चीनी की बढ़ती कीमतों और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने केंद्र सरकार से सवाल किए हैं। शनिवार को उन्होंने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी और उपलब्धता को लेकर सरकार से तीन सवाल पूछे। खड़गे ने सवाल उठाया कि एक तरफ विदेश से चीनी का आयात किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किया जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है।
देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है। पिछले तीन महीनों में इसके दाम करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 19 रुपये प्रति किलो तक बढ़ने का दावा किया गया है। कीमतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना शुल्क आयात करने की मंजूरी दी है।
गन्ने की फसल प्रभावित होने से घटा उत्पादन:
नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के अनुसार, पिछले साल अधिक बारिश के कारण गन्ने की फसल को नुकसान हुआ। इसका असर चीनी की रिकवरी दर पर पड़ा और यह 12 प्रतिशत से नीचे पहुंच गई। इसका मतलब है कि 100 किलो गन्ने से 12 किलो से भी कम चीनी बनी। इससे देश में चीनी उत्पादन करीब तीन करोड़ टन रहा, जबकि अनुमान 3.2 करोड़ टन का था।
एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर सवाल:
सरकार की एथेनॉल मिश्रण नीति के तहत गन्ने का एक हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज और करीब 25 लाख टन चीनी बनाने योग्य गन्ने और शीरे का इस्तेमाल किया गया। इसमें 34 लाख टन गन्ना शामिल था।
हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा (Sanjeev Chopra) के अनुसार, घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव चीनी की कीमत बढ़ने के अन्य कारण हैं।
चीनी निर्यात और घटते स्टॉक पर भी चर्चा:
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। इसके बाद फरवरी 2026 में पांच लाख टन अतिरिक्त निर्यात की अनुमति दी गई। मई 2026 में कीमत बढ़ने के बाद चीनी के निर्यात पर रोक लगाई गई, लेकिन तब तक आठ लाख टन चीनी देश से बाहर भेजे जाने की बात कही गई है।
इसके चलते चीनी का स्टॉक 47 लाख टन से घटकर 39 लाख टन रह गया। मिलों के पास पेराई शुरू होने से पहले उपलब्ध शुरुआती स्टॉक भी पिछले वर्ष के मुकाबले कम बताया गया है। पिछले सीजन में यह स्टॉक 47 लाख टन था, जो इस बार घटकर 32 लाख टन रह गया।
त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग से कीमतों पर दबाव:
अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी और दीपावली जैसे त्योहारों के कारण मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है। इस दौरान मिठाई और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियां चीनी का भंडारण करने लगती हैं। अधिक मांग और कम स्टॉक की स्थिति में चीनी के दाम बढ़ने का दबाव बनता है।
चीनी के अलावा पिछले तीन महीनों में गुड़ के दाम में 24 प्रतिशत, चावल में 16 प्रतिशत और मक्के के आटे में 11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। चीनी की कीमतों में वृद्धि की एक वजह मिलों के पास बचे स्टॉक में कमी को भी बताया जा रहा है।
सरकार ने एथेनॉल को कीमत बढ़ने की वजह नहीं माना:
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा (Sanjeev Chopra) के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48 रुपये प्रति किलो थी, जो बढ़कर 56 रुपये प्रति किलो हो गई। वहीं, मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत सात से 10 दिनों के भीतर 47-48 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। उन्होंने मिलों की ओर से अचानक कीमत बढ़ाने को अनुचित बताया।
खाद्य सचिव के अनुसार, देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक चौथाई हिस्सा ही चीनी से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में करीब नौ प्रतिशत रह गई। मौजूदा सत्र में एथेनॉल के लिए 28 लाख टन चीनी डायवर्ट की गई है।
करीब एक दशक बाद फिर चीनी आयात:
भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। वर्ष 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड 1.1 करोड़ टन चीनी का निर्यात किया था। इसके बाद निर्यात में लगातार कमी आने की बात कही गई है।
घरेलू आपूर्ति पर दबाव होने की स्थिति में सरकार विदेश से कच्ची चीनी मंगाकर उसे घरेलू मिलों में परिष्कृत कर बाजार में उतारती है। वर्ष 2017 में आखिरी बार 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब एक दशक बाद फिर विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है।
चीनी उत्पादन घटा, अक्टूबर से बढ़ेगी आपूर्ति:
वर्ष 2025-26 में देश में चीनी उत्पादन 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था। रेड रॉट, टॉप बोरर और अधिक बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचने के कारण उत्पादन घटने की बात कही गई है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि सितंबर 2026 के अंत तक 33 से 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बचने का अनुमान है। सरकार के अनुसार घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए यह मात्रा पर्याप्त रहेगी।
चीनी मिलों में नए पेराई सत्र की शुरुआत इस बार 15 अक्टूबर के आसपास होने की संभावना है। इससे अक्टूबर में करीब 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनी रहेगी और त्योहारों के दौरान चीनी की कमी नहीं होगी।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा लागू:
सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक सीमा लागू की है। डीलरों के लिए 400 टन की सीमा निर्धारित की गई है। वहीं, एक सितंबर से बड़े थोक खरीदार 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
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