Power Corporation प्रबंधन पर उत्पीड़न का आरोप
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ (U.P. State Electricity Board Engineers Association) ने ऊर्जा प्रबंधन के खिलाफ और निजीकरण के साथ-साथ अभियंताओं पर हो रहे उत्पीड़न के मुद्दे पर बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। अभियंताओं ने निर्णय लिया है कि वे 20 नवंबर से चरणबद्ध तरीके से अपना आंदोलन प्रारंभ करेंगे। यह निर्णय संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हुआ निर्णय:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में आवाज उठाने वाले अभियंताओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जब तक प्रबंधन अभियंताओं पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां बंद नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों पर जताई नाराजगी:
अभियंताओं ने आरोप लगाया कि मार्च 2023 में हुई हड़ताल और हाल के दिनों में चल रहे निजीकरण विरोधी आंदोलनों के दौरान कई अभियंताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। प्रबंधन ने बिजली निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभियंताओं पर न केवल विभागीय जांच बैठाई है, बल्कि स्टेट विजिलेंस (State Vigilance) से भी जांच कराई जा रही है।
निजीकरण में भ्रष्टाचार का आरोप:
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। इसके खिलाफ जब अभियंता अपनी आवाज बुलंद करते हैं, तो उन्हें अनुशासनहीन बताकर जांच का सामना करना पड़ता है। अभियंताओं का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ इसलिए की जा रही है ताकि निजीकरण के खिलाफ बोलने वालों को डराया जा सके।
20 नवंबर से शुरू होगा चरणबद्ध आंदोलन:
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं रुकी और भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो 20 नवंबर से अभियंता चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत करेंगे। आंदोलन के दौरान कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम भी शामिल किए जाएंगे। संघ का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक अभियंताओं की मांगों को पूरा नहीं किया जाता।
प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई रोकने की मांग:
अभियंताओं ने Power Corporation Management से मांग की है कि अभियंताओं के खिलाफ की जा रही अनुचित और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए। साथ ही निजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और अभियंताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।
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