संभल में प्रस्तावित 22 किमी की पदयात्रा को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद रद्द कर दिया गया है। मां कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज इस यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन के अनुरोध पर उन्होंने इसे सीमित दायरे में निकालने का निर्णय लिया। हजारों की भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील माहौल को देखते हुए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पदयात्रा पर प्रशासन की रोक:
डीएम राजेंद्र पैंसिया ने मां कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज से फोन पर बात की। महंत ने कॉल को स्पीकर पर रखा, जिसके बाद डीएम ने यात्रा को लेकर प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यात्रा को केवल मंदिर प्रांगण में सीमित रखा जाए और 22 किमी का मार्ग न निकाला जाए। डीएम ने संतों से जिले में कानून व्यवस्था और सौहार्द बनाए रखने में सहयोग की अपील भी की।
महंत का निर्णय और बदला आयोजन:
प्रशासन के अनुरोध के बाद महंत ऋषिराज ने 22 किमी की पदयात्रा को रद्द कर दिया और केवल मां कैला देवी मंदिर (Kaila Devi Mandir) के परकोटे में एक किमी की परिक्रमा निकालने का निर्णय लिया। इससे बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों में शांति बनी रही और किसी प्रकार की अराजकता से स्थिति बच गई।
मंदिर परिसर में जुटी भीड़:
पदयात्रा की घोषणा के बाद मंदिर परिसर में हजारों लोग एकत्र हुए। कई लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली और डीसीएम (DCM) वाहनों से पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग लगाई गई थी। इसी दौरान महंत के कुछ समर्थकों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की, जिस पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस पर महंत ऋषिराज इंस्पेक्टर पर नाराज हुए और समर्थकों को अंदर आने देने की बात कही। उन्होंने कहा कि मंदिर परकोटे की परिक्रमा हर हाल में की जाएगी।
22 किमी पदयात्रा पर विवाद:
महंत ऋषिराज गिरि ने पहले घोषणा की थी कि यह पदयात्रा मां कैलादेवी धाम से शुरू होकर 22 किमी दूर स्थित विवादित स्थल तक जाएगी, जहां हरिहर मंदिर परकोटे की परिक्रमा की जाएगी। लेकिन पुलिस द्वारा इस यात्रा की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके चलते प्रशासन ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग की थी ताकि पैदल यात्रा को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
कड़ी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था:
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। RAF और PAC के 200 से अधिक जवान लगाए गए थे। इसके अलावा 8 थानों की पुलिस और 4 क्षेत्राधिकारी (CO) भी स्थल पर तैनात रहे। लगभग 400 CCTV कैमरों और ड्रोन के माध्यम से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।
विरोध और आपत्ति का मामला:
3 दिन पहले महंत ऋषिराज गिरि द्वारा परकोटे की पदयात्रा की घोषणा के बाद जामा मस्जिद की इंतेजामिया कमेटी के पक्षकार सदर जफर अली ने इस पर आपत्ति दर्ज की थी। उनका कहना था कि इस तरह की परिक्रमा परंपरा का हिस्सा नहीं रही है और इसे शुरू करना अनुचित होगा। उनके अनुसार जिस स्थल की परिक्रमा की बात हो रही है, वहां पहले कभी ऐसा आयोजन नहीं हुआ।
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