मनुष्य को जन्म की तारीख का तो पता चल जाता है पर मौत की तारीख किसी को नहीं पता. लेकिन फिर भी इतना अंदाजा जरुर होता है कि उम्र की एक अवस्था आने पर ज़िन्दगी के अंतिम क्षण भी नज़दीक आ जाते हैं. यहाँ तक तो ठीक है लेकिन ना उम्र की वो अवस्था हो, न कोई बीमारी हो और तब भी किसी की मृत्यु हो जाए तब. इसे अनचाही मौत बोलते हैं और ये दो वजहों से आ सकती है एक खुद की लापरवाही और दूसरी, दूसरों की वजह से…
अनचाही मौत जाति, धर्म और पेशा देखकर नहीं आती, लेकिन जब ये आती है तो तबाही मचाती है. यहाँ केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, बल्कि उसका परिवार हर रोज मानसिक रूप से ना जाने कितनी बार मरता है. इस अनचाही मौत को देने वाले का गुनाह इतना बड़ा है कि उसको परिभाषित करने में शब्दों की कमी पड़ जाए.
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 में केवल सड़क हादसों में कुल 24118 लोगों की मौत हुई। किसी का परिवार उजड़ गया, किसी के सपने मर गये, इनमे से कोई देश का बेहतर भविष्य बन सकता था. इस खबर में जो तस्वीर आप देख रहे हैं, वो एक पुलिस कर्मी के अंतिम यात्रा की तस्वीर है. उनका नाम अनिल पाण्डेय था और उम्र करीब 45 वर्ष. अनिल आजमगढ़ में तैनात थे, उन्हें एक बेहतर पुलिस कर्मी कहा जाता था, वर्दी के प्रति वफ़ादारी और काम के प्रति ईमानदारी उनकी पहचान थी. अनिल पुलिस विभाग के लिए एक मजबूत स्तम्भ बन सकते थे, वो अपने संघर्ष और मेहनत से आगे बढ़ रहे थे लेकिन अनचाही मौत ने उन्हें अपना शिकार बना लिया.
बीते सोमवार की बात है, रात का वक़्त था, अनिल पाण्डेय अपने दो पहिया वाहन बुलेट से घर जा रहे थे, वर्दी में थे. वाराणासी के बढ़ागांव थाना क्षेत्र के सेहमलपुर गांव के पास अज्ञात वाहन ने उनको टक्कर मार दिया. हादसे के बाद अज्ञात वाहन मौके से भाग निकला. अनिल पाण्डेय गंभीर रूप से घायल हो गए. पीआरबी ने ग्रामीणों की मदद से घायल पुलिसकर्मी को हरहुआ स्थित न्यू लक्ष्मी हास्पिटल में भर्ती कराया. कांस्टेबल द्वारा बताए गए मोबाइल नंबर पर काल कर उनके स्वजन को हादसे की जानकारी दी गई. अस्पताल पहुंचे स्वजन उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आनन फानन में उन्हें वाराणसी के बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर लेकर चले गये, जहां देर रात उनकी मौत हो गई. अनिल पाण्डेय आजमगढ़ में तैनात थे. वो देर रात बुलेट से आशापुर के लोहिया नगर स्थित अपने आवास पर जा रहे थे.
सूचना पर पुलिस कर्मी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और क्षतिग्रस्त बुलेट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गयी। अनिल पाण्डेय पुलिस विभाग में अपनी पोस्टिंग के दौरान गाजीपुर में सेवा दे चुके हैं और यहीं उनका विवाह भी हुआ. गाजीपुर में उनके इमानदार छवि के वजह से उनके शुभचिंतकों की बड़ी संख्या है, हमारे संवादाता हसीन अंसारी ने बताया कि उनके मृत्यु की खबर सुनकर वहां गम का माहौल है, उनके ससुराल वालों के साथ बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए कि आखिर इन अनचाही मौत का जिम्मेदार कौन है? अनिल पाण्डेय का परिवार उनपर ही निर्भर था. दो बच्चे हैं जो अभी स्कूल और कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. इस घटना ने परिवार को अंतहीन दर्द दिया है. जिसकी जवाबदेही तो बनती है…
करीब 18 पहले लखनऊ के विपुल खंड स्थित स्मृति भवन में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को लेकर लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा का आयोजित किया गया था. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और आईआईटी रुड़की के सहयोग से आयोजित इस चर्चा में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए थे.
उत्तर प्रदेश वो राज्य है जहाँ प्रतिदिन औसतन 66 लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं. इनमें से 21 मौतें दोपहिया वाहन चालकों की होती हैं। वर्ष 2022 में राज्य में 21,000 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. यह आंकड़ा देश की कुल दुर्घटनाओं का लगभग 14 प्रतिशत है.
वहीँ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में सड़क हादसों में कुल 24118 लोगों की मौत हुई। इसमें 10092 लोगों यानि करीब 42 फीसदी मौतें सिर्फ 20 जिलों में हुईं. इनमें अवध क्षेत्र के लखनऊ, सीतापुर और बाराबंकी जिले भी हैं. यह खुलासा परिवहन विभाग की रिपोर्ट में हुआ है. अब परिवहन विभाग इस पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित विभिन्न विभागों की मदद लेगा.
रिपोर्ट के अनुसार रफ्तार से मरने वालों की संख्या नौ फीसदी बढ़कर 40 से 49 फीसदी हो गई है. गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करने से सात फीसदी की मौत हुई है. ऐसे ही गलत दिशा में गाड़ी चलाने से 12 फीसदी, रेड लाइट तोड़ने की वजह से एक फीसदी की मौत हुई है. 23 फीसदी की मौत की वजह अलग-अलग है.
कुछ लोगों की जान खुद की लापरवाही से चली जाती है लेकिन जिसकी जान दूसरों की लापरवाही से जाती है उसका क्या? BNS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत सड़क दुर्घटना में लापरवाही से मृत्यु होने पर, BNS की धारा 106 के तहत 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति दुर्घटना के बाद भाग जाता है, तो सजा बढ़ सकती है. पहले, सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों में IPC की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु) लागू होती थी। लेकिन अब BNS की धारा 106 इस मामले से संबंधित है. सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामले में पीड़ित परिवार को मुआवजे का भी प्रावधान है. सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों में, चालक के अलावा, सड़कों की खराब स्थिति या अन्य कारणों से भी जिम्मेदारी तय हो सकती है.
ये सत्य है कि मुआवजा और सहानभूति किसी के जख्म को नहीं भर सकते और न ही मृत व्यक्ति से उसकी तुलना की जा सकती है. लेकिन फिलहाल यही प्रावधान है. सवाल बड़ा है कि सड़क दुर्घटना में अनचाही मौत जा जिम्मेदार कौन?
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