भेड़िए के आतंक से दहशत में कैसरगंज



Bahraich: बहराइच के कैसरगंज क्षेत्र में सोमवार की रात भेड़िए के हमले ने गांव में खौफ का माहौल बना दिया। बुजुर्ग दंपत्ति खेत की रखवाली के लिए अपने घर के बरामदे में सो रहे थे, तभी रात करीब 2 बजे भेड़िए ने उन पर हमला बोल दिया। इस हमले में 80 वर्षीय छेदन का एक पैर और एक हाथ भेड़िया नोच ले गया, जबकि उनकी 75 वर्षीय पत्नी के सिर पर जानलेवा हमला कर दिया।

लगातार मौतों से गांवों में दहशत

भेड़िए के हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते कुछ दिनों में भेड़िए के हमलों में छह लोगों की मौत की चर्चा है, जबकि कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने न सिर्फ कैसरगंज, बल्कि बहराइच और आसपास के जिलों के सैकड़ों गांवों को दहशत में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते हैं।

वन विभाग की लापरवाही पर सवाल

जहां एक ओर गांव में लोग भय के साये में जी रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। भेड़िए का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को लग रहा है जैसे वन विभाग उसी तरह निश्चिंतता की नींद में सोया है, जैसे बुजुर्ग दंपत्ति हमले से पहले सो रहे थे।

कार्रवाई का इंतजार या आदेश का?

ग्रामीणों में यह चर्चा भी है कि शायद विभाग किसी बड़े राजनीतिक बयान का इंतजार कर रहा है। माना जा रहा है कि जब तक मुख्यमंत्री किसी सार्वजनिक मंच से इस मुद्दे पर चिंता जाहिर नहीं करेंगे, तब तक विभाग की मशीनरी हरकत में नहीं आएगी। इस इंतजार ने ग्रामीणों की पीड़ा और दहशत दोनों को और गहरा कर दिया है।

भय और असुरक्षा का आलम

ग्रामीणों का कहना है कि भेड़िए का खौफ अब आम जनजीवन को प्रभावित करने लगा है। खेत की रखवाली तो दूर, लोग घरों के बाहर तक निकलने से कतराने लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिजनों में भारी चिंता है। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, वे आक्रोश और असहायता के बीच जी रहे हैं।

कब रुकेगा यह सिलसिला?

कैसरगंज में बुजुर्ग दंपत्ति की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वन विभाग कब जागेगा। लगातार हो रही मौतों और हमलों के बावजूद कार्रवाई की सुस्त रफ्तार यह दर्शाती है कि जिम्मेदार तंत्र की प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा नहीं, बल्कि आदेश का इंतजार करना रह गया है।

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