Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) में कैंसर के मरीज इन दिनों दवाओं की कमी का सामना कर रहे हैं, जबकि ब्लड प्रेशर, मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित मरीज दवाओं की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। जून माह में दवाओं के नए बैच बाजार में आने के बाद कई दवाओं के दाम करीब 25 फीसदी तक बढ़ गए हैं। कैंसर की कुछ दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण मरीजों को आवश्यकतानुसार वैकल्पिक दवाएं दी जा रही हैं।
प्रदेश में दवा कारोबार का बड़ा नेटवर्क:
प्रदेश में 60 हजार से अधिक थोक दवा दुकानें और लगभग 1.05 लाख पंजीकृत फुटकर दवा दुकानें संचालित हैं। Lucknow (लखनऊ), Agra (आगरा), Varanasi (वाराणसी) और Kanpur (कानपुर) प्रमुख दवा मंडियों में शामिल हैं। प्रदेश में मेडिकल स्टोरों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 100 करोड़ रुपये का दवा कारोबार होता है। देशभर में बिकने वाली कुल दवाओं में Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) की हिस्सेदारी 15 से 20 प्रतिशत बताई जाती है।
कैंसर की दवाओं की उपलब्धता हुई प्रभावित:
दवा बाजार में प्लैटिनम आधारित कैंसर की दवाओं की कमी बताई जा रही है। National Pharmaceutical Pricing Authority (नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी) द्वारा इन दवाओं की अधिकतम कीमत में 50 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इसके बाद सिसप्लेटिन की कीमत 7.26 रुपये प्रति मिलीलीटर से बढ़कर 10.89 रुपये प्रति मिलीलीटर और कार्बोप्लेटिन की कीमत 60.49 रुपये से बढ़कर 90.74 रुपये प्रति मिलीलीटर हो गई है। बताया गया है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण यह बदलाव किया गया है।
अस्पतालों में वैकल्पिक दवाओं का सहारा:
KGMU (केजीएमयू), Sanjay Gandhi PGI (संजय गांधी पीजीआई) और Cancer Institute (कैंसर संस्थान) में कैंसर की कुछ दवाओं के स्टॉक में कमी की बात सामने आई है। Cancer Institute (कैंसर संस्थान) के निदेशक Prof. MLB Bhatt (प्रो. एमएलबी भट्ट) ने नए स्टॉक के लिए ऑर्डर दिए जाने की जानकारी दी है। उपलब्ध दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर अन्य संस्थानों से संपर्क कर वैकल्पिक दवाओं की व्यवस्था भी की जा रही है। अन्य चिकित्सा संस्थानों की ओर से भी इसी प्रकार के प्रयास किए जाने की बात कही गई है।
बैच बदलने के साथ बढ़ रही दवाओं की कीमत:
जानकारी के अनुसार, दवा कंपनियां अपने उत्पादन के आधार पर नए बैच नंबर जारी करती हैं। कुछ कंपनियां कम उत्पादन दिखाकर अपेक्षाकृत जल्दी-जल्दी बैच नंबर बदलती रहती हैं। सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से 907 आवश्यक दवाओं की कीमतों में 0.65 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दी है। साथ ही 39 सामान्य उपयोग की दवाओं की खुदरा कीमतों पर अधिकतम सीमा तय करने का भी दावा किया गया है। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की दवाएं शामिल हैं।
हालांकि, बाजार में कई दवाओं की कीमतें बढ़ी हुई दिखाई दे रही हैं। उदाहरण के तौर पर बीपी की टेल्मा एच की कीमत 290 रुपये से बढ़कर 320 रुपये हो गई है, जबकि अर्थराइटिस में उपयोग होने वाली साज डीएस की कीमत 175 रुपये प्रति पत्ता से बढ़कर 210 रुपये प्रति पत्ता हो गई है।
विशेषज्ञों ने मरीजों को दी सलाह:
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी मरीज को निर्धारित कैंसर की दवा उपलब्ध नहीं हो रही है तो वह स्वयं दवा बदलने के बजाय अपने चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर दवा की डोज का समय बदल सकते हैं या फिर सुरक्षित वैकल्पिक दवा अथवा अन्य उपचार पद्धति की सलाह दे सकते हैं। जिन दवाओं की उपलब्धता प्रभावित है, उनके विकल्पों को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है।
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