द किडनैपिंग किंग – गाजीपुर से अंडरवर्ल्ड का सफ़र

यह उस दौर की बात है जब शताब्दी खत्म होने वाली थी, लेकिन लखनऊ की जरायम की दुनिया में एक नया गैंग मजबूती से कदम जमा रहा था। यह गिरोह था बबलू श्रीवास्तव का, जिसके दुस्साहस के पीछे अंतरराष्ट्रीय माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम का दिमाग काम कर रहा था। एक के बाद एक वारदात से यूपी की पुलिस थर्रा रही थी। इसी बीच यूपी एसटीएफ का गठन हुआ। इसके बाद लंबा वक्त बबलू श्रीवास्तव और पुलिस के बीच जोर आजमाइश में गुजरा। बबलू श्रीवास्तव के गैंग की कमर टूटने से लेकर उसके जेल के सींखचों के पीछे जाने तक का घटनाक्रम रोमांचकारी उतार चढ़ाव की लंबी शृंखला है, जिसे यूपी एसटीएफ के संस्थापक सदस्य डीआईजी राजेश पांडे ने अपनी वीडियो सीरीज किस्सागोई में सिलसिलेवार ढंग से बयान किया है।

कौन है बबलू श्रीवास्तव ?
माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव का असली नाम ओम प्रकाश श्रीवास्तव है. वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का रहने वाला है. उनका घर आम घाट कॉलोनी में था. उसके पिता विश्वनाथ प्रताप श्रीवास्तव जीटीआई में प्रिंसिपल थे. बबलू का बड़ा भाई विकास श्रीवास्तव आर्मी में कर्नल है.

आईएएस या सेना अधिकारी बनना चाहता था बबलू
ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू ने एक बार पेशी के दौरान खुद मीडिया के सामने खुलासा किया था वह अपने भाई की तरह सेना में अफसर बनना चाहता था. या फिर उसे आईएएस अधिकारी बनने की ललक थी. लेकिन उसकी जिंदगी को कॉलेज की एक छोटी सी घटना ने पूरी तरह बदल दिया. और वह कुछ और ही बन गया.

जुर्म की दुनिया में पहला कदम
बबलू श्रीवास्तव की जिंदगी में सबकुछ ठीक चल रहा था. वह लखनऊ विश्वविद्यालय में लॉ का छात्र था. 1982 में वहां छात्रसंघ चुनाव हो रहे थे. बबलू का साथी नीरज जैन चुनाव में महामंत्री पद का उम्मीदवार था. प्रचार जोरों पर था. छात्र नेता एक दूसरे को हराने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे. इसी दौरान दो छात्र गुटों में चुनावी झगड़ा हुआ. जिसमें किसी ने एक छात्र को चाकू मार दिया. घायल छात्र का संबंध लखनऊ के माफिया अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना के साथ था. इस मामले में अन्ना ने बबलू श्रीवास्तव को आरोपी बनाकर जेल भिजवा दिया. यह बबलू के खिलाफ पहला मुकदमा था. यहीं से उसके मन में नफरत की आग जलने लगी थी.

अन्ना के विरोधी गैंग में एंट्री
बबलू श्रीवास्तव कुछ दिन बाद जमानत पर छूटकर बाहर आ गया. लेकिन अन्ना का गिरोह उस पर नजर लगाए बैठा था. पुलिस ने कुछ दिन बाद फिर से उसे अन्ना के कहने पर स्कूटर चोरी के झूठे आरोप में बबलू को जेल भेज दिया. इस घटना से नाराज घरवालों ने उसकी जमानत भी नहीं कराई. इसके बाद बबलू को दो हफ्ते जेल में रहना पड़ा. उसके बाद वाहन चोरी की की वारदातों में बबलू का नाम आ गया. इस बात परेशान होकर बबलू ने अपना घर छोड़ दिया. उसने एक हॉस्टल में रहने के लिए कमरा ले लिया. इसी दौरान वह अन्ना के विरोधी माफिया रामगोपाल मिश्र के सम्पर्क में आ गया और उसके लिए काम करने लगा. यही वो वक्त था जब बबलू ने अपराधी की दुनिया में कदम रख दिया था. अब वह पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता था.

किडनैपिंग किंग बन गया था बबलू
लॉ की शिक्षा हासिल करने वाला बबलू उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र तक अपनी पकड़ बना चुका था. उसने अंडरवर्ल्ड की दुनिया में अपहरण को तरजीह दी. इस धंधे में उसने कई लोगों को मात दे दी थी. उसके नाम पुलिस ने अपहरण के कई मामले दर्ज किए थे. उसने फिरौती के लिए कई लोगों का अपहरण किया. फिरौती वसूली. अपहरण की धमकी देकर भी कई बड़े लोगों से पैसा वसूल किया. अपहरण की दुनिया में उसके नाम का सिक्का चलने लगा था. छोटे गैंग अपहरण करके ‘पकड़’ उसे लाकर सौंप देते थे और फिर वह सौदेबाजी करके फिरौती की रकम वसूल करता था. पुलिस उससे कारनामों से परेशान थी. जुर्म की दुनिया में लोग उसे किडनैपिंग किंग कहने लगे थे.

