यात्मक समीकरण सामने ला सकता है।

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