लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अफसरों की कार्यशैली पर इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। मामला ही कुछ ऐसा है कि बड़े-बड़े केंद्रीय मंत्री भी हैरान रह जाते हैं। अक्सर देखा जा रहा है कि चाहे प्रदेश स्तर की महत्वपूर्ण बैठक हो या केंद्र से जुड़े किसी अहम कार्यक्रम की वर्चुअल मीटिंग, कई बार अधिकारी नदारद ही रहते हैं और पूरा मोर्चा मंत्री जी को अकेले संभालना पड़ता है।
ताज़ा उदाहरण 23 अगस्त को देखने को मिला, जब सुबह 9 बजे बाढ़ राहत और रोग नियंत्रण को लेकर वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई। घर से जुड़ने की सुविधा थी, लेकिन विभाग के प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी नदारद रहे। नतीजतन प्रदेश के मंत्री जी को अकेले बैठक संभालनी पड़ी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस से जुड़े स्वच्छता पखवाड़े पर भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला।
सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय मंत्री, जो दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में दो बड़े मंत्रालय देख रहे हैं, यूपी के एक मंत्री के साथ वर्चुअल बैठक कर रहे थे। लेकिन अफसरों की व्यस्तता का आलम यह रहा कि न प्रमुख सचिव पहुँचे, न ही दूसरे सचिव। केंद्रीय मंत्री ने तंज कसते हुए कहा भी – “यूपी के सचिव लोग मंत्री की सुनते ही कहाँ हैं।”
दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण अवॉर्ड के मौके पर भी यूपी के अधिकारी अनुपस्थित पाए गए। यहां तक कि बिजली विभाग में भी लंबे समय से अफसरों की मनमानी पर चर्चाएं होती रही हैं। मंत्री जी को कई बार सार्वजनिक मंच से नाराज़गी जतानी पड़ी, तब कहीं जाकर विभाग में थोड़ी सक्रियता दिखी।
राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यूपी के मंत्री अधिकारीशाही के इस रवैये के आदी हो चुके हैं? या फिर केंद्रीय मंत्री भी इन्हें ‘आदत डाल लो क्लब’ में शामिल करने वाले हैं। फिलहाल, अफसरों की यह ‘बिंदास’ कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है।
यूपी के अफसरों की ‘बिंदास’ कार्यशैली, बड़े-बड़े मंत्री भी हुए हैरान
