नेपाल से 55km दूर तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप:एक हफ्ते पहले बाढ़-भूस्खलन से तबाही मची थी; अब तक 1273 लोगों की मौत

नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर दूर तिब्बत में गुरुवार को 5 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के National Centre for Seismology (नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के Joshimath (जोशीमठ) से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप की गहराई जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे बताई गई है। फिलहाल भूकंप के कारण किसी तरह के नुकसान या लोगों के घायल होने की सूचना नहीं है।

कम गहराई में आए इस भूकंप को लेकर क्षेत्र में हलचल जरूर बढ़ी है। जमीन की सतह से कम गहराई पर आने वाले भूकंपों की भूकंपीय ऊर्जा सतह तक अपेक्षाकृत जल्दी पहुंच सकती है और रास्ते में कम कमजोर होती है। ऐसे में इनसे नुकसान की आशंका अधिक हो सकती है। हालांकि, इस भूकंप के बाद फिलहाल किसी नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।

तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप:

गुरुवार को आए भूकंप का केंद्र नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर दूर तिब्बत में बताया गया है। National Centre for Seismology (नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी) के अनुसार, इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। वहीं इसका केंद्र Joshimath (जोशीमठ) से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित बताया गया है।

भूकंप की गहराई कम होने के कारण इसकी तीव्रता और संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा बनी हुई है। हालांकि, अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान या लोगों के घायल होने की सूचना नहीं है।

बाढ़ और भूस्खलन के बाद आया भूकंप:

तिब्बत में यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब 26 अगस्त को तिब्बत और नेपाल में आई बाढ़ तथा भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में अब तक कुल 1,273 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है। इनमें Nepal (नेपाल) में 1,252 और Tibet (तिब्बत) में 21 लोगों की जान गई है।

इस आपदा के बाद लापता लोगों और मृतकों की पहचान का काम भी जारी है। बुरी तरह क्षतिग्रस्त शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच की जा रही है।

नेपाल की मदद के लिए भारत ने भेजी फोरेंसिक टीम:

आपदा के बाद मृतकों की पहचान में Nepal (नेपाल) को India (भारत) की ओर से तकनीकी सहायता दी जा रही है। भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भेजी है। यह टीम Kathmandu (काठमांडू) में Nepal Police (नेपाल पुलिस) और स्थानीय विशेषज्ञों के साथ काम कर रही है।

टीम शवों से डीएनए नमूने लेने, उनकी जांच करने और परिजनों के डीएनए से मिलान करने में तकनीकी मदद कर रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य आपदा में मारे गए लोगों की पहचान सुनिश्चित करना है।

डीएनए जांच से कैसे होती है पहचान:

डीएनए शरीर का आनुवंशिक कोड होता है, जो व्यक्ति को उसके माता-पिता से मिलता है। जुड़वां बच्चों को छोड़कर प्रत्येक व्यक्ति का डीएनए अलग होता है। इसी वजह से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त शवों की पहचान में डीएनए जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

फोरेंसिक विशेषज्ञ जरूरत के अनुसार हड्डी या दांत से डीएनए नमूना लेते हैं। इसके बाद इस नमूने का मिलान लापता व्यक्ति के परिजनों के डीएनए से किया जाता है। मिलान होने पर व्यक्ति की पहचान की विश्वसनीय पुष्टि करने में मदद मिलती है।

डीएनए जांच में लग सकता है एक से तीन सप्ताह:

आमतौर पर डीएनए जांच पूरी होने में एक से तीन सप्ताह तक का समय लग सकता है। हालांकि, आपदा की स्थिति में बड़ी संख्या में नमूने होने के कारण यह अवधि बढ़ सकती है। नई तकनीकों के इस्तेमाल से कुछ मामलों में 24 से 72 घंटे के भीतर भी रिपोर्ट मिलने की जानकारी दी गई है।

इस तरह आपदा के दौरान डीएनए जांच मृतकों की पहचान करने और उन्हें उनके परिवारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण माध्यम बनती है।

तिब्बत में करीब 100 नेपाली नागरिक लापता:

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई बाढ़ के बाद तिब्बत में करीब 100 नेपाली नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। Nepal Foreign Ministry (नेपाल विदेश मंत्रालय) के प्रवक्ता Lok Bahadur Chhetri (लोक बहादुर छेत्री) ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि तिब्बत के Kerung (केरुंग) इलाके में करीब 1,500 नेपाली नागरिक फंसे हुए हैं। उन्हें सुरक्षित निकालने की तैयारी की जा रही है।

भारत में मिले 19 शव नेपाल से पहुंचे:

Lok Bahadur Chhetri (लोक बहादुर छेत्री) के अनुसार, India (भारत) में कम से कम 19 शव भी मिले हैं, जो Nepal (नेपाल) की Bhotekoshi River (भोटेकोशी नदी) में आई बाढ़ के पानी के साथ बहकर वहां पहुंचे थे।

बताया गया कि ये शव Bhotekoshi River (भोटेकोशी नदी) से Trishuli River (त्रिशूली नदी) और Narayani River (नारायणी नदी) के रास्ते भारत पहुंचे। आपदा के बाद प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और मृतकों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है।

Disclaimer:

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