प्रयागराज (Prayagraj) में 3 जनवरी से शुरू होने वाले माघ मेले से पहले साधु-संतों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। मेले की तैयारियों के बीच रहने की व्यवस्था और सुविधा पर्ची न मिलने से नाराज साधु-संत मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। शुक्रवार रात से ही 100 से अधिक साधु-संत कार्यालय के बाहर डटे रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। साधु-संतों का कहना है कि मेले में आने वाले कल्पवासियों और संत समाज के लिए अब तक बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित नहीं की गई हैं, जिससे उनमें भारी असंतोष है।
धरने पर बैठे साधु-संतों का आरोप है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी माघ मेले से पहले उन्हें जमीन आवंटन और सुविधा पर्ची का इंतजार कराया जा रहा है। जबकि मेला शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है। इसी को लेकर संत समाज ने एकजुट होकर विरोध का रास्ता अपनाया है।
धरने पर बैठे 100 से अधिक साधु-संत:
मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर शुक्रवार रात से ही साधु-संतों का जमावड़ा शुरू हो गया था। संतों का कहना है कि जब तक उन्हें मेले में ठहरने के लिए जमीन और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी पर्ची नहीं दी जाती, तब तक वे धरने से नहीं उठेंगे। शनिवार सुबह तक धरना लगातार जारी रहा और साधु-संत प्रशासन से सीधे बातचीत की मांग करते रहे।
संतों के अनुसार, माघ मेले में साधु-संतों की उपस्थिति परंपरागत रूप से रही है और वे यहां कल्पवास व धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। ऐसे में मेले से पहले व्यवस्थाएं न होना संत समाज के लिए अपमानजनक है। इसी भावना के साथ वे मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर डटे रहे।
एसडीएम के पहुंचने पर बढ़ा विवाद:
शनिवार करीब साढ़े 11 बजे SDM संजीव उपाध्याय मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठे साधु-संतों से बातचीत की। उन्होंने संतों से धरना समाप्त कर वहां से हटने के लिए कहा। इसी बात को लेकर संतों और SDM के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इस दौरान भावुक माहौल तब बन गया, जब एक संत SDM के पैरों पर गिर पड़ा और हाथ जोड़कर जमीन देने की गुहार लगाने लगा।
संत ने कहा कि यदि प्रशासन उनकी मांगें पूरी नहीं कर सकता तो उन्हें जेल भेज दिया जाए, लेकिन अनदेखी न की जाए। इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद लोगों में हलचल मच गई। SDM किसी तरह कार्यालय के भीतर प्रवेश कर पाए, लेकिन उनके अंदर जाते ही संतों का आक्रोश और बढ़ गया।
नारेबाजी और हंगामे का माहौल:
SDM के कार्यालय में प्रवेश करते ही बाहर धरने पर बैठे साधु-संतों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। संत समाज ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया और माघ मेले की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े किए। कुछ देर बाद संतों का एक दूसरा गुट भी मौके पर पहुंच गया, जिसमें करीब 25 से 30 लोग शामिल थे।
इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल बन गया और धरने पर बैठे कुछ लोगों को धक्का-मुक्की कर वहां से हटाया गया। स्थिति को बिगड़ते देख प्रशासन ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।
भारी पुलिस बल की तैनाती:
साधु-संतों के बढ़ते आक्रोश और संभावित तनाव को देखते हुए मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर करीब 200 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया। पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया और एहतियातन आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल मौजूद है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन संतों का धरना जारी है।
मांग पूरी होने तक धरने की चेतावनी:
धरने पर अड़े साधु-संतों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे वहां से नहीं हटेंगे। संतों का कहना है कि उनके पास दो ही रास्ते हैं, या तो प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करे या फिर उन्हें जेल भेज दे। वे बिना समाधान के अपने मठ और आश्रम लौटने को तैयार नहीं हैं।
संत समाज का मानना है कि माघ मेला आस्था और परंपरा का प्रतीक है और इसमें साधु-संतों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में उनकी अनदेखी से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव:
माघ मेले की शुरुआत से पहले इस तरह का विरोध प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। एक ओर मेले की तैयारियों को समय पर पूरा करना है, वहीं दूसरी ओर संत समाज की नाराजगी को दूर करना भी जरूरी हो गया है। फिलहाल प्रशासन की ओर से संतों को समझाने और स्थिति को शांत करने के प्रयास जारी हैं।
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