रिपोर्टर- गुड़िया मद्धेशिया
देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही हो, लेकिन सलेमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Salempur Community Health Centre) की स्थिति इन प्रयासों के उलट दिखाई दे रही है। यहां इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को अव्यवस्था, लापरवाही और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इलाज से ज्यादा अव्यवस्था से जूझते मरीज:
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने पर सबसे पहले अव्यवस्था नजर आती है। मरीजों को पंजीकरण से लेकर डॉक्टर तक पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें संतोषजनक उपचार नहीं मिल पाता। इस कारण लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करने को विवश हो जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
डॉक्टरों की मौजूदगी पर उठे सवाल:
सलेमपुर सीएचसी में तैनात डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि निर्धारित समय पर डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं रहते। मरीज जब इलाज के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें अक्सर डॉक्टर के न होने की बात कहकर वापस भेज दिया जाता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ रहा है।
निजी पैथोलॉजी की पर्चियों से बढ़ी शंका:
अस्पताल के भीतर डॉक्टरों की मेज पर निजी पैथोलॉजी की पर्चियां खुलेआम मिलने से भी संदेह की स्थिति पैदा हो गई है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में निजी जांच केंद्रों की पर्चियां मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। जब इस संबंध में डॉक्टरों से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि लोग स्वयं पर्चियां रखकर चले जाते हैं। हालांकि बड़ा प्रश्न यह है कि निजी पैथोलॉजी संचालकों की अस्पताल परिसर तक पहुंच कैसे हो रही है।
स्वच्छता व्यवस्था बदहाल:
अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था भी बेहद खराब स्थिति में है। शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और साफ-सफाई का अभाव साफ नजर आता है। मरीजों का कहना है कि इलाज के लिए आए लोग यहां से नई बीमारियों का खतरा लेकर लौट सकते हैं। स्वच्छता की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी सफाई करने के बजाय कार्यालयी कार्यों में व्यस्त दिखाई देते हैं, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
जिम्मेदारों के जवाब अस्पष्ट:
जब इस पूरे मामले में सलेमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Salempur CHC) के प्रभारी से सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमटोल बातें कर मामले को टालने का प्रयास किया। इससे लोगों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि जिम्मेदार अधिकारी भी इस अव्यवस्था को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
जनता के भरोसे पर असर:
यदि जल्द ही स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका लाभ सही मायनों में आमजन तक पहुंचे। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना और दोषियों पर कार्रवाई करना आवश्यक है।
कब होगा सुधार, कब होगी कार्रवाई:
सवाल यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इन गंभीर खामियों पर कब संज्ञान लेंगे। क्या सलेमपुर सीएचसी की बदहाली यूं ही जारी रहेगी या फिर व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल आम जनता को इंतजार है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की यह तस्वीर कब बदलेगी और मरीजों को सम्मानजनक व सुरक्षित इलाज मिल पाएगा।
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