उत्तर प्रदेश में भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की हालिया बैठक ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस बैठक के बाद संगठन स्तर पर नाराजगी सामने आई है और भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इसे लेकर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेतृत्व का साफ संदेश है कि भाजपा किसी एक वर्ग या जाति की नहीं, बल्कि सर्व समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली राजनीतिक पार्टी है और इसी सिद्धांत के तहत सभी जनप्रतिनिधियों को काम करना होगा। इसी क्रम में प्रदेश अध्यक्ष ने लगातार दूसरी बार विधायकों को चेतावनी देकर यह स्पष्ट कर दिया कि संगठन के खिलाफ मानी जाने वाली गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, ब्राह्मण विधायकों की बैठक की खबर सामने आने के बाद से ही संगठन में असहजता थी। इसे केवल आंतरिक चर्चा मानने के बजाय जातीय आधार पर की गई बैठक के रूप में देखा गया, जो पार्टी की मूल विचारधारा के विपरीत मानी गई। इसी वजह से प्रदेश नेतृत्व ने तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप किया।
प्रदेश अध्यक्ष की दो टूक चेतावनी:
मथुरा (Mathura) पहुंचे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा का संविधान और उसकी कार्यशैली किसी भी प्रकार की जातीय राजनीति की अनुमति नहीं देती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी के जनप्रतिनिधि अगर जातीय आधार पर बैठक करते हैं तो यह संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ है। इसी कारण उन्होंने संबंधित विधायकों को चेतावनी दी है और भविष्य में ऐसी किसी भी बैठक से दूर रहने को कहा है। चौधरी ने यह भी जोड़ा कि पार्टी के भीतर संवाद का मंच संगठन उपलब्ध कराता है, लेकिन उसका स्वरूप सर्वसमावेशी होना चाहिए।
48 घंटे में दूसरी बार लगी फटकार:
यह पहला मौका नहीं है जब प्रदेश अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले 25 दिसंबर को भी उन्होंने ब्राह्मण विधायकों को स्पष्ट शब्दों में समझाया था कि किसी भी तरह की नकारात्मक राजनीति या गुटबाजी से बचें। उस समय उन्होंने कहा था कि यदि इस तरह की गतिविधियां दोहराई जाती हैं तो उन्हें अनुशासनहीनता माना जाएगा। लगातार दूसरी चेतावनी से यह साफ हो गया है कि प्रदेश नेतृत्व इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
बैठक का खुलासा और सियासी हलचल:
लखनऊ (Lucknow) में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक का खुलासा 23 दिसंबर को एक प्रमुख समाचार माध्यम द्वारा किया गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि बैठक किस उद्देश्य से बुलाई गई थी और इसकी अगुआई किसने की। इसके बाद से ही प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर भाजपा पर सवाल उठाए, जबकि पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुशासन का हवाला देते हुए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
प्रदेश यात्रा पर निकले पंकज चौधरी:
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी पहली बार प्रदेश दौरे पर निकले हैं। शनिवार सुबह वे मथुरा पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। चौधरी ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि अपनी पहली यात्रा भगवान बांके बिहारी के आशीर्वाद से शुरू करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ संवाद में यह भी कहा कि पार्टी का लक्ष्य सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
2027 को लेकर संदेश:
मथुरा में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा कि उन्होंने भगवान से यही कामना की है कि उन्हें इतनी शक्ति मिले कि वे सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को प्रचंड बहुमत दिला सकें। उन्होंने जोर दिया कि संगठन की मजबूती तभी संभव है जब सभी नेता और कार्यकर्ता पार्टी की नीति और अनुशासन का पालन करें।
संगठनात्मक अनुशासन पर जोर:
इस पूरे घटनाक्रम से यह संदेश साफ निकलकर आया है कि भाजपा नेतृत्व जातीय आधार पर किसी भी तरह की राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहता है। पार्टी का फोकस संगठनात्मक एकता और सर्व समाज के प्रतिनिधित्व पर है। प्रदेश अध्यक्ष की लगातार चेतावनियों को इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, ताकि आने वाले समय में पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी या असंतोष को रोका जा सके।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com
#bjp #brahmin #mla #meeting #pankajchoudhary #uttarpradesh

