उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थित 31 पुरातात्विक महत्व के स्मारकों और स्थलों को संरक्षित घोषित किए जाने के लिए प्रथम विज्ञप्ति एवं अधिसूचना जारी करने की संस्तुति प्रदान की गई है। इन स्थलों को राज्य की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिन्हें संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
लखनऊ (Lucknow) में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह (Jaiveer Singh) ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश पुरातत्व परामर्शदात्री समिति ने इन स्मारकों और स्थलों को संरक्षित घोषित करने की संस्तुति दी है। इसके आधार पर संबंधित स्थलों के लिए प्रथम अधिसूचना जारी कर दी गई है।
गौरवशाली विरासत को सहेजने की पहल:
जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थित पुरातात्विक महत्व के स्थल हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के प्रतीक हैं। इन स्थलों में इतिहास के अनेक गौरवशाली अध्याय समाहित हैं। इन्हें संरक्षित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि संरक्षण की इस प्रक्रिया से इन स्थलों की पहचान और महत्व को नई मजबूती मिलेगी तथा उनके संरक्षण और रखरखाव का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
कई जनपदों के ऐतिहासिक स्थल सूची में शामिल:
संरक्षित घोषित किए जाने वाले स्थलों में सीतापुर (Sitapur), उन्नाव (Unnao), हरदोई (Hardoi), बाराबंकी (Barabanki), कानपुर नगर (Kanpur Nagar), रायबरेली (Raebareli), प्रतापगढ़ (Pratapgarh), फतेहपुर (Fatehpur), सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar), महाराजगंज (Maharajganj), देवरिया (Deoria), झांसी (Jhansi), जालौन (Jalaun), ललितपुर (Lalitpur), महोबा (Mahoba), गाजीपुर (Ghazipur), वाराणसी (Varanasi), आगरा (Agra) और मैनपुरी (Mainpuri) के पुरातात्विक महत्व के स्थल शामिल हैं।
इनमें शिव मंदिर, कुंड, प्राचीन टीले, समाधियां, बारादरी, तालाब, किले, बावलियां और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं शामिल हैं, जो प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं।
धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को मिलेगी सुरक्षा:
सूची में सीतापुर जिले के नवीनगर स्थित शिव मंदिर एवं कुंड, परेवाजाल का टीला, उन्नाव के माहेपासी का टीला, हरदोई के नागेश्वर मंदिर, बाराबंकी में राजा कुंवर गिरधारी सिंह की समाधि एवं बारादरी, कानपुर नगर के पंचमुखी शिव मंदिर और प्राचीन शिव मंदिर जैसे स्थल शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा रायबरेली के गंगकुंड, प्रतापगढ़ के प्राचीन शिव मंदिर तालाब, फतेहपुर के राधाकृष्ण मंदिर और पासी बाबा मंदिर को भी संरक्षण के लिए प्रस्तावित किया गया है।
बुंदेलखंड और पूर्वांचल के स्थलों को भी प्राथमिकता:
झांसी में स्थित गढ़वई दुर्ग, प्रस्तर शिव मंदिर, हजारिया महादेव मंदिर तथा यज्ञशाला और लक्ष्मणशाला शिव मंदिर भी संरक्षित किए जाने वाले स्थलों में शामिल हैं। जालौन जिले के रामजानकी हनुमान मंदिर, लटकबिहारी मंदिर, सराफी मंदिर, मदर घाट शिवालय और प्राचीन सूर्य मंदिर को भी इस सूची में स्थान मिला है।
ललितपुर जिले की प्राचीन बावली, महोबा क्षेत्र में स्थित चरखारी मंगलगढ़ का किला, गाजीपुर के पंच मंदिर, वाराणसी के शिव मंदिर और गोपाल लाल विला तथा आगरा के हतकांत किले को भी संरक्षण के लिए चिन्हित किया गया है।
संरक्षण से बढ़ेगा ऐतिहासिक महत्व:
सरकार का मानना है कि इन स्थलों को संरक्षित घोषित किए जाने से उनकी ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी। साथ ही इन धरोहरों के संरक्षण, रखरखाव और अध्ययन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और ऐतिहासिक स्थलों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
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