Video:जसवंत सिंह खालड़ा के कहानी: ‘सतलुज’ फिल्म में अइसन का बा, जे रिलीज होतहीं भारत से हटा दिहल गइल

दिलजीत दोसांझ के फिल्म Satluj (सतलुज) रिलीज होतहीं चर्चा के केंद्र बन गइल। ई फिल्म ZEE5 (जी5) पर रिलीज भइल रहे, बाकिर भारत में करीब 48 घंटा बादे प्लेटफॉर्म से हटा दिहल गइल। एह बारे में ZEE5 (जी5) बस एतने कहलस कि “मौजूदा परिस्थितियन” के चलते फिल्म फिलहाल उपलब्ध ना रही। एह घोषणा के बाद लोगन के बीच ई सवाल तेजी से उठे लागल कि आखिर एह फिल्म में अइसन का बा, जवना के चलते रिलीज होतहीं विवाद खड़ा हो गइल। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ई फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) के जिनगी आ उनकर संघर्ष पर आधारित बा।

पहिले ‘Punjab 95 (पंजाब 95)’ नाम से बनल रहे फिल्म:

बतावल जात बा कि Satluj (सतलुज) के पहिले Punjab 95 (पंजाब 95) नाम से बनावल गइल रहे। एह फिल्म के कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) के जीवन पर आधारित बा। एह वजह से फिल्म के कहानी सीधा पंजाब के ओह दौर से जुड़ जाला, जब राज्य में उग्रवाद, पुलिस कार्रवाई आ गायब भइल लोगन के मामला लगातार चर्चा में रहल। एह संवेदनशील विषय के चलते फिल्म शुरुआत से लोगन के नजर में रहल।

के रहलें Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा):

Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) के संबंध Amritsar (अमृतसर), Punjab (पंजाब) से रहे। शुरुआत में ऊ बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ल रहलें, बाकिर बाद में मानवाधिकार के मुद्दा पर खुल के आवाज उठावे लगलें। 1980 आ 1990 के दशक में पंजाब उग्रवाद, पुलिस कार्रवाई आ डर के माहौल से गुजर रहल रहे। ओही समय ऊ आरोप लगवले कि बहुते सिख नौजवानन के हिरासत में लेके गायब कइल गइल, जबकि कई लोगन के कथित फर्जी मुठभेड़ में मारल गइल आ बाद में “अज्ञात” बताके उनकर अंतिम संस्कार कर दिहल गइल।

बतावल जाला कि ऊ श्मशान घाट के रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज आ दोसर कागजात के आधार पर एह मामिला के सामने लावे के कोशिश कइले। उनकर दावा रहे कि अइसन कई लाशन के अंतिम संस्कार कइल गइल, जिनकर पहचान सार्वजनिक ना भइल, जबकि ऊ लोग पहिले पुलिस हिरासत से गायब बतावल गइल रहे।

मानवाधिकार के बड़ा मुद्दा कइसे बनल मामला:

जब Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) एह कथित हत्या आ गुपचुप अंतिम संस्कार के मामला उठवले, त साल 1995 में उनकर कथित अपहरण होखे के बात सामने आइल। बाद में ऊ सुरक्षित वापस ना लवटलें। धीरे-धीरे ई मामला देश के प्रमुख मानवाधिकार मुद्दा बन गइल।

बाद में भइल जांच आ अदालत में चले वाला कानूनी प्रक्रिया के दौरान Punjab Police (पंजाब पुलिस) के कुछ कर्मियन के भूमिका सामने आइल। लंबा कानूनी लड़ाई के बाद कई पुलिसकर्मियन पर कार्रवाई भइल। एह कारण जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पंजाब के सबसे चर्चित मानवाधिकार मामिलन में गिनल जाला।

फिल्म पर विवाद काहे भइल:

काहे कि Satluj (सतलुज) के कहानी जसवंत सिंह खालड़ा के जिनगी आ पंजाब के ओह संवेदनशील दौर पर आधारित बा, एहसे ई फिल्म शुरू से चर्चा में रहल। रिपोर्टन के मुताबिक, जब फिल्म रिलीज खातिर भेजल गइल त सेंसर बोर्ड कुछ कट आ बदलाव के सुझाव दिहलस। बाद में फिल्म सिनेमाघर के बजाय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज भइल, बाकिर भारत में करीब दू दिन बादे हटा दिहल गइल।

आखिर फिल्म में अइसन का बा:

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, Satluj (सतलुज) खाली एगो फिल्म ना ह, बल्कि पंजाब के ओह दौर के कहानी के प्रस्तुत करे के कोशिश बा, जब कई लोग गायब हो गइल, कई परिवार बरिसन तक जवाब खोजत रहल आ सच सामने लावे वाला लोग खुद जोखिम में पड़ गइल। फिल्म में Jaswant Singh Khalra (जसवंत सिंह खालड़ा) के ओह संघर्ष के देखावे के कोशिश कइल गइल बा, जवन ऊ कथित फर्जी मुठभेड़, गायब लोग आ गुपचुप अंतिम संस्कार के खिलाफ लड़त रहलें।

एह वजह से Satluj (सतलुज) के लोग खाली फिल्म ना, बल्कि इतिहास के एगो संवेदनशील आ चर्चित अध्याय के रूप में भी देख रहल बा। भारत में रिलीज होतहीं हटावल जाए के बाद ई फिल्म एक बेर फेरु चर्चा, विवाद आ सवालन के केंद्र में आ गइल बा।

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