समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खां की मुश्किलें बढती जा रही हैं अब ख़बर सामने आ रही है कि जौहर विश्वविद्यालय में छात्रावास के निर्माण में केंद्रीय योजना से 93.48 लाख रुपये खर्च कर डाले और जौहर ट्रस्ट ने चयनित भूमि पर छात्रावास का निर्माण न कराकर दूसरी जगह करा दिया। अब जब मामला सामने सामने आया है तो केंद्र से दूसरी किस्त अटक गई और छात्रावास का निर्माण अधर में फंस गया है। बताया जा रहा है कि यह फर्जीवाडा और इसका खुलासा जिलाधिकारी की तरफ से कराई गई जांच में सामने आया है।

ख़बर के अनुसार जिलाधिकारी ने विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन छात्रावास के निर्माण और विवाद की वस्तुस्थिति की जांच कराई है। इस मामले कि जाँच सीडीओ की अध्यक्षता में वाली पांच सदस्य टीम ने की है। इस टीम में एडीएम राजस्व एवं वित्त, एसडीएम सदर, एसओसी एवं जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जौहर विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन छात्रावास का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की धनराशि का उपयोग भी छात्र हित में नहीं किया गया है। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से अपना केंद्रांश ब्याज सहित वापस मांगा है।
रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में गाटा-1153 में कोई भवन निर्मित ही नहीं है, जबकि गाटा-1445 में पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए निर्माणाधीन छात्रावास मौजूद है। राजस्व अभिलेख (नजरी नक्शा) के अनुसार, निर्माणाधीन छात्रावास की भूमि पर कोई विवाद नहीं है क्योंकि छात्रावास का निर्माण गाटा-1153 में किया जाना था, जहां न करके गाटा-1445 पर कराया गया है।जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बिंदुओं से स्पष्ट है कि जौहर ट्रस्ट ने तथ्य छुपाया है, पिछड़ा वर्ग छात्रावास के लिए प्रस्तावित गाटे की भूमि से विपरीत दूसरे गाटा-1445 की जमीन पर छात्रावास का निर्माण शुरू करा दिया जो आज भी अधूरा ही है।

ख़बर के अनुसार जौहर विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन छात्रावास को 18 महीने में बनकर तैयार होना था लेकिन, अब तक 8 साल का समय बीत गया है और आज भी ये छात्रावास अधूरा ही है। इस छात्रावास का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था। इसके निर्माण के लिए 1.94 करोड़ रुपये कुल लागत तय थी जिसमे 1.74 करोड़ रुपये केंद्रांश के थे और 19.4 लाख रुपये जौहर विश्वविद्यालय को लगाने थे। छात्रावास निर्माण के लिए दूसरी किस्त देने से पहले 8 मार्च 2018 को निदेशक पिछड़ा वर्ग ने जिलाधिकारी से मौके की रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले में जिलाधिकारी ने 14 मार्च 2018 को निदेशक को रिपोर्ट भेजी थी और इसमें संबंधित स्थल को विवादित बताया गया था, इसको ध्यान में रखते हुए निदेशक पिछड़ा वर्ग ने द्वितीय किस्त के 42.01 लाख रुपये केंद्र को लौटा दिए थे।

ख़बर के अनुसार जिलाधिकारी जोगिन्दर सिंह ने मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए बताया है कि जांच में स्पष्ट हो चुका है कि जौहर विश्वविद्यालय ने जिस गाटे की जमीन पर छात्रावास बनाने को केंद्रीय योजना से पैसा लिया, वहां बनाया नहीं है। एक तरह से ये बड़ी अनियमितता है। इस मामले में कार्रवाई के लिए शासन में रिपोर्ट भेजी है।