अर्चना शर्मा

पुलिस की फाइलों में दर्ज है कि उसका नाम अर्चना शर्मा है। उसका जन्म लखनऊ में 17 नवंबर 1975 को हुआ। उसने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। इन बातों के अलावा पुलिसिया रिकॉर्ड यह भी बताती है कि वो ब्लैकमेलिंग, रंगदारी, किडनैपिंग और मर्डर जैसे संगीन अपराधों में शामिल रही है। इतना ही नहीं उसके संबंध कुख्यात बदमाश बबलू श्रीवास्तव, फजल-उर-रहमान, इरफान गोगा और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से भी रहे हैं। आज हम जिस महिला की बात कर रहे हैं उसपर कुख्यात गैंगस्टर का तमगा लगा है। कहा जाता है कि साल 2000 में नेपाल में इस कुख्यात महिला गैंगस्टर की ड्रग माफियाओं ने गोली मारकर हत्या कर दी। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।

अर्चना बालमुकुंद शर्मा उत्तर प्रदेश की एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद फिल्मों में किस्मत आजमाने के लिए वो मुंबई चली आई। यहां उसने कुछ एल्बम में काम भी किया। कहा जाता है कि साल 1990 में अर्चना की दोस्ती उस वक्त के खतरनाक गैंगस्टर बबलू श्रीवास्तव से लखनऊ में हुई थी। साल 1993-94 में अर्चना दुबई चली गई और उसने यहां एक कपड़ों की दुकान भी खोली। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक वो यहां कुछ सालों तक बबलू श्रीवास्तव के साथ ही रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुख्यात गोगा और फजल से हुई थी। जब साल 1995 में इंटरपोल ने सिंगापुर में बबलू श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया और उसे जब भारत लाया गया तब अर्चना भी वापस आ गई। भारत आने के बाद उसने मशहूर फिल्म ‘गैंगस्टर’ में देव आनंद के साथ काम भी किया। लेकिन इस दौरान वो फजल के लगातार संपर्क में थी जो बबलू श्रीवास्तव पकड़े जाने के बाद उसके लिए रंगदारी का काम देखता था।

दाऊद इब्राहिम के साथ किया काम
बबलू श्रीवास्तव ने कॉलेज से लॉ की पढ़ाई तो पूरी की लेकिन साथ ही वह अपराध की दुनिया में भी बहुत आगे बढ़ चुका था. 1984 से शुरू हुआ उसका आपराधिक ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा था. उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अपहरण, फिरौती, अवैध वसूली और हत्या जैसे संगीन मामले दर्ज होते गए. 1989 में वह पुलिस से बचने के लिए चंद्रास्वामी से मिला. लेकिन उसके साथ बबलू की ज्यादा नहीं बनी. बबूल वहां से नेपाल चला गया और कुछ साल वहां रहने के बाद वह 1992 में दुबई जा पहुंचा. जहां नेपाल के माफिया डॉन और राजनेता मिर्जा दिलशाद बेग ने उसकी मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम से कराई.

फिर टूट गई दोस्ती  

सिर पर दाऊद का हाथ आ जाने से बबलू श्रीवास्तव की ताकत बढ़ती जा रही थी, लेकिन 1993 में अचानक मुंबई एक साथ कई धमाकों से दहल गई। इन धमाकों के पीछे डॉन दाऊद इब्राहिम का नाम आने लगा, इसी दौरान छोटा राजन और बबलू श्रीवास्तव समेत कई लोगों ने डी कंपनी को अलविदा कह दिया।

एडिशनल कमिश्नर की हत्या में उम्रकैद

यूं तो अपने आपराधिक जीवन में बबलू श्रीवास्तव ने कई ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया था जो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं लगतीं लेकिन पुणे में एडिशनल पुलिस कमिश्नर एलडी अरोड़ा की हत्या के मामले में बबलू का नाम सुर्खियों में आ गया था। आरोप था कि बबलू और उसके साथी मंगे और सैनी ने सरेआम एडिशनल कमिश्नर अरोड़ा को गोलियों से भून दिया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए बबलू और उसके साथियों को अदालत ने दोषी माना और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

‘किसी लड़की से प्यार नहीं’
एलएलबी पास करीब 55 साल पार कर चुके बबलू को किसी लड़की से प्यार नहीं हुआ। उसे शादी के बारे में सोचने का मौका भी नहीं मिला। बबलू के खिलाफ दर्ज करीब 60 केसों में केवल चार बचे हैं। बाकी खत्म हो गए। पुणे के एडिशनल कमिश्नर एलडी अरोड़ा मर्डर केस में बबलू, उसके साथी मंगे और सैनी को उम्रकैद की सजा हुई है।

बबलू का अधूरा ख्वाब

कई साल से जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव ने ‘अधूरा ख्वाब’ नाम से एक किताब लिखी जिसमें उसने अपनी जिंदगी की कई घटनाओं का जिक्र किया है। किताब में वो वारदातें भी शामिल हैं जिनकी वजह से वह किडनैपिंग किंग कहलाने लगा था। उसने किताब में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से मुलाकात और उसके साथ काम करने का जिक्र भी किया है। साथ ही बबलू ने दाऊद से दुश्मनी और गैंगवार को भी किताब में जगह दी है।

कड़ी सुरक्षा के बीच बंद है बबलू

1995 में माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव मॉरिशस में पकड़ा गया था उसके बाद उसे भारत लाया गया। यहां उसके खिलाफ करीब 60 मामले चल रहे थे जिसमें से अब केवल चार लंबित हैं। कई मामलों में उसे सजा सुनाई जा चुकी है। इस दौरान कई बार ऐसे मामलों का खुलासा हुआ जिनमें बबलू की जान लेने की साजिश रची गई थी। इन सभी मामलों के पीछे अक्सर डी कंपनी का नाम आया। एक बार पुलिस ने खुलासा किया था कि बबलू की हत्या के लिए बड़ी सुपारी दी गई थी, लेकिन वह बच गया। फिलहाल, वह बरेली की सेंट्रल जेल में बंद है और उसे कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है।

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