लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के आठ चयनित छात्रावासों के मरम्मत, अनुरक्षण और जीर्णोद्धार कार्यों के लिए 498.71 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। यह राशि कुल चार करोड़ अट्ठानबे लाख इकहत्तर हजार रुपये है। स्वीकृत धनराशि का उपयोग पहले से निर्मित छात्रावासों के मरम्मत और अनुरक्षण से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
इन आठ छात्रावासों को मिलेगी धनराशि:
विभाग की ओर से जिन छात्रावासों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है, उनमें राजकीय पॉलीटेक्निक, बहराइच (Government Polytechnic, Bahraich) के लिए 67 लाख 42 हजार रुपये, राजकीय इंटर कॉलेज, बरेली (Government Inter College, Bareilly) के लिए 64 लाख 81 हजार रुपये और राजकीय महिला पॉलीटेक्निक, गोरखपुर (Government Women’s Polytechnic, Gorakhpur) के लिए 67 लाख 93 हजार रुपये शामिल हैं।
इसी तरह चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, शताब्दी-2, कानपुर नगर (Chandra Shekhar Azad University of Agriculture and Technology, Kanpur Nagar) के लिए 66 लाख 52 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। राजकीय इंटर कॉलेज, प्रतापगढ़ (Government Inter College, Pratapgarh) के लिए 61 लाख 88 हजार रुपये, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय, पलही पट्टी, वाराणसी (Pt. Deen Dayal Upadhyay Government College, Palhi Patti, Varanasi) के लिए 57 लाख 10 हजार रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है।
इसके अलावा राजकीय इंटर कॉलेज, घोरावल, सोनभद्र (Government Inter College, Ghorawal, Sonbhadra) के लिए 58 लाख 76 हजार रुपये और राजकीय महाविद्यालय, बारा, कानपुर देहात (Government College, Bara, Kanpur Dehat) के लिए 54 लाख 29 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा खर्च:
स्वीकृत धनराशि का आहरण और व्यय जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा। इसके लिए निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश और कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत राशि का इस्तेमाल केवल उन्हीं अनुरक्षण कार्यों के लिए किया जाएगा, जिनके लिए धनराशि स्वीकृत हुई है।
कार्य शुरू करने से पहले सक्षम स्तर से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। स्वीकृत आगणन में सक्षम स्तर की पूर्व अनुमति के बिना किसी नए कार्य को जोड़ने या स्वीकृत कार्यों के आकार में वृद्धि करने की अनुमति नहीं होगी।
स्थानीय स्तर पर होगी कार्यों की निगरानी:
अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित छात्रावास के प्रधानाचार्य और जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी स्थानीय स्तर पर कार्यों का पर्यवेक्षण करेंगे। कार्य की गुणवत्ता और कार्य पूर्णता से संबंधित प्रमाण-पत्र मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके साथ ही मंडलीय उपनिदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण अपने भ्रमण के दौरान छात्रावासों में चल रहे अनुरक्षण कार्यों का निरीक्षण और पर्यवेक्षण करेंगे। इस व्यवस्था के माध्यम से स्वीकृत कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी तय की गई है।
शासन स्तर पर समिति करेगी भौतिक सत्यापन:
अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए शासन स्तर पर एक समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति कार्य पूरा होने के बाद संबंधित अनुरक्षण कार्यों का भौतिक सत्यापन करेगी। इसके माध्यम से स्वीकृत कार्यों के वास्तविक रूप से पूरा होने और निर्धारित कार्यों के अनुरूप कराए जाने की जांच की जाएगी।
नवीन निर्माण पर नहीं खर्च होगी राशि:
विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग संबंधित वित्तीय वर्ष में ही किया जाना है। इसे अगले वित्तीय वर्ष के लिए अग्रेषित नहीं किया जाएगा। स्वीकृत कार्य पहले से निर्मित छात्रावासों की मरम्मत और अनुरक्षण से संबंधित होंगे।
इन कार्यों में किसी भी प्रकार का नवीन निर्माण शामिल नहीं किया जाएगा। यानी स्वीकृत धनराशि का उद्देश्य नए भवन या नई निर्माण गतिविधियां कराना नहीं, बल्कि चयनित छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत, अनुरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य कराना है।
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