रिपोर्टर : अंकित दुबे
गाज़ीपुर के शादियाबाद थाना क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर हुए हमले के सात दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं। घटना के दौरान एक ही परिवार के तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें वाराणसी ट्रॉमा सेंटर(Varanasi Trauma Center) रेफर किया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्तर पर आक्रोश गहराता जा रहा है और पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
हमले की घटना और विवाद की पृष्ठभूमि:
शाहपुर शमशेर खां गांव में 7 नवंबर की सुबह यह हमला तब हुआ जब पीड़ित परिवार अपने नवनिर्मित मकान पर पानी का तराव कर रहा था। इसी दौरान पड़ोसी रिजवान खान, कमरान खान और शाहिद खान ने पुरानी रंजिश और भूमि विवाद को लेकर अचानक हमला कर दिया। बताया गया कि हमलावरों ने हथौड़े और फावड़े जैसे भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया, जिससे अहमद खान, उनकी पत्नी सबनम खान और उनकी बेटी शबा खान गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायलों की हालत और अस्पताल में उपचार:
हमले के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को पहले सीएचसी मनिहारी(CHC Manihari) ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया। बाद में तीनों को वाराणसी ट्रॉमा सेंटर(Varanasi Trauma Center) भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है और हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। परिवार के अनुसार घायलों की स्थिति बिगड़ती जा रही है और लगातार जीवन बचाने की कोशिशें की जा रही हैं।
आरोपियों की फरारी पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल:
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस मौके पर पहुंची तो जरूर, लेकिन हमलावर पहले ही घर में ताला लगाकर फरार हो चुके थे। सात दिन बाद भी गिरफ्तारी न होने से ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। शादियाबाद पुलिस केवल दबिश देने का दावा कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
पीड़ित परिवार की गुहार और पिछला विवाद:
पीड़ित परिवार ने डीजीपी(DGP), आईजी(IG) वाराणसी रेंज और एसपी(SP) गाज़ीपुर से मदद की अपील की है। परिवार का आरोप है कि राज्य की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पहले भी इन्हीं लोगों ने उन पर हमला किया था, लेकिन कार्रवाई न होने के कारण आरोपियों के हौसले बढ़ गए और इस बार उन्होंने और भी गंभीर वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस की देरी बढ़ा रही आशंका:
घटना के बाद से पुलिस की सुस्ती पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों और पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो यह तनाव किसी बड़े विवाद में बदल सकता है। इलाके में भय और असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है।
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