बंगाल के नए CM सुवेंदु अधिकारी ने क्यों नहीं की शादी? संपत्ति से लेकर पढ़ाई-लिखाई तक, जानें सबकुछ
पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा, पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपत्ति और कानूनी मामलों को लेकर लोगों के बीच काफी दिलचस्पी बनी हुई है। बंगाल की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने वाले सुवेंदु अधिकारी अब राज्य के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं।
सुवेंदु अधिकारी का नाम खासतौर पर नंदीग्राम आंदोलन और पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़े राजनीतिक बदलावों के लिए जाना जाता है। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर अब राज्य की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
राजनीतिक परिवार से रखते हैं संबंध:
सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) पश्चिम बंगाल के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी (Shishir Adhikari) लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद भी रह चुके हैं।
उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी (Dibyendu Adhikari) और सौमेंदु अधिकारी (Soumendu Adhikari) भी राजनीति से जुड़े हुए हैं। पूर्वी मिदनापुर (Purba Medinipur) जिले में अधिकारी परिवार का मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। यही कारण है कि बंगाल की राजनीति में इस परिवार को एक बड़े राजनीतिक घराने के रूप में देखा जाता है।
शादी न करने का लिया फैसला:
सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तरह शादी नहीं की। उन्होंने खुद इसके पीछे की वजह भी सार्वजनिक रूप से बताई थी।
सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, साल 1987 में जब उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा, उस दौरान इलाके के स्वतंत्रता सेनानी सतीश सामंत (Satish Samanta), सुशील धारा (Sushil Dhara) और अजय मुखर्जी (Ajay Mukherjee) से वे काफी प्रभावित हुए। इन नेताओं ने बिना शादी किए देश सेवा का रास्ता चुना था, जिससे प्रेरित होकर सुवेंदु अधिकारी ने भी जीवनभर अविवाहित रहने का फैसला किया।
संपत्ति और आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चा:
चुनावी हलफनामों के अनुसार सुवेंदु अधिकारी के पास करीब 12 हजार रुपये नकद बताए जाते हैं। इसके अलावा बैंक जमा, जमीन, निवेश और अन्य चल-अचल संपत्तियां भी उनके नाम पर हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति लगभग 85.87 लाख रुपये बताई जाती है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि उनके ऊपर किसी प्रकार का कर्ज नहीं है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर:
सुवेंदु अधिकारी ने अपनी शुरुआती शिक्षा पश्चिम बंगाल में ही पूरी की। कॉलेज के दिनों से ही उनका झुकाव राजनीति की ओर रहा। छात्र राजनीति के माध्यम से उन्होंने संगठन और जनसंपर्क की राजनीति को करीब से समझा।
बाद में वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी के बड़े नेताओं में शामिल हो गए। नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें पूरे बंगाल में बड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई चुनाव जीते और राज्य सरकार में मंत्री भी रहे।
TMC छोड़ BJP में हुए शामिल:
सुवेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। हालांकि बाद में राजनीतिक मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने 17 दिसंबर 2020 को तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी। इसके तीन दिन बाद 20 दिसंबर 2020 को वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।
भाजपा में आने के बाद वे पश्चिम बंगाल में पार्टी का बड़ा चेहरा बनकर उभरे। 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद 2026 विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने नंदीग्राम सीट पर जीत दर्ज की।
कानूनी मामलों को लेकर भी रहे चर्चा में:
सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कई मामलों का जिक्र चुनावी हलफनामों और राजनीतिक आरोपों में होता रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार उनके खिलाफ 29 मामले दर्ज बताए जाते हैं। इनमें राजनीतिक प्रदर्शन, हिंसा और अन्य विवादों से जुड़े मामले शामिल हैं।
हालांकि सुवेंदु अधिकारी और भारतीय जनता पार्टी इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते रहे हैं। बंगाल की राजनीति में बड़े नेताओं पर कानूनी मामलों का सामना करना आम माना जाता है।
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