उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार के बाद राजधानी लखनऊ (Lucknow) की राजनीति में नए सियासी संदेशों और होर्डिंग्स को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) कार्यालय के बाहर लगाए गए एक होर्डिंग ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस होर्डिंग में सपा से दूरी बनाने वाले तीन विधायकों की तस्वीरें लगाई गई हैं, जिनके जरिए अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक तंज कसा गया है।
होर्डिंग में अयोध्या (Ayodhya) की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह, अमेठी (Amethi) की गौरीगंज सदर सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह और कौशांबी (Kaushambi) की चायल सीट से विधायक पूजा पाल की तस्वीरें दिखाई गई हैं। हालांकि तस्वीरों के साथ नाम नहीं लिखे गए हैं, लेकिन इसके साथ लिखा गया स्लोगन राजनीतिक संदेश दे रहा है। होर्डिंग पर लिखा गया है, “ना कैबिनेट मिला, न स्वतंत्र प्रभार। 2027 में होगी सबसे बड़ी हार।”
कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी चर्चा:
योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि समाजवादी पार्टी से अलग रुख अपनाने वाले नेताओं में केवल मनोज पांडेय को ही मंत्री पद मिला, जबकि अन्य नेताओं को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। इसी के बाद यह होर्डिंग सामने आया, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा होर्डिंग:
राजनीतिक जानकार इस होर्डिंग को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई प्रतीकात्मक राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं। माना जा रहा है कि इस तरह के संदेशों के जरिए राजनीतिक दल अपने समर्थकों के बीच माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सपा समर्थकों के बीच भी इस होर्डिंग को लेकर चर्चा बनी हुई है।
योगी कैबिनेट का हुआ दूसरा विस्तार:
उत्तर प्रदेश सरकार में रविवार को दूसरी बार कैबिनेट विस्तार किया गया। इस विस्तार में दो कैबिनेट मंत्री और चार राज्यमंत्री समेत कुल छह नए सदस्यों को शामिल किया गया। इसके अलावा दो राज्य मंत्रियों को पदोन्नति देकर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया।
राजभवन (Raj Bhavan) में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले भाजपा (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने शपथ ली। इसके बाद सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। दोनों नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
2027 चुनाव को लेकर तेज हुई सियासत:
कैबिनेट विस्तार और उसके बाद लगे इस होर्डिंग को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और प्रतीकात्मक संदेशों का दौर अभी से शुरू होता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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