रिपोर्टर: प्रदीप शर्मा
गाजीपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC Regulations 2026 के विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा ने गाजीपुर कलेक्ट्रेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन संगठन के युवा जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह के नेतृत्व में किया गया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें UGC की नई नियमावली को वापस लेने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि उच्च शिक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण नियम में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो संवैधानिक मूल्यों और समानता के सिद्धांतों के विपरीत हैं। संगठन का आरोप है कि यह नियमावली देश की एक बड़ी आबादी के अधिकारों को प्रभावित करती है, इसलिए इसे बिना व्यापक विमर्श के लागू नहीं किया जाना चाहिए।
UGC Regulations 2026 पर उठे सवाल:
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए युवा जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि UGC द्वारा 15 जनवरी 2026 को अधिसूचित की गई यह नियमावली गंभीर संवैधानिक और विधिक सवाल खड़े करती है। उन्होंने बताया कि नई अधिसूचना के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है। इन कमेटियों को शिकायतों की जांच का अधिकार दिया गया है, जिससे विश्वविद्यालय परिसरों में एक नई व्यवस्था लागू होगी।
उनका कहना था कि इस तरह की व्यवस्था बिना स्पष्ट संतुलन और जवाबदेही के लागू की जा रही है, जो आगे चलकर विवाद और असंतोष का कारण बन सकती है। संगठन का मत है कि किसी भी नियम को लागू करने से पहले सभी वर्गों के हितों को समान रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।
संवैधानिक प्रावधानों से टकराव का आरोप:
राजकुमार सिंह ने आरोप लगाया कि यह अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में निहित समानता के अधिकार की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि नियमावली में SC, ST, OBC और दिव्यांग छात्रों के अधिकारों पर विशेष ध्यान दिया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
उनके अनुसार, यह स्थिति Equal Opportunity यानी समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करती है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की मूल संरचना सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करने की बात करती है, लेकिन नई अधिसूचना इस मूल भावना के खिलाफ जाती दिखाई देती है।
दुरुपयोग की आशंका और भय का माहौल:
संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि नियमावली में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर किसी भी प्रकार का दंडात्मक प्रावधान नहीं रखा गया है। इससे इस व्यवस्था के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। राजकुमार सिंह ने कहा कि यदि शिकायतों की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होगा, तो इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा का दावा है कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में इस नियम के लागू होने की चर्चा मात्र से ही विश्वविद्यालय परिसरों में भय और असंतोष का माहौल बन रहा है। संगठन का कहना है कि शिक्षा का वातावरण भयमुक्त और संतुलित होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में झुका हुआ।
सामान्य वर्ग के अधिकारों की अनदेखी का मुद्दा:
महासभा युवा ने यह भी स्पष्ट किया कि देश की बड़ी आबादी सामान्य वर्ग से आती है। संगठन का आरोप है कि इस तरह की नीतियां उनके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन करती हैं। उनका कहना है कि किसी भी नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होना चाहिए, न कि असंतुलन पैदा करना।
कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान यह दोहराया कि वे किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि समानता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि नियमावली में सभी वर्गों के अधिकारों का संतुलित रूप से समावेश किया जाए, तो इस पर व्यापक सहमति बन सकती है।
केंद्र सरकार से प्रमुख मांगें:
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि UGC की इस अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि सभी वर्गों के छात्रों के लिए एक निष्पक्ष, संतुलित और संविधानसम्मत नीति बनाई जाए, जिससे उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर और न्याय सुनिश्चित हो सके।
संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक यह अधिसूचना वापस नहीं ली जाती, तब तक वह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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