गाजीपुर (Ghazipur) के सैदपुर (Saidpur) थाना क्षेत्र के मुरादचक (Muradchak) गांव से एक बेहद मार्मिक और चिंताजनक मामला सामने आया है। गांव निवासी सुरेंद्र कश्यप (Surendra Kashyap), जो सड़क किनारे गुमटी लगाकर पान बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, ने कथित रूप से बिजली विभाग के बकाया बिल और उससे जुड़े वसूली के दबाव से परेशान होकर सल्फास खा लिया। उपचार से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और परिवार गहरे सदमे में है।
एक वर्ष पुराना मामला बना परेशानी की वजह:
परिजनों के अनुसार करीब एक वर्ष पहले बिजली विभाग की विजिलेंस टीम ने सुरेंद्र कश्यप के यहां छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के बाद उन पर लगभग 1 लाख 12 हजार रुपये का बकाया निर्धारित किया गया। बाद में मामला तहसील तक पहुंचा और आरसी जारी होने के बाद यह बकाया बढ़कर करीब 1 लाख 85 हजार रुपये हो गया। बताया जा रहा है कि बढ़ती देनदारी ने परिवार की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव बना दिया था।
राहत की कोशिश, लेकिन बढ़ता रहा दबाव:
परिवार का आरोप है कि सुरेंद्र कश्यप लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे और बकाया राशि में कुछ राहत मिलने की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि उन्हें राहत मिलने के बजाय बार-बार भुगतान के लिए कहा जाता रहा। परिजनों का कहना है कि बिजली विभाग और राजस्व विभाग से जुड़े कर्मी कई बार उनकी दुकान तक पहुंचे और वसूली का दबाव बनाया। परिवार का आरोप है कि दुकान बंद कराने की चेतावनी भी दी जाती थी, जिससे मृतक मानसिक रूप से परेशान रहने लगे थे।
आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों ने बढ़ाई चिंता:
मृतक की पत्नी ज्ञानती देवी (Gyanati Devi) ने बताया कि परिवार पहले से ही आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था। दो बेटियों की शादी की चिंता और बढ़ते कर्ज का बोझ सुरेंद्र कश्यप को लगातार परेशान कर रहा था। उन्होंने बताया कि सुरेंद्र अक्सर यह कहते थे कि यदि उनकी मृत्यु हो जाए तो शायद बकाया बिल और जुर्माने की समस्या समाप्त हो जाएगी। परिवार का कहना है कि यही चिंताएं धीरे-धीरे उनके मानसिक तनाव का कारण बनती चली गईं।
सुसाइड नोट में लिखी परेशानी की बात:
परिजनों के मुताबिक आत्महत्या से पहले सुरेंद्र कश्यप ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था। बताया गया है कि उस नोट में उन्होंने बिजली विभाग के बकाया और उससे जुड़ी परेशानियों का उल्लेख करते हुए अपनी व्यथा व्यक्त की थी। हालांकि सुसाइड नोट की जांच और उससे संबंधित तथ्यों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, अंतिम संस्कार संपन्न:
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। फिलहाल परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। इसके बावजूद यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है, जिनकी जांच और पड़ताल आगे की प्रक्रिया में की जाएगी।
जिलाधिकारी ने परिवार से मिलकर लिया हाल:
घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला (Anupam Shukla) स्वयं मृतक के गांव पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और यह जानने का प्रयास किया कि किन लोगों द्वारा मृतक पर मानसिक दबाव बनाए जाने की बात सामने आ रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि मृतक परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
जांच के बाद होगी कार्रवाई:
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला (Anupam Shukla) ने यह भी कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अनुचित रूप से मानसिक दबाव बनाया गया है तो जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।
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रिपोर्ट: प्रदीप शर्मा
ब्यूरो : हसीन अंसारी

