प्रदेश में शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों और उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों के मानदेय को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने को एक ऐतिहासिक कदम बताया गया। इस निर्णय के क्रियान्वयन को औपचारिक रूप देने के लिए राज्य स्तरीय “शिक्षामित्र सम्मान समारोह” का आयोजन गोरखपुर (Gorakhpur) स्थित योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
शिक्षामित्रों का राज्य स्तरीय सम्मान समारोह:
इस समारोह में मुख्यमंत्री ने 10 चयनित शिक्षामित्रों को प्रतीकात्मक चेक प्रदान कर बढ़े हुए मानदेय की शुरुआत की। साथ ही शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए उपलब्धि-आधारित स्टॉलों का अवलोकन भी किया गया, जहां शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों और योजनाओं को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन भी किया गया, जो विद्यालयों में विद्यार्थी नेतृत्व आधारित प्रार्थना सभाओं की गतिविधियों पर केंद्रित है। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि प्रदेश के सभी जनपदों में समानांतर रूप से शिक्षामित्र सम्मान समारोह आयोजित किए गए।
मानदेय वृद्धि और वित्तीय प्रावधान:
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि वर्ष 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था और अब इसे 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी गई है। इस निर्णय के लिए सरकार द्वारा लगभग 230.11 करोड़ रुपये की धनराशि जनपदों को जारी की गई है, जिससे भुगतान प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जा सके। उन्होंने कहा कि यह कदम शिक्षामित्रों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार:
संदीप सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग में कई संरचनात्मक सुधार किए गए हैं। “ऑपरेशन कायाकल्प” के तहत विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड और टाइल्स जैसी 19 मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यक्रम को लागू कर सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच शिक्षा स्तर का अंतर कम किया गया है।
डिजिटल शिक्षा और तकनीकी सशक्तिकरण:
प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 31,878 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित की गई हैं। साथ ही 14,988 विद्यालयों में आईसीटी लैब (ICT Lab) और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई है। शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए 2,61,530 टैबलेट वितरित किए गए हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया और अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बन सकी है।
बालिका शिक्षा और नामांकन अभियान:
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 6 से 12 तक विस्तारित किया गया है, जिससे बालिकाओं को निरंतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। इसके अलावा विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, बैग और स्टेशनरी के लिए 1200 रुपये की डीबीटी सहायता सीधे उनके अभिभावकों के खातों में भेजी जा रही है। “स्कूल चलो अभियान” के तहत 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच 20 लाख से अधिक नए विद्यार्थियों का नामांकन किया गया, जो शिक्षा क्षेत्र में सरकार की सक्रियता को दर्शाता है।
शिक्षामित्रों की भूमिका पर जोर:
मंत्री ने कहा कि शिक्षामित्र ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और वे नई पीढ़ी के भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने शिक्षामित्रों से अपील की कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करते रहें। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) को “उत्तम प्रदेश” बनाना है, जिसमें शिक्षामित्रों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।
निष्कर्ष और संकल्प:
कार्यक्रम के अंत में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा शिक्षामित्रों के सहयोग से राज्य की शिक्षा गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प दोहराया गया। पूरे आयोजन को शिक्षा सुधारों और शिक्षामित्रों के सम्मान के रूप में एक ऐतिहासिक पहल माना गया।
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