सरकारी खजाने से सोमनाथ मंदिर बनवाने के खिलाफ थे गांधी:नेहरू उद्घाटन में क्यों नहीं गए; आज 75 साल पूरे होने पर मोदी जाएंगे

11 मई 1951 को गुजरात (Gujarat) के प्रभास पाटन (Prabhas Patan) क्षेत्र में स्थित सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) का पुनर्निर्माण पूरा होने के बाद उसका उद्घाटन किया गया था। यह वह ऐतिहासिक क्षण था, जब करीब 1300 वर्षों के दौरान सातवीं बार मंदिर नए स्वरूप में तैयार हुआ था। उस समय मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख और केंद्र सरकार में मंत्री रहे केएम मुंशी (KM Munshi) ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद (Rajendra Prasad) को उद्घाटन समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

हालांकि, जवाहरलाल नेहरू ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने केएम मुंशी से कहा था कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण उन्हें पसंद नहीं है और इसे उन्होंने “हिंदू पुनरुत्थानवाद” से जोड़कर देखा था। नेहरू के इनकार के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद कार्यक्रम में पहुंचे और उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। उस समय यह मामला राजनीतिक और वैचारिक चर्चाओं का केंद्र भी बना था।

75 वर्षों बाद फिर चर्चा में सोमनाथ मंदिर:

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अब एक बार फिर यह मंदिर राष्ट्रीय चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में शामिल होने के लिए सोमनाथ पहुंचने वाले हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री विशेष ध्वज फहराएंगे और मंदिर से जुड़े आयोजन में भाग लेंगे।

यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पिछले पांच महीनों में यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी सोमनाथ यात्रा होगी। इससे पहले भी वे सोमनाथ मंदिर पहुंचे थे। ऐसे में इस यात्रा को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इतिहास और वर्तमान के बीच बना चर्चा का विषय:

सोमनाथ मंदिर का इतिहास लंबे समय से देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चर्चाओं का हिस्सा रहा है। मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर उस समय देश के शीर्ष नेताओं के अलग-अलग विचार सामने आए थे। जहां एक ओर केएम मुंशी और राजेंद्र प्रसाद इस आयोजन से जुड़े, वहीं दूसरी ओर जवाहरलाल नेहरू ने इससे दूरी बनाए रखी थी। अब 75 साल बाद उसी ऐतिहासिक घटना की फिर चर्चा हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे के कारण ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ को लेकर लोगों के बीच भी उत्सुकता देखी जा रही है। सोमनाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और इसका ऐतिहासिक महत्व भी काफी बड़ा माना जाता है।

सोमनाथ यात्रा को लेकर बढ़ी हलचल:

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए सोमनाथ क्षेत्र में तैयारियां भी तेज हो गई हैं। अमृत महोत्सव के आयोजन के जरिए मंदिर के 75 वर्षों की यात्रा को विशेष रूप से याद किया जाएगा। कार्यक्रम में ध्वजारोहण समेत कई धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां होने की संभावना जताई जा रही है।

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