लेह-लद्दाख की ऊंचाई बनी मुसीबत, यूपी के 4 सांसद बीमार, अफजाल अंसारी को देना पड़ा ऑक्सीजन सपोर्ट

लेह-लद्दाख (Leh-Ladakh) के दौरे पर गए उत्तर प्रदेश के चार सांसदों की तबीयत ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण बिगड़ गई। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने से सांसदों को ऑक्सीजन सपोर्ट देना पड़ा, जबकि एक सांसद को नाक और मुंह से खून आने के बाद उपचार के लिए नई दिल्ली (New Delhi) स्थित एम्स (AIIMS) में भर्ती कराना पड़ा। यह दौरा उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति के कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया था।

16 मई 2026 को शुरू हुए इस दौरे का नेतृत्व तमिलनाडु (Tamil Nadu) से राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा (Tiruchi Siva) कर रहे थे। 17 सांसदों की इस समिति में उत्तर प्रदेश के चार सांसद भी शामिल थे। समिति ने लेह-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर वहां की परिस्थितियों और विकास कार्यों का जायजा लिया।

ऊंचाई पर पहुंचते ही बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं:

समिति के सदस्य 19 मई को समुद्र तल से लगभग 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित लेह पहुंचे थे। इसके अगले दिन सांसदों का दल करीब 14,588 फीट की ऊंचाई पर स्थित पैंगोंग झील (Pangong Lake) के भ्रमण पर गया। अचानक अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के कारण कई सांसदों और उनके साथ मौजूद परिजनों का ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरने लगा।

बताया गया कि पूरे दल में केवल दो या तीन सदस्य ही ऐसे थे जिन्हें ऑक्सीजन सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ी। अधिकांश लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ा और चिकित्सकीय सहायता लेनी पड़ी।

अफजाल अंसारी ने बताई परेशानी:

गाजीपुर (Ghazipur) से सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) ने बताया कि उनका ऑक्सीजन स्तर गिरकर 37 तक पहुंच गया था, जबकि सामान्य स्थिति में यह 91 से 100 के बीच होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लेह पहुंचने के बाद 48 से 72 घंटे का विश्राम आवश्यक होता है, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

अफजाल अंसारी के अनुसार उन्हें यात्रा के दौरान लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि वहां का तापमान शून्य या उससे नीचे तक पहुंच जाता है और पेड़-पौधों की कमी के कारण जीवन की परिस्थितियां काफी कठिन हो जाती हैं।

दरोगा प्रसाद सरोज को अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती:

सांसद दरोगा प्रसाद सरोज (Daroga Prasad Saroj) ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्र में पहुंचने के कुछ समय बाद ही उन्हें सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई। इसके बाद उनके नाक और मुंह से खून आने लगा। स्थिति को देखते हुए तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया।

उन्होंने बताया कि सात दिन के दौरे से लौटने के बाद उन्हें नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराना पड़ा, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी रहा। उन्होंने कहा कि लद्दाख क्षेत्र में जीवन की परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण हैं और वहां तैनात सैनिक कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा करते हैं।

अन्य सांसदों को भी मिली चिकित्सकीय सहायता:

सीतापुर (Sitapur) से सांसद राकेश राठौर (Rakesh Rathore) ने कहा कि लेह-लद्दाख में ऑक्सीजन की कमी सामान्य स्थिति है। स्थानीय लोग वहां के वातावरण के अभ्यस्त होते हैं, लेकिन बाहर से आने वाले लोगों को अक्सर परेशानी होती है।

उन्होंने बताया कि संसदीय समिति के साथ चिकित्सकों की टीम मौजूद थी, जिसके कारण सभी प्रभावित सदस्यों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी। बिजनौर (Bijnor) से सांसद चंदन चौहान (Chandan Chauhan) भी इस दौरे में शामिल थे और उनकी तबीयत भी ऑक्सीजन की कमी के कारण प्रभावित हुई थी।

30 साल बाद आमने-सामने आए दो पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी:

दौरे के दौरान एक दिलचस्प राजनीतिक घटना भी सामने आई। जम्मू (Jammu) स्थित राजभवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) ने संसदीय समिति का स्वागत किया। गाजीपुर की राजनीति में मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

अफजाल अंसारी के अनुसार वर्ष 1996 के बाद यह दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने उनका आत्मीयता के साथ स्वागत किया। बैठक के बाद उन्हें माता वैष्णो देवी का प्रसाद, पारंपरिक कश्मीरी शॉल और केसर भेंट स्वरूप प्रदान किया गया।

संवेदनशील स्थानों का भी किया दौरा:

संसदीय समिति ने अपने कार्यक्रम के दौरान उन स्थानों का भी दौरा किया जो पूर्व में आतंकी घटनाओं के कारण चर्चा में रहे हैं। समिति के सदस्यों ने वर्ष 2019 के पुलवामा (Pulwama) हमले से जुड़े क्षेत्र और पिछले वर्ष हुई पहलगाम (Pahalgam) घटना से संबंधित स्थान का भी निरीक्षण किया।

पश्मीना शॉल निर्माण की प्रक्रिया जानी:

दौरे के दौरान सांसदों ने कश्मीर (Kashmir) की प्रसिद्ध पश्मीना शॉल के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। अफजाल अंसारी ने बताया कि यह शॉल लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में पाए जाने वाले विशेष पशुओं के ऊन से तैयार की जाती है और इसकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।

इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India-SBI) द्वारा क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास परियोजनाओं और उनकी प्रगति की भी समीक्षा की गई। समिति ने इन परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

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